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वीबी-जी रामजी में मिलेगी मनरेगा से अधिक मजदूरी, कई राज्यों में ₹400 के पार

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Source :- LIVE HINDUSTAN

केंद्र सरकार ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में ‘विकसित भारत रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट’ (VB-G RAM G ) लागू कर दिया है। बुधवार से प्रभावी नए कानून के साथ मजदूरी की संशोधित और बढ़ी दरें भी लागू हो गई हैं। सरकार का दावा है कि वीबी-जी रामजी में निर्धारित दैनिक मजदूरी की न्यूनतम दरें मनरेगा की दरों से 28 रुपये अधिक हैं। योजना में सुनिश्चित किया गया है कि ग्रामीण श्रमिकों को रोजाना न्यूनतम 300 रुपये मजदूरी मिले।

केंद्र सरकार की ओर से जारी बयानों के अनुसार, मनरेगा के तहत पुरानी राष्ट्रीय औसत मजदूरी ₹298.8 प्रतिदिन थी। अब वीबी-जी रामजी के तहत यह बढ़कर औसतन ₹327.4 प्रतिदिन हो गई है। दोनों योजनाओं में मजदूरी दर की यह बढ़ोतरी का अंतर सीधे तौर पर ₹28.6 रुपये प्रतिदिन का है। प्रतिशत के हिसाब से देखें तो देशभर में मजदूरी में औसतन वृद्धि मनरेगा के मुकाबले 10 प्रतिशत से अधिक हुई है।

21 राज्यों में पहले 300 से कम थी मजदूरी

वीबी-जी रामजी की सबसे बड़ी विशेषता ₹300 प्रतिदिन की अंतरिम आधारभूत मजदूरी तय करना है। इसका मतलब यह है कि अब देश के किसी राज्य में ₹300 रुपये रोजाना से कम मजदूरी नहीं मिलेगी। इस नीति से देश के उन 21 राज्यों को सबसे बड़ा सहारा मिला है, जहां इससे पहले मजदूरी दरें ₹300 से कम थीं। संशोधन से पहले, पुरानी व्यवस्था के तहत न्यूनतम मजदूरी महज ₹241 प्रतिदिन थी।

नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा वृद्धि

सर्वाधिक वृद्धि वाले राज्यों की बात की जाए तो अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड सबसे आगे हैं। इन राज्यों में मजदूरी की दर में लगभग 24.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, असम, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे कम मजदूरी वाले राज्यों में भी उल्लेखनीय सुधार किया गया है।

इन राज्यों में सबसे ज्यादा मजदूरी

मनरेगा योजना के तहत कुछ राज्यों में पहले से ही मजदूरी अधिक थी। वीबी-जी रामजी के बाद इनमें और बढ़ोतरी हुई है। सबसे अधिक मजदूरी 450 रुपये प्रतिदिन सिक्किम की ऊंचाई वाली ग्राम पंचायतों में मिलेगी। इसके अलावा हरियाणा में 409, गोवा में ₹406 और केरल में ₹401 रुपये रोजाना मजदूरी दर तय की गई है।

रोजगार के दिनों में विस्तार

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने न केवल मजदूरी बढ़ाई है, बल्कि रोजगार की गारंटी को भी 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया है। उन्होंने बताया कि मजदूरी का यह नया ढांचा सालाना इंडेक्स और अंतरिम न्यूनतम मजदूरी दर को मिलाकर पारदर्शी तरीके से तैयार किया गया है।

ग्रामीणों की क्रय शक्ति बढ़ने की उम्मीद

केंद्र सरकार को भरोसा है कि रोजगार के अधिक दिनों और बढ़ी हुई मजदूरी से ग्रामीण इलाकों में संपत्ति का निर्माण होगा। इसके अलावा ग्रामीणों की क्रय शक्ति बढ़ने और समावेशी विकास को गति मिलने की भी उम्मीद है।

95 हजार करोड़ फंड आवंटित

केंद्रीय मंत्री चौहान ने बताया कि देशभर में अधिनियम के सुचारु क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को ₹95,692.31 करोड़ की अंतरिम राशि आवंटित की जा चुकी है। इससे अधिनियम लागू होने के पहले दिन से ही रोजगार उपलब्ध कराने, समय पर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करने और विकास कार्यों को बिना किसी बाधा के जारी रखने में मदद मिलेगी।

किस राज्य में कितनी है न्यूनतम मजदूरी

गोवा ₹ 406 , हरियाणा ₹ 409, केरल ₹401, सिक्किम ₹450, आंध्र प्रदेश ₹307, अरुणाचल प्रदेश ₹ 300, असम ₹300, बिहार ₹ 300,छत्तीसगढ़ ₹300 , गुजरात ₹316, हिमाचल प्रदेश ₹328, जम्मू और कश्मीर ₹ 329, झारखंड ₹300, कर्नाटक ₹349, लद्दाख ₹300, मध्य प्रदेश ₹300, महाराष्ट्र ₹312, मणिपुर ₹300, मेघालय ₹300, मिजोरम ₹300, नागालैंड ₹300, ओडिशा ₹ 300, पंजाब ₹336, राजस्थान ₹308, तमिलनाडु ₹336, तेलंगाना ₹307, त्रिपुरा ₹300 , उत्तर प्रदेश ₹300, उत्तराखंड ₹300, पश्चिम बंगाल ₹ 300, अंडमान-निकोबार ₹300, दादरा-नगर हवेली, दमन-दीव ₹300, लक्षद्वीप ₹300, पुडुचेरी ₹300।

(नोट : मजदूरी की यह दरें एक जुलाई 2026 से लागू हो चुकी हैं)

SOURCE : LIVE HINDUSTAN