Source :- LIVE HINDUSTAN
काले सागर में तुर्की का एक जहाज आग लगने के बाद डूब गया। इस हादसे में कप्तान समेत दो क्रू सदस्यों की मौत हो गई। जहाज पर भारतीय और अजरबैजानी नागरिक सवार थे। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने हमले के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोमवार को कहा कि काला सागर में तुर्किये के झंडे वाले एक मालवाहक जहाज पर रूस के ड्रोन हमले के बाद लगी आग में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 11 अन्य लोगों को बचा लिया गया। उन्होंने बताया कि इस जहाज पर भारत और अजरबैजान के नागरिक सवार थे। हालांकि मारे गए नागरिक की पहचान उजागर नहीं किया गया हैय़ दूसरी ओर रूस ने भी यूक्रेन के दावे पर कुछ नहीं कहा है।
जेलेंस्की ने क्या कहा?
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि अविवादित जलक्षेत्र में तुर्किये के झंडे वाले और मक्का ले जा रहे एक मालवाहक जहाज पर दो रूसी ड्रोन ने भीषण हमला किया। उन्होंने लिखा कि जहाज पर भारत और अजरबैजान के नागरिक सवार थे। दुर्भाग्य से, अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक जहाज के कप्तान की मौत हो गई है। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ है। एक और व्यक्ति के बारे में अभी जानकारी जुटाई जा रही है।
जहाज के 11 क्रू मेंबर्स को बचाया गया
जेलेंस्की ने आगे बताया कि जहाज के चालक दल के 11 सदस्यों को बचा लिया गया, जिनमें से एक गंभीर रूप से घायल है। उन्होंने बताया कि यूक्रेन ने काला सागर क्षेत्र में तनाव में कमी लाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने का बार-बार प्रस्ताव दिया है। जेलेंस्की ने कहा कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा को बहाल करने के लिए दबाव की जरूरत है। और जो कोई भी इसमें सच में दिलचस्पी रखता है, उसे मदद करनी चाहिए।
दूसरी ओर तुर्की ने अपने जहाजों और नाविकों पर हमलों पर चिंता जताई है। तुर्की चैंबर ऑफ मैरीटाइम कॉमर्स के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद काला सागर में 226 आम और व्यावसायिक जहाजों पर हमला हुआ है। इनमें से ज्यादातर घटनाएं इसी साल हुई हैं। राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने इन हमलों को गलत बताया है।
रविवार को भारतीय कारोबारी के दवा गोदाम पर हमला
इससे पहले, रविवार को यूक्रेन के सुमी में रूस के हमले में भारतीय कारोबारियों के स्वामित्व वाले दवा गोदाम में कार्यरत 52 वर्षीय कर्मचारी की मौत हो गई। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारत सिर्फ वकालत करने से आगे बढ़ गया है और हाल के महीनों में उसने कीव और मॉस्को, दोनों के साथ बातचीत करके यूक्रेन संकट को सुलझाने की कोशिशें तेज कर दी हैं।
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