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लोन और EMI वालों को लग सकता है झटका! अक्टूबर में बढ़कर 5.50% तक पहुंच सकता है रेपो रेट

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • रॉयटर्स (Reuters) के इकोनॉमिस्ट पोल के मुताबिक, RBI अक्टूबर 2026 में रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर सकता है
  • 61 में से 35 अर्थशास्त्रियों ने इस बढ़ोतरी का अनुमान जताया है
  • अगस्त में रिटेल महंगाई बढ़कर 4.82% हो गई, जो RBI के 4% लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर है

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अक्टूबर की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (Monetary Policy Committee) मीटिंग में रेपो रेट बढ़ा सकता है। रॉयटर्स (Reuters) के 18 से 28 सितंबर के बीच किए गए इकोनॉमिस्ट पोल में करीब 60% यानी 61 में से 35 अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया है कि RBI अक्टूबर में रेपो रेट (Repo Rate) को 25 बेसिक प्वॉइंट्स बढ़ाकर 5.50% कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो फरवरी 2023 के बाद यह पहली रेट हाइक होगी। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

रेट बढ़ाने की सबसे बड़ी वजह?

रेट बढ़ाने की सबसे बड़ी वजह देश में बढ़ती महंगाई मानी जा रही है। अगस्त 2026 में रिटेल महंगाई बढ़कर 4.82% हो गई, जो RBI के 4% के मीडियम-टर्म टारगेट से लगातार तीसरे महीने ऊपर रही। महंगाई का दबाव अब केवल कुछ चुनिंदा वस्तुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि फूड एंड एनर्जी के साथ दूसरी कैटेगरीज में भी कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। इससे RBI के सामने इंफ्लेशन को कंट्रोल रखने की चुनौती बढ़ गई है।

डॉलर के मुकाबले रुपया 6% कमजोर

महंगाई के अलावा ग्लोबल इकोनॉमिक कंडीशन्स (Global Economic Conditions) और रुपये पर दबाव भी RBI के फैसले में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इस साल भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 6% कमजोर हुआ है। वहीं, मिडिल ईस्ट (Middle East) में तनाव के कारण एनर्जी प्राइस (Energy Prices) में उतार-चढ़ाव बढ़ा है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा इंपोर्ट (Import) करता है, इसलिए लंबे समय तक महंगा क्रूड ऑयल (Crude Oil) घरेलू महंगाई पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

दिसंबर में रेपो रेट 5.75% तक पहुंचने की संभावना

रॉयटर्स पोल (Reuters Poll) में एक और महत्वपूर्ण संकेत सामने आया है। 53 में से 29 अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि दिसंबर तक RBI कम से कम एक और 25 बेसिक प्वॉइंट्स (Basis Points) की बढ़ोतरी कर सकता है, यानी अक्टूबर में 5.50% तक जाने के बाद दिसंबर में रेपो रेट (Repo Rate) 5.75% तक पहुंचने की संभावना पर भी बाजार में चर्चा है। हालांकि, यह अभी केवल इकोनॉमिस्ट का अनुमान है और वास्तविक फैसला उस समय उपलब्ध इंफ्लेशन, ग्रोथ, लिक्विडिटी और ग्लोबल कंडीशन के आंकड़ों पर निर्भर करेगा।

ब्याज दर बढ़ने से लोन और EMI पर पड़ेगा असर

अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो इसका असर आम लोगों के लोन और EMI पर पड़ सकता है। बैंक्स के लेंडिंग रेट्स में बढ़ोतरी होने पर होम लोन, पर्सनल लोन और दूसरे फ्लोटिंग-रेट लोन्स महंगे हो सकते हैं। दूसरी ओर, ऊंची ब्याज दरें महंगाई पर काबू पाने और रुपये पर दबाव कम करने में मदद कर सकती हैं। RBI हाल में बैंकिंग सिस्टम में एक्सेस लिक्विडिटी को कम करने के लिए बॉन्ड सेल्स जैसे उपाय भी कर रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि Poll के मीडियन इस्टिमेट्स (Median Estimates) के मुताबिक रेपो रेट (Repo Rate) के 5.75% तक पहुंचने के बाद लंबे समय तक इसी स्तर के आसपास रहने की संभावना जताई गई है। रॉयटर्स (Reuters) के अनुसार, अनुमानित तौर पर यह दर कम से कम मध्य-2028 तक 5.75% रह सकती है, जिससे संभावित रेट-हाइकिंग साइकिल पिछले दशक के मुकाबले अपेक्षाकृत सीमित रह सकता है। हालांकि, आगे का रास्ता इंफ्लेशन और एनर्जी प्राइसेस समेत आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN