Source :- LIVE HINDUSTAN

मिडिल ईस्ट यानी खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर आई है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि देश के पास फिलहाल इतना तेल और गैस भंडार मौजूद है कि वह लगभग 76 से 80 दिनों तक अपनी जरूरतें पूरी कर सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर खाड़ी क्षेत्र का मौजूदा संकट और अधिक फैलता है या अन्य देशों तक पहुंचता है, तो स्थिति चिंताजनक हो सकती है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

दरअसल, हाल के दिनों में मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों का केंद्र माना जाता है और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। ऐसे में वहां किसी भी तरह की अस्थिरता का असर सीधे कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

CNN-न्यूज18 से बातचीत में हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि फिलहाल भारत की स्थिति मजबूत है और देश के पास पर्याप्त रणनीतिक और वाणिज्यिक तेल भंडार मौजूद हैं। लेकिन, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर यह संघर्ष सिर्फ खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता और दूसरे इलाकों में भी फैलने लगता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में तेल की कीमतों में तेज उछाल और आपूर्ति संबंधी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। देश अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर पड़ता है।

एक्सपर्ट का मानना है कि अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। इसका असर सिर्फ ईंधन पर ही नहीं, बल्कि परिवहन, खाद्य पदार्थों, उद्योगों और आम लोगों की जेब पर भी देखने को मिल सकता है। हालांकि, फिलहाल भारत ने अपने तेल स्रोतों में विविधता लाकर जोखिम को कुछ हद तक कम किया है। रूस, अमेरिका, ब्राजील और अफ्रीकी देशों से भी भारत बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहा है।

हरदीप सिंह पुरी के बयान से यह साफ है कि फिलहाल भारत के पास तत्काल किसी संकट का सामना करने के लिए पर्याप्त तेल और गैस भंडार मौजूद है। लेकिन, अगर भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक बना रहता है या संघर्ष नए क्षेत्रों तक फैलता है, तो ऊर्जा सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन सकती है। ऐसे में सरकार लगातार वैश्विक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक रणनीतियों पर भी काम कर रही है।

भारत फिलहाल सुरक्षित स्थिति में दिखाई देता है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारतीय अर्थव्यवस्था दोनों के लिए अहम परीक्षा साबित हो सकता है।

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