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मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन हारे तो ईरान पर बड़ा हमला कर सकते हैं ट्रंप? रिपोर्ट में दावा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

हाल ही में दिए गए एक रेडियो इंटरव्यू और फ्लोरिडा में अपनी चुनावी रैलियों के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कई बार संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ चल रहा यह संघर्ष जल्द ही एक नए निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकता है।

अमेरिका में होने जा रहे मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का खतरा एक बार फिर गहरा गया है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ एक बार फिर बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

न्यूज वेबसाइट ‘एक्सियोस’ ने एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से दावा किया है कि अगर मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है, तो डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ और ज्यादा आक्रामक रुख अपनाते हुए बड़े सैन्य हमले का आदेश दे सकते हैं। हालांकि, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि चुनाव परिणाम ईरान पर ट्रंप के फैसलों को प्रभावित नहीं करेंगे।

फिर हो सकता है छोटा एपिक फ्यूरी: ट्रंप का बड़ा संकेत

हाल ही में दिए गए एक रेडियो इंटरव्यू और फ्लोरिडा में अपनी चुनावी रैलियों के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कई बार संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ चल रहा यह संघर्ष जल्द ही एक नए निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकता है।

फ्लोरिडा की रैली में समर्थकों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, “हम एक और छोटा ‘एपिक फ्यूरी’ ऑपरेशन कर सकते हैं, या फिर वे (ईरान) खुद मान जाएंगे- अगर वे समझदार होंगे तो कहेंगे ‘चलिए काम की बात करते हैं।’ लेकिन मुझे शक है कि वे ऐसा करेंगे क्योंकि शायद वे समझदार नहीं हैं।”

‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ अमेरिका और इजरायल की ओर से इस साल फरवरी 2026 में ईरान के मिसाइल और परमाणु ठिकानों को तबाह करने के लिए शुरू किया गया व्यापक सैन्य अभियान था।

पेंटागन और सेंटकॉम प्रमुखों ने व्हाइट हाउस में दी सैन्य विकल्पों पर ब्रीफिंग

‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन के साथ अचानक व्हाइट हाउस पहुंचे।

शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति ट्रंप को मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ दोबारा बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करने के अलग-अलग सैन्य विकल्पों पर ब्रीफिंग दी। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी अधिकारियों ने अरब खाड़ी देशों के नेताओं को चुनावों के बाद एक छोटे लेकिन बेहद भीषण सैन्य अभियान के लिए तैयार रहने का संदेश भेजा है।

47 अरब डॉलर खर्च और गिरती अप्रूवल रेटिंग: घरेलू मोर्चे पर घिरे ट्रंप

ईरान के साथ जारी यह युद्ध अमेरिका के घरेलू राजनीतिक गलियारों में भी बड़ा मुद्दा बन चुका है।

पेंटागन की ओर से अमेरिकी कांग्रेस को दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, युद्ध के शुरुआती साढ़े सात महीनों में ही अमेरिकी करदाताओं का 47 अरब डॉलर से ज्यादा पैसा खर्च हो चुका है।

‘हार्टफोर्ड कैप्स-हैरिस’ के हालिया सर्वे के अनुसार, केवल 35% रजिस्टर्ड वोटर ही ईरान युद्ध से निपटने के ट्रंप के तरीके का समर्थन करते हैं।

वाशिंगटन का मेन टारगेट ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है, वहीं वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ का नियंत्रण और सुरक्षा एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मुद्दा बना हुआ है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN