Home National news hindi रांची में स्टूडेंट प्रोटेस्ट मार्च का आंखों-देखा हाल और अब ये आंदोलन...

रांची में स्टूडेंट प्रोटेस्ट मार्च का आंखों-देखा हाल और अब ये आंदोलन किस दिशा में जा रहा है?

5
0

Source :- BBC INDIA

प्रदर्शनकारी स्टूडेंट

  • प्रकाशित

  • पढ़ने का समय: 8 मिनट

मेघा नीट की तैयारी कर रही हैं और झारखंड प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी नहीं करना चाहतीं लेकिन फिर भी वो अनशन पर बैठे विद्यार्थियों का समर्थन करने आई हैं और आंदोलन स्थल पर ही रात बिता रही हैं.

उन जैसी कई और लड़कियां यहां हैं जिन्होंने दस अगस्त को विधानसभा घेराव के दौरान हुए लाठीचार्ज के बाद अनशन स्थल पर रुकने का फ़ैसला किया है.

मेघा कहती हैं, “मैं नीट स्टूडेंट हूं, मैं ख़ुद कभी सरकारी नौकरी नहीं करना चाहती लेकिन मुझे महसूस हुआ कि यहां आकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन ज़रूरी है, मैं सिर्फ़ इसलिए यहां हूं ताकि सरकार समझ सके कि छात्रों के मुद्दे के साथ हम जैसे लोग भी हैं जिनका जेपीएससी या जेएसएससी से कोई सीधा संबंध नहीं है.”

झारखंड की राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले 17 दिनों से सरकारी नौकरियों के लिए परीक्षाओं में धांधली के ख़िलाफ़ अभ्यर्थियों का प्रदर्शन और अनशन जारी है.

घेराव से पहले क्या हुआ?

कंटीली तारें

सरकार के साथ कई दौर की वार्ता में सहमति ना बनने के बाद सोमवार, दस अगस्त को विद्यार्थियों ने विधानसभा घेराव का आह्वान किया था.

सुबह नौ बजे से स्टूडेंट पुरानी विधानसभा परिसर के पास इकट्ठा होना शुरू हुए. यह अनशन स्थल से क़रीब सात किलोमीटर दूर है.

विद्यार्थियों को ऑटो और दूसरी गाड़ियों में भरकर विधानसभा परिसर तक पहुंचाया गया. सुबह साढ़े नौ बजे तक क़रीब पांच सौ स्टूडेंट ही यहां इकट्ठा थे.

लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा विद्यार्थियों की भीड़ बढ़ती चली गई. साढ़े दस बजे तक यहां संख्या हज़ारों में पहुंच गई.

पुरानी विधानसभा और नई विधानसभा के बीच क़रीब पांच किलोमीटर का फ़ासला है. रास्ते में पुलिस ने जगह-जगह बैरिकेड लगाए थे. कई जगह बैरिकेड पर कंटीली तारें भी लगी थीं.

एक-एक कर बैरिकेड हुए पार

पुलिस बल

झारखंड पुलिस के जवान भी बैरिकेड पर तैनात थे. विद्यार्थियों ने सुबह क़रीब 10:40 बजे पहला बैरिकेड पार कर लिया. पुलिस ने विद्यार्थियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कोई मशक़्क़त नहीं की.

इसके बाद एक-एक करके बैरिकेड पार करते हुए स्टूडेंट क़रीब 12 बजे जगन्नाथ मंदिर के पास तक पहुंच गई. यहां विद्यार्थियों ने नारेबाज़ी की. इस दौरान कई समूह खाने के पैकेट विद्यार्थियों को बांट रहे थे.

क़रीब एक बजे, विद्यार्थियों ने यहां लगा कंटीली तार का बैरिकेड तोड़ दिया. यहां भी कोई ख़ास टकराव या झड़प पुलिस के साथ नहीं हुई. इस बैरिकेड से क़रीब तीन सौ मीटर आगे झारखंड पुलिस ने बड़ा बैरिकेड लगाया था.

यहां दंगा रोधी वाहन, वॉटर कैनन और झारखंड आर्म्ड पुलिस के जवान तैनात थे. धीरे-धीरे यहां नारेबाज़ी तेज़ हुई और दोपहर क़रीब एक बजे यहां पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया.

इस दौरान प्रदर्शनकारियों की भीड़ यहां हज़ारों में पहुंच गई. क़रीब तीन बजे पुलिस ने आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया और प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच इस बैरिकेड पर झड़प हई.

जब विधानसभा के क़रीब पहुंचे प्रदर्शनकारी

प्रदर्शनकारी

इसी बीच, सैकड़ों प्रदर्शनकारी, बैरिकेड को बायपास कर विधानसभा भवन की तरफ़ बढ़ गए. शाम पांच बजे तक सैकड़ों प्रदर्शनकारी विधानसभा के क़रीब पहुंच गए.

बीबीसी से बात करते हुए अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने कहा, “जब तक छात्रों की सभी मांगें नहीं मान ली जाएंगी, तब तक ये आंदोलन चलता रहेगा.”

महतो स्ट्रेचर पर बैठे थे जिसे विद्यार्थियों ने कंधों पर उठा रखा था. अपने समर्थकों के साथ महतो भी विधानसभा स्थल के क़रीब पहुंच गए.

देर शाम क़रीब सात बजे, जब अंधेरा छाने लगा, विधानसभा के क़रीब पहुंचे प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए रांची पुलिस ने बलप्रयोग किया, इसमें कई विद्यार्थियों को चोटें भी आईं.

इस घटनाक्रम पर मीडिया से बात करते हुए रांची के पुलिस अधीक्षक पारस राणा ने कहा, “प्रदर्शनकारियों ने हमसे कहा था कि घेराव शांतीपूर्ण रहेगा. मार्च के आयोजकों ने प्रदर्शन में शामिल लोगों से कई बार शांत रहने का आग्रह किया, लेकिन बावजूद इसके पुलिस बलों पर पत्थरबाज़ी की गई, जिसमें पुलिस के तीन से चार जवान घायल हुए हैं. एक समय जब बैरिकेड तोड़ा गया तब नीचे गिरे तीन जवान भीड़ की चपेट में आ गए थे, उन्हें बचाने के लिए लाठीचार्ज किया गया. एक स्थान पर पत्थरबाज़ी हुई थी, उसे रोकने के लिए हमने डमी टियर गेस शेल फ़ायर किए थे.”

पुलिस अधीक्षक ने कहा, “80-90 प्रतिशत प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण थे, लेकिन 15-20 फ़ीसदी प्रदर्शनकारी ऐसे थे जिन्होंने आयोजकों की भी नहीं सुनी, पुलिस ने संयम बरतते हुए हल्का लाठीचार्ज किया जिसमें चार-पांच छात्र घायल हुए हैं.”

विधानसभा परिसर के पास हुए लाठीचार्ज के बाद प्रदर्शनकारियों में आक्रोश फैल गया. प्रदर्शन से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम लौटे कई प्रदर्शनकारियों ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि अब ये आंदोलन और तेज़ होगा.

मंच से बदली मांग

स्टूडेंट लीडर प्रेम नायक ने

देवेंद्रनाथ महतो के साथ अनशन पर बैठे आंदोलनकारी प्रेम नायक ने बीबीसी से कहा, “अब तक हम सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे थे लेकिन अब हम हेमंत सोरेन के इस्तीफ़े की मांग करेंगे.”

उन्होंने कहा, “प्रशासन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया है, अब हमें इसका हिसाब लेना ही होगा.”

वहीं, जेपीएससी-जेएसएसी रिफॉर्म मंच से जुड़े स्टूडेंट लीडर्स ने भी इसी तरह का बयान देते हुए बीबीसी से कहा, “अब हम तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक हमारी सभी मांगें मान नहीं ली जाती.”

सरकार के साथ वार्ता में शामिल रहे स्टूडेंट लीडर राजेश प्रसाद ने बीबीसी से कहा, “हम धीरे-धीरे भारी संख्या में विधानसभा भवन तक पहुंचे, सरकार की तरफ़ से किसी ने हमसे बात नहीं की, कोई मंत्री मिलने नहीं आया, प्रशासन ने हमसे पूछा कि आप कब तक यहां रुकेंगे, हमने कहा कि जब तक हमसे वार्ता नहीं की जाएगी हम यहीं बैठे रहेंगे. इसी बीच प्रशासन की कई गाड़ियां पहुंचीं और हमें दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया, लड़कियों पर लाठियां चलाई गईं. अब हम सरकार से खुले मंच पर वार्ता करेंगे, अब तक हम सरकार के पास जा रहे थे, अब सरकार को हमारे पास आना होगा.”

यहीं भूख हड़ताल पर बैठी उम्म हबीबा ने बीबीसी से कहा, “ये कोई सत्ता की लड़ाई नहीं है, हम सरकार को हटाने के लिए विरोध प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं, हम छात्रों की जायज़ मांग उठा रहे हैं, जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी ये धरना प्रदर्शन चलता रहेगा.”

लेकिन प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों में कुछ आवाज़ें ऐसी भी हैं जो अब हेमंत सोरेन के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.

स्टूडेंट लीडर प्रेम नायक ने बीबीसी से कहा, “अब तक हम परीक्षा धांधली की सीबीआई जांच और परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे थे, लेकिन जिस तरह का रवैया सरकार ने अपनाया है, अब हम हेमंत सोरेन के इस्तीफ़े की मांग करेंगे.”

झारखंड सरकार का कहना है कि उसने विद्यार्थियों की अधिकतर मांगें मान ली हैं. हालांकि सरकार ने सीबीआई जांच से अभी तक इनकार किया है. एक बयान में राज्य के तकनीकी शिक्षा मंत्री सुविद्या कुमार ने कहा था कि प्रदर्शनकारियों की 98 प्रतिशत मांगें मान ली हैं. हालांकि आंदोलनकारी इससे इनकार करते हैं.

राजेंद्र प्रसाद कहते हैं, “सीजीएल रद्द करवाना अब हमारा प्रमुख मुद्दा है, सबसे अधिक छात्र इसी से प्रभावित हैं. हम सीबीआई जांच चाहते हैं ताकि निष्पक्षता से जांच हो, हमें सीबीआई जांच के अलावा कुछ नहीं चाहिए.”

वहीं, आंदोलन में राजनीति के सवाल पर छात्र नेता राजेश प्रसाद कहते हैं, “ये छात्रों का आंदोलन है और हमने सभी राजनीतिक दलों को मंच पर जगह दी है, हमने जेएमम, आरजेडी, कांग्रेस, बीजेपी सभी को जगह दी है, सभी ने आंदोलन को नैतिक समर्थन दिया है, लोग इसमें राजनीति देख रहे हैं तो देखें.”

विद्यार्थियों में बढ़ती निराशा

प्रदर्शनकारी छात्र

प्रोटेस्ट मार्च के दौरान बीबीसी से बात करते हुए कई विद्यार्थियों ने कहा कि पिछले कई साल से लंबित परीक्षाओं और धांधली सामने आने के बाद अब उनमें निराशा बढ़ रही है.

प्रदर्शन में अधिकतर विद्यार्थी ऐसे थे जो सीजीएल परीक्षा की कई साल से तैयारी कर रहे हैं. ऐसे ही एक स्टूडेंट ने अपना नाम न ज़ाहिर करते हुए कहा, “मैं सात साल से रांची में रहकर तैयारी कर रहा हूं. पर्चा लीक और धांधली ने हमारा मनोबल तोड़ दिया है, अब इस तैयारी में इतना निवेश कर दिया है कि पीछे भी नहीं हट सकते.”

देर रात, मंच के क़रीब बैठे ऐसे ही एक और स्टूडेंट ने बीबीसी से कहा, “हमने इस प्रदर्शन में अब अपना सबकुछ झोंक दिया है. ये पहली बार है कि छात्रों के मुद्दे पर झारखंड में इतना बड़ा प्रोटेस्ट हो रहा है. आगे शायद हम इतना शक्तिशाली प्रदर्शन ना कर पाएं. अगर मांगें पूरी हुए बिना हमें पीछे हटना पड़ा तो इससे हमारा मनोबल टूट जाएगा.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट… सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.

SOURCE : BBC NEWS