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भारत के ‘पंच रत्न’, किसी ने तोड़ा कोरिया का घंमड तो किसी ने किया अनहोनी को होनी, कमाल की है इनकी कहानी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

वैसे तो एशियन गेम्स में भाग लेने वाले हर भारत के हर खिलाड़ी ने मेडल और देश का नाम रोशन करने के लिए जी जीन लगाई। पर जिन पांच खिलाड़ियों का जिक्र हम करने जा रहे हैं, उसके पीछे की वजह काफी खास है। इस खबर को अंत में वो खास वजह आपको अपने आप पता चल जाएगी

एक पुरानी कहावत थी, ‘पढ़ोगे लिखोगे तो होगे नवाब और खेलोगो कूदोगे तो बनोगे खराब’, लेकिन अब के नए जमाने में कहा जाता है, खेलोगो कूदोगे तो बनोगे और भी बड़े नवाब’। इस नए जमाने के कहावत को हाल ही में हमने एशियन गेम्स में एक बार फिर सच होते देखा। जापान में 16 दिन चले एशियन गेम्स में भारत चौथे स्थान पर रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज सहित 85 मेडल दिलाए।

वैसे तो एशियन गेम्स में भाग लेने वाले हर भारत के हर खिलाड़ी ने मेडल और देश का नाम रोशन करने के लिए जी जीन लगाई। पर जिन पांच खिलाड़ियों का जिक्र हम करने जा रहे हैं, उसके पीछे की वजह काफी खास है। इस खबर को अंत में वो खास वजह आपको अपने आप पता चल जाएगी।

बीमारी भी नहीं तोड़ पाई जीत का जज्बा

एशियन गेम्स में भारत के जिस खिलाड़ी की चर्चा सबसे ज्यादा रही वो हैं…नीरू ढांडा। ट्रैप शूटर नीरू ने एशियन गेम्स में अपने सटीक निशानों के दम पर एक नहीं बल्कि पूरे तीन मेडल अपने नाम किए। उन्होंने दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीता। नीरू ढांडा के मेडल जितने का सफर बिल्कुल आसान नहीं था। एशियन गेम्स के 10 दिन पहले तक वो अस्पताल में भर्ती थी, उसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और जपाना में अपना असली दम दिखाया।

तोड़ा कोरिया का घमंड

नीरू की तरह ही जिस खिलाड़ी की सबसे ज्यादा चर्चा रही वो हैं 17 साल की कुमकुम महोद। आर्चरी में कुमकुम ने कुल तीन मेडल अपने नाम किए, जिनमें दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल है। भारतीय महिला रिकर्व आर्चरी टीम ने एशियन गेम्स का सबसे बड़ा कमाल किया था। इस टीम में अंकिता भकत, कीर्ति और कुमकुम शामिल थे। तीनों की तिकड़ी ने टूर्नामेंट की सबसे मजबूत टीम साउथ कोरिया को मात देकर गोल्ड पर कब्जा जमाया था। इस जीत की अहमियत को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि दक्षिण कोरिया 10 बार की ओलंपिक चैंपियन है। 1978 के बाद से कोरियाई टीम कभी भी कोई फाइनल नहीं हारी थी। फाइनल में कुमकुम ने कमाल का प्रदर्शन किया था।

मिट्टी से निकला खरा सोना

कहते हैं भारत के खून में कुश्ती बसता है और ये देश की मिट्टी से जुड़ा हुआ खेल है। इसी मिट्टी से निकल एशियन गेम में सुजीत कलकल ने कमाल किया था। फाइनल में 9-2 से पीछे होते हुए भी उन्होंनेमुकाबले को 10-9 से अपने नाम किया था। सुजीत किसी मोटिवेशन से कम नहीं हैं। बता दें कि, सेमीफाइनल में भी सुजीत ने कमाल किया था। जापान के मौजूदा ओलंपिक चैम्पियन को हराकर उन्होंने खिताबी मुकाबले में जगह बनाई थी।

असली मोटिवेशन हैं विथ्या रामराज

अगर किसी को भी रियल लाइफ से मोटिवेशन लेना है तो उसे विथ्या रामराज की कहानी जरूर जाननी चाहिए। ट्रक ड्राइवर की बेटी विथ्या रामराज ने एशियन गेम्स में गोल्ड, सिल्वर और बॉन्ज्र तीनों मेडल अपने नाम किए। एशियन गेम्स 2026 में उन्होंने महिलाओं की 4×400 मीटर रिले में गोल्ड, मिक्स्ड 4×400 मीटर रिले में सिल्वर और 400 मीटर हर्डल्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता। आर्थिक तंगी को उन्होंने कभी अपने खेल पर भारी होने नहीं दिया। उनकी कहानी पूरे भारत के लिए किसी मोटिवेशन से काम नहीं हैं।

गोल्डेन गर्ल्स की कप्तान

इस लिस्ट में जिस पांचवे खिलाड़ी का नाम तो काफी खास है…भारती महिला हॉकी टीम की कप्तान सलीमा टेटे। झारखंड की सिमडेगा की रहने वाली सलीमा टेटे की कप्तानी में भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स में 44 साल बाद गोल्ड मेडल जीता। फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने चीन को 1-0 से हराकर गोल्ड जीता। इस जीत के साथ भारतीय महिला हॉकी टीम ने ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई भी कर लिया । सलीमा बेहद ही सामान्य परिवार से आती हैं। एशियन गेम्स में सलीमा टेटे और महिला हॉकी टीम के ये जीत काफी खास रही।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN