Source :- LIVE HINDUSTAN
मुख्य बातें
- क्या आपने कभी सोचा है कि ज्यादातर मकानों का रेंट एग्रीमेंट सिर्फ 11 महीने के लिए ही क्यों बनाया जाता है? इसके पीछे एक बड़ी वजह रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियम और खर्च हैं
- अब उत्तर प्रदेश सरकार इन नियमों में बदलाव की तैयारी कर रही है
क्या आपने कभी सोचा है कि ज्यादातर मकानों का रेंट एग्रीमेंट सिर्फ 11 महीने के लिए ही क्यों बनाया जाता है? इसके पीछे एक बड़ी वजह रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियम और खर्च हैं। अब उत्तर प्रदेश सरकार इन नियमों में बदलाव की तैयारी कर रही है। इससे किराएदारों और मकान मालिकों को क्या फायदा होगा और 11 महीने के एग्रीमेंट का चलन क्यों है?
उत्तर प्रदेश में किराए के मकान में रहने वालों और मकान मालिकों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार किराए के मकानों से जुड़े नियमों में बदलाव की तैयारी कर रही है। इसके तहत रेंट एग्रीमेंट पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस का बोझ कम करने की योजना है। सरकार का मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों को किराए का लिखित और रजिस्टर्ड एग्रीमेंट बनवाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे मकान मालिक और किराएदार दोनों को कानूनी सुरक्षा मिल सकती है।
11 महीने का ही क्यों बनता है रेंट एग्रीमेंट?
देश में आमतौर पर 11 महीने का रेंट एग्रीमेंट बनाने का चलन है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि एक साल से कम पीरियड के कई लीज एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं होता। हालांकि, कुछ मामलों में अलग नियम लागू हो सकते हैं। वहीं, एक साल से ज्यादा अवधि की लीज के लिए आमतौर पर रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है।
दूसरी बड़ी वजह स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन का खर्च है। उत्तर प्रदेश में पुराने सिस्टम के तहत किराए के समझौतों पर लगने वाला खर्च संपत्ति की सर्किल रेट और अन्य कैलकुलेशन के आधार पर काफी बढ़ सकता था। ऐसे में कम किराए वाले मकानों के लिए भी एग्रीमेंट रजिस्टर्ड कराना महंगा पड़ सकता था।
1,000 रुपये स्टांप ड्यूटी लगाने की तैयारी
स्टांप और रजिस्ट्रेशन शुल्क राज्यमंत्री रवींद्र जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि सरकार सालाना 2 लाख रुपये तक के किराए वाले समझौतों के लिए 1,000 रुपये की स्टांप ड्यूटी लागू करने की योजना बना रही है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य रेंट एग्रीमेंट बनवाने और रजिस्टर्ड कराने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। हालांकि, प्रस्ताव के अंतिम नियम और लागू होने की तारीख की पुष्टि जरूरी होगी।
किराएदारों को कैसे होगा फायदा?
रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट होने से किराएदार के पास इस बात का पक्का डॉक्यूमेंट होगा कि वह किस मकान में कितने किराए पर और कितनी अवधि के लिए रह रहा है। मकान मालिक के अचानक मकान खाली कराने, किराया बढ़ाने या समझौते से इनकार करने जैसी स्थितियों में यह डॉक्यूमेंट मददगार हो सकता है।
मकान मालिकों को भी मिलेगी सुरक्षा
इस बदलाव से मकान मालिकों को भी फायदा मिल सकता है। लिखित और रजिस्टर्ड समझौते में किराए, पेमेंट की शर्तों और मकान खाली करने की तारीख जैसी बातें स्पष्ट रहेंगी। किराया नहीं देने या तय पीरियड खत्म होने के बाद मकान खाली नहीं करने जैसे विवादों में भी यह डॉक्यूमेंट काम आएगा।
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