Home rss world hindi ‘शेख हसीना को हटाने के लिए अमेरिका ने खर्च किए अरबों रुपये’,...

‘शेख हसीना को हटाने के लिए अमेरिका ने खर्च किए अरबों रुपये’, बेटे का सनसनीखेज दावा

4
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिरने के पीछे अमेरिका का हाथ होने का उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय ने आरोप लगाया है। उन्होंने बाइडेन प्रशासन और USAID पर 50 मिलियन डॉलर की फंडिंग का दावा किया।

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार अगस्त 2024 में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद सत्ता से बाहर हो गई थी। अब उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय ने आरोप लगाया है कि उनकी मां की सरकार गिराने में अमेरिका की भूमिका थी। जॉय ने दावा किया कि तत्कालीन जो बाइडेन प्रशासन ने अमेरिकी एजेंसी USAID के जरिए कथित तौर पर 50 मिलियन डॉलर (4 अरब से भी ज्यादा रुपये) की फंडिंग दी थी। हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया और इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि भी नहीं हुई है।

बाइडेन प्रशासन और USAID पर क्या आरोप लगाए?

सजीब वाजेद जॉय ने वॉशिंगटन में सेंटर फॉर यूएस-बांग्लादेश रिलेशंस की ओर से आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन बाइडेन प्रशासन ने ऐसी गतिविधियों का समर्थन किया, जिन्होंने अगस्त 2024 में शेख हसीना को सत्ता से हटाने में योगदान दिया।

जॉय के मुताबिक, अमेरिकी एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) और लोकतंत्र को बढ़ावा देने से जुड़े कुछ संगठनों ने विरोध प्रदर्शनों में शामिल समूहों को जुटाने में मदद की। उन्होंने कहा, “बाइडेन प्रशासन इस सत्ता परिवर्तन में काफी हद तक शामिल था। USAID के जरिए इस शासन परिवर्तन के लिए 50 मिलियन डॉलर की फंडिंग दी गई।”

प्रदर्शनकारियों को संगठित करने और ट्रेनिंग देने का भी आरोप

जॉय ने नेशनल डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूट और इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट पर भी आरोप लगाए। उनका दावा था कि इन संगठनों ने ऐसे समूहों को संगठित करने और प्रशिक्षण देने में मदद की, जो बाद में विरोध प्रदर्शनों और अशांति में शामिल हुए। कार्यक्रम में शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग के समर्थक और पूर्व अधिकारी शामिल थे।

अमेरिकी दबाव में मुहम्मद यूनुस को सत्ता सौंपने का दावा

सजीब वाजेद जॉय ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के पूर्व प्रमुख मुहम्मद यूनुस को लेकर भी दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश के सैन्य नेतृत्व पर अमेरिकी कूटनीतिक दबाव के बाद यूनुस को अंतरिम प्रशासन की कमान सौंपी गई थी। जॉय के मुताबिक, ढाका में अमेरिकी राजदूत ने यूनुस को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाने की प्रक्रिया को प्रभावित किया था।

बांग्लादेश में चरमपंथी संगठनों की सक्रियता बढ़ने का आरोप

क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर जॉय ने शेख हसीना के बाद सत्ता में आई व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि नए प्रशासन के दौरान दोषी ठहराए गए कुछ उग्रवादियों को रिहा किया गया और चरमपंथी संगठनों को फिर से अपना प्रभाव बढ़ाने का मौका मिला।

उन्होंने विदेशी नागरिकों से जुड़े हमलों के मामलों में कथित तौर पर शामिल कैदियों की रिहाई का जिक्र किया। साथ ही, दावा किया कि पाकिस्तान से जुड़े उग्रवादी समूहों की बांग्लादेश में गतिविधियां बढ़ी हैं।

जॉय ने यह भी आरोप लगाया कि लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े लोग बांग्लादेश में सार्वजनिक सभाओं में दिखाई दिए। उनके मुताबिक, बांग्लादेश में बदलते राजनीतिक और सुरक्षा समीकरण भारत तथा पूरे क्षेत्र के लिए संभावित खतरा पैदा कर सकते हैं।

चीन से बढ़ते रिश्तों पर भी उठाए सवाल

जॉय ने आरोप लगाया कि शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद ढाका के चीन के साथ संबंध मजबूत हुए हैं और इससे चीनी कंपनियों को फायदा मिल रहा है। उन्होंने चीन की कंपनियों के साथ व्यावसायिक संबंधों में भ्रष्टाचार की भूमिका होने का भी दावा किया।

बोइंग के 29 विमानों की खरीद को लेकर क्या कहा?

अमेरिका के साथ बांग्लादेश के आर्थिक और व्यावसायिक संबंधों पर सवाल उठाते हुए जॉय ने दावा किया कि देश के पास अमेरिकी कंपनियों के साथ किए गए बड़े कारोबारी समझौतों की जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन नहीं हैं। उन्होंने अमेरिकी ऊर्जा कंपनी एक्सेलरेट एनर्जी और विमान निर्माता बोइंग से जुड़े समझौतों का उल्लेख किया।

जॉय ने कहा, “उन्होंने 29 बोइंग विमानों का अनुबंध किया है। बांग्लादेश सरकार के पास इनके भुगतान के लिए पैसे नहीं हैं।” उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं को मौजूदा समझौतों के तहत पूरा भुगतान नहीं मिल रहा है।

बांग्लादेश की राजनीतिक अस्थिरता पर पूर्व अधिकारी ने जताई चिंता

शेख हसीना की सरकार में वरिष्ठ अधिकारी रहे अहमद कैकाउस ने भी बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक अस्थिरता और संस्थानों के कमजोर होने से निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो रहा है और देश के आर्थिक विकास पर खतरा पैदा हो रहा है।

कैकाउस के मुताबिक, अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को बांग्लादेश में राजनीतिक विभाजन बढ़ाने के बजाय संवाद, उचित कानूनी प्रक्रिया और शांतिपूर्ण राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना चाहिए। गौरतलब है कि अगस्त 2024 में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना की सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। इसके बाद मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाया गया था। बाद में हुए चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सत्ता में आई और तारिक रहमान देश के पीएम बने।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN