अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए गठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से चंदे के वित्तीय विवरण प्रदान करने से इनकार कर दिया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इस निर्णय का कारण चल रही ऑडिट प्रक्रिया को बताया है, जिसमें अब तक कोई महत्वपूर्ण विसंगति नहीं पाई गई है।
**चंपत राय का बयान**
चंपत राय ने एक बयान में कहा, “श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट समय-समय पर आंतरिक ऑडिट करता है, जो ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक द्वारा किया जाता है। यह ऑडिट प्रक्रिया कई दिनों तक चलती है। वर्तमान में यह प्रक्रिया जारी है, और अब तक कुछ भी महत्वपूर्ण सामने नहीं आया है।”
**ऑडिट प्रक्रिया की पारदर्शिता**
ट्रस्ट की ओर से यह भी बताया गया कि नियमित वित्तीय निगरानी के तहत आंतरिक ऑडिट और भारतीय स्टेट बैंक की निगरानी में ऑडिट प्रक्रिया चल रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि ट्रस्ट अपनी वित्तीय गतिविधियों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
**राजनीतिक प्रतिक्रियाएं**
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चंदे के कथित गुम होने की खबरों पर गंभीर चिंता व्यक्त की और इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “मंदिर के चंदे के करोड़ों रुपये गायब होने की खबरें भक्तों के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं और यह ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक है।”
**ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता**
ट्रस्ट ने अपनी वित्तीय पारदर्शिता को लेकर कई कदम उठाए हैं। उदाहरण के लिए, दानदाताओं को आयकर अधिनियम की धारा 80G के तहत कर लाभ प्राप्त करने के लिए दान रसीदें प्रदान की जाती हैं। इसके अलावा, दान ऑनलाइन माध्यमों से भी स्वीकार किए जाते हैं, जिससे दानदाताओं के लिए प्रक्रिया सरल हो गई है।
**निष्कर्ष**
राम मंदिर ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय से चंदे के वित्तीय विवरण प्रदान करने से इनकार करते हुए चल रही ऑडिट प्रक्रिया का हवाला दिया है। ट्रस्ट का कहना है कि वर्तमान में कोई महत्वपूर्ण विसंगति नहीं पाई गई है। हालांकि, राजनीतिक दलों और जनता की ओर से वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में ट्रस्ट के लिए अपनी वित्तीय गतिविधियों में अधिक पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक होगा, ताकि जनता का विश्वास बना रहे।

