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शहबाज़ शरीफ़ के बाद राष्ट्रपति अर्दोआन पहुँच रहे हैं सऊदी अरब, दूसरी तरफ़ पीएम मोदी और इसराइली पीएम ने की बात

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Source :- BBC INDIA

सऊदी अरब

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गुरुवार शाम इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से बात हुई थी. जब यह बातचीत हुई तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ सऊदी अरब पहुँच चुके थे.

देर रात तक यह भी स्पष्ट हो गया कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन भी सऊदी अरब पहुँच रहे हैं.

पश्चिम एशिया में पाकिस्तान और भारत का रुख़ बिल्कुल अलग है. भारत इसराइल का दोस्त है, जबकि पाकिस्तान इसराइल के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता है.

तुर्की के साथ पाकिस्तान की दोस्ती को भी भारत के हक़ में नहीं देखा जाता है. सऊदी अरब और पाकिस्तान में डिफेंस पैक्ट पहले से ही है.

इस डिफेंस पैक्ट में है कि दोनों में से किसी भी देश के ख़िलाफ़ आक्रामकता को दोनों देश अपने ख़िलाफ़ लेंगे. अब इस पैक्ट में तुर्की के भी शामिल होने की बात कही जा रही है.

सऊदी अरब के पास वित्तीय ताक़त है. पाकिस्तान के पास परमाणु क्षमता, बैलिस्टिक मिसाइलें और मानव संसाधन हैं जबकि तुर्की के पास सैन्य अनुभव है और उसने एक रक्षा उद्योग विकसित किया है.

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन शुक्रवार को सऊदी अरब पहुँच रहे हैं. यहाँ वह क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ से मुलाक़ात करेंगे. शहबाज़ शरीफ़ गुरुवार को ही सऊदी अरब पहुँच चुके हैं.

यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब इन तीनों क्षेत्रीय शक्तियों के बीच सहयोग लगातार गहरा रहा है.

तुर्की के राष्ट्रपति के संचार प्रमुख बुरहानत्तीन दुरान ने गुरुवार को बताया कि एक दिन की इस दौरे में अर्दोआन, मोहम्मद बिन सलमान और शहबाज़ शरीफ़ के साथ त्रिपक्षीय बैठक में हिस्सा लेंगे.

दुरान ने एक्स पर लिखा है, ”हमारे राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन सात अगस्त 2026 को एक दिन की कार्य यात्रा पर सऊदी अरब जाएंगे.

इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति अर्दोआन की सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद के अलावा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के साथ बैठक करेंगे.”

पाकिस्तान तुर्की

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क्या होने जा रहा है?

शहबाज़ शरीफ़ गुरुवार को तीन दिन की आधिकारिक यात्रा पर सऊदी अरब पहुँचे हैं. उनके साथ पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल भी है. माना जा रहा है कि उनकी बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा और रक्षा सहयोग प्रमुख मुद्दे होंगे.

हालांकि अंकारा ने बैठक का औपचारिक एजेंडा जारी नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि तीनों नेता क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री ख़तरों, ईरान युद्ध और रक्षा सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे.

क़तर के लुसैल यूनिवर्सिटी में मध्य-पूर्व मामलों के विशेषज्ञ डॉ मुहम्मद मज़हार साहिन मानते हैं कि इस मुलाक़ात में तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच सैन्य गठबंधन की घोषणा की जा सकती है, जिसका कई महीनों से इंतज़ार किया जा रहा था.

उनका कहना है कि सऊदी मीडिया में भी यही अटकलें लगाई जा रही हैं.

डॉ मुहम्मद मज़हार साहिन ने एक्स पर लिखा है, ”अगर ये अटकलें सही साबित होती हैं, तो मध्य-पूर्व एक नए दौर में प्रवेश कर सकता है और वहाँ बहुत कुछ बदल सकता है.”

अर्दोआन की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब एक हफ़्ते पहले ही सऊदी अरब ने लाल सागर, बाब अल-मंदेब स्ट्रेट और अदन की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाज़ों और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा के लिए एक बहुराष्ट्रीय समुद्री रक्षा गठबंधन की घोषणा की थी. यह पहल यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों से बढ़ते ख़तरे के बीच की गई है.

नेटो सदस्य तुर्की और परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान उन 14 देशों में शामिल थे, जिन्होंने सऊदी अरब के नेतृत्व वाली इस पहल का औपचारिक समर्थन किया है.

हालांकि तुर्की ने अभी तक यह घोषणा नहीं की है कि वह इस गठबंधन में कोई प्रत्यक्ष भूमिका निभाएगा, लेकिन पिछले महीने तुर्की ने हूतियों की ओर से सऊदी अरब की नाकेबंदी की धमकियों की निंदा की थी और लाल सागर में आवाजाही के लिए पैदा हुए ख़तरों को लेकर रियाद के साथ एकजुटता जताई थी.

सऊदी

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दौरे के पीछे की कहानी

यह यात्रा तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फ़िदान की जॉर्डन में मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलअती, पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक़ डार और सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फ़ैसल बिन फ़रहान के साथ हुई बैठक के बाद हो रही है. यह चार देशों के गठबंधन की पांचवीं बैठक थी.

‘आर-4 मैकेनिज्म’ की शुरुआत मार्च में रियाद में हुई बैठकों के बाद हुई थी. इसका मक़सद अमेरिका-ईरान युद्ध के प्रभावों को सीमित करना, कूटनीतिक प्रयासों में तालमेल बढ़ाना और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच समन्वय स्थापित करना है.

कहा जा रहा है कि तुर्की इस क्षेत्र में इसराइल पर दबाव बढ़ाने के लिए व्यापक क्षेत्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है. तुर्की का मानना है कि क्षेत्र में इसराइल की सैन्य गतिविधियां और उसका बढ़ता प्रभाव अस्थिरता पैदा कर रहा है.

गुरुवार को अंकारा में सीरिया के विदेश मंत्री असअद अल-शिबानी के साथ जॉइंट प्रेस कॉन्फ़्रेंस में हाकान फ़िदान ने कहा कि इसराइल उन प्रमुख पक्षों में शामिल है जो क्षेत्रीय स्थिरता को कमज़ोर कर रहे हैं” और विस्तारवादी महत्वाकांक्षाएं अपना रहे हैं.

यह बढ़ता क्षेत्रीय सहयोग ऐसे समय भी सामने आ रहा है, जब तुर्की खाड़ी देशों के साथ रक्षा निर्यात बढ़ाने और संयुक्त रक्षा उत्पादन का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है.

2023 में सऊदी अरब ने तुर्की की रक्षा कंपनी बायकार से ड्रोन ख़रीदने का बड़ा समझौता किया था. इसके बाद 2024 में दोनों देशों के बीच यूएवी उत्पादन, टेक्नॉलजी हस्तांतरण और सऊदी अरब में कर्मियों के प्रशिक्षण का समझौता हुआ. इन समझौतों को तुर्की का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा निर्यात पैकेज माना जाता है.

तुर्की के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025 के अंत तक तुर्की और सऊदी अरब के बीच द्विपक्षीय व्यापार 8.5 अरब डॉलर तक पहुँच गया था. दोनों देशों के बीच तेज़ी से बेहतर होते संबंधों में रक्षा सहयोग एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरा है.

अर्दोआन ने पिछली बार फ़रवरी में सऊदी अरब का दौरा किया था. उस दौरान उन्होंने रियाद में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाक़ात की थी और अगले दिन मिस्र की यात्रा पर रवाना हुए थे.

अगर तुर्की इस गठबंधन की सदस्यता पर हस्ताक्षर करता है, तो यह सुन्नी मुस्लिम दुनिया के नेतृत्व को लेकर पहले प्रतिद्वंद्वी रहे तुर्की और सऊदी अरब के बीच संबंधों में एक नए दौर को रेखांकित करेगा.

वर्षों की कड़वाहट को पीछे छोड़ने के बाद दोनों देश आर्थिक और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर काम कर रहे हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS