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लाल सागर में हूतियों की बढ़त ने बदला खेल, सऊदी अरब परेशान; खाड़ी में छिड़ेगी नई जंग?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। यमन के ईरान समर्थित हौथी लड़ाकों ने लाल सागर के दो अहम द्वीपों ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश पर कब्जा कर लिया है। इससे सऊदी अरब का तेल ले जाने वाला समुद्री रास्ता और खतरे में पड़ गया है।

पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। यमन के ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने लाल सागर के किनारे कुछ अहम द्वीपों पर कब्जा कर लिया है। इससे सऊदी अरब के लिए इस रास्ते से माल भेजना और मुश्किल हो गया है। सोमवार को अधिकारियों ने बताया कि हूतियों ने दक्षिणी लाल सागर में ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश द्वीपों पर कब्जा कर लिया है। इन द्वीपों पर कब्जे से उन्हें समुद्री जहाजों के रास्ते पर ज्यादा नियंत्रण मिल जाएगा।

न्यूज एजेंसी एपी ने दो सरकारी अधिकारियों और एक हूती अधिकारी के हवाले से बताया कि सऊदी समर्थित यमन सरकार से जुड़े सैकड़ों लड़ाके इन द्वीपों से पीछे हट गए। इसके बाद हूतियों ने वहां कब्जा कर लिया। यह घटना उस वक्त हुई, जब सरकारी सेना ने बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के पास हूतियों की बढ़त रोकने और उन्हें पीछे धकेलने की कोशिश कर रहे थे। बाब अल-मंडेब एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। इसे होर्मुज स्ट्रेट का विकल्प भी माना जाता है।

बता दें कि हनीश द्वीप बाब अल-मंडेब से करीब 160 किलोमीटर उत्तर में हैं। यहां हूतियों की तैनाती से सऊदी अरब के तेल ले जाने वाले जहाजों को खतरा बढ़ सकता है। सऊदी अरब अब इस रास्ते पर ज्यादा निर्भर है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट में ईरान जहाजों पर हमले कर रहा है। अब कहा जा रहा है कि अगर यही हाल रहा तो सऊदी अरब को भी जवाब देना पड़ सकता है। हालांकि ऐसा लगता है कि वह पूरे युद्ध में नहीं जाना चाहता। दूसरी ओर यमन एक्सपर्ट और अमेरिका स्थित सलाहकार मोहम्मद अल-बाशा ने सीएनएन से बात करते हुए कहा कि अब संकेत यही हैं कि सऊदी अरब बड़ी जवाबी कार्रवाई कर सकता है। इसकी संभावना हर दिन बढ़ रही है। उनके पास अब ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं।

होर्मुज पहले से हैं बंद

अमेरिका के साथ युद्ध के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को लगभग बंद कर दिया है। इसके बाद सऊदी अरब ने अपनी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन का ज्यादा इस्तेमाल शुरू किया। यह 1200 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन पूर्वी इलाके के तेल क्षेत्रों को लाल सागर के यानबू बंदरगाह से जोड़ती है। इसके जरिए सऊदी अरब रोजाना करीब 50 लाख बैरल तेल भेज रहा था। लेकिन पिछले गुरुवार को ड्रोन हमले के बाद यह रास्ता बंद कर दिया गया। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन इराक के दक्षिण-पूर्वी मैसान प्रांत से दागे गए थे। यह इलाका ईरान की सीमा के पास है और वहां ईरान समर्थित समूह लंबे समय से सक्रिय हैं।

गौरतलब है कि हूती उत्तरी यमन पर सऊदी अरब की हवाई और आर्थिक नाकाबंदी हटाने की मांग कर रहे हैं। ईरान से उनके रिश्ते अच्छे हैं, लेकिन सऊदी अरब के खिलाफ उनके अपने सियासी और सैन्य समस्या हैं। यही कारण है कि हूती की सरकारी एजेंसी सबा के प्रमुख ने शुक्रवार को सीएनएन से कहा था कि समूह तब तक दबाव बनाए रखेगा जब तक सऊदी अरब 12 साल पुरानी नाकाबंदी नहीं हटाता। इससे साफ है कि संघर्ष और बढ़ सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN