Source :- LIVE HINDUSTAN
चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CPCL) के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्र सरकार ने कंपनी को नवरत्न (Navratna) CPSE का दर्जा देने की मंजूरी दे दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की स्वीकृति के बाद यह फैसला आधिकारिक रूप से लागू हुआ और इसके साथ ही CPCL भारत की 28वीं नवरत्न पब्लिक सेक्टर की कंपनी बन गई है। यह उपलब्धि केवल कंपनी के लिए ही नहीं, बल्कि देश के एनर्जी सेक्टर के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि नवरत्न का दर्जा मिलने के बाद किसी भी सरकारी कंपनी को अधिक वित्तीय और प्रशासनिक स्वतंत्रता मिलती है।
CPCL, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंदर काम करने वाली मिनीरत्न कैटेगिरी-1 कंपनी थी। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने करीब 59,400 करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार दर्ज किया, जिसने उसकी मजबूत वित्तीय स्थिति को साबित किया। लगातार बेहतर प्रदर्शन और सरकारी मानकों पर खरा उतरने के बाद उसे नवरत्न का दर्जा दिया गया है।
नवरत्न का दर्जा किसी भी सरकारी कंपनी के लिए बेहद प्रतिष्ठित माना जाता है। इसकी शुरुआत साल 1997 में हुई थी, ताकि बेहतर प्रदर्शन करने वाली सरकारी कंपनियों को अधिक स्वतंत्रता दी जा सके। इस दर्जे के बाद CPCL अब बिना सरकार की पूर्व मंजूरी के किसी एक प्रोजेक्ट में अपनी नेटवर्थ के 15% या अधिकतम 1,000 करोड़ रुपये तक का निवेश कर सकती है। इसके अलावा कंपनी ज्वाइंट वेंचर (Joint Venture) स्थापित कर सकती है, नई तकनीकों को अपनाने के लिए ग्लोबल पार्टनरशिप कर सकती है और जरूरत पड़ने पर अधिग्रहण (Acquisition) या विलय (Merger) जैसे बड़े फैसले भी अधिक आसानी से ले सकती है।
CPCL का इतिहास भी काफी दिलचस्प है। कंपनी की स्थापना साल 1965 में मद्रास रिफाइनरीज लिमिटेड** के रूप में हुई थी। यह भारत सरकार, AMOCO और नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी के संयुक्त प्रयास से शुरू की गई थी। बाद में सरकार की हिस्सेदारी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) को ट्रांसफर कर दी गई और वर्ष 2001 में CPCL, इंडियन ऑयल की सहायक कंपनी बन गई। वर्तमान में इंडियन ऑयल के पास कंपनी में लगभग 51.89% हिस्सेदारी है।
जब कंपनी की शुरुआत हुई थी, तब उसकी रिफाइनिंग क्षमता केवल 2.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष (MMTPA) थी। लेकिन आज CPCL दक्षिण भारत की सबसे बड़ी रिफाइनिंग कंपनियों में शामिल है और उसकी कुल स्थापित क्षमता 10.5 MMTPA तक पहुंच चुकी है। चेन्नई के मनाली स्थित इसका रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स भारत की सबसे जटिल और उन्नत रिफाइनरियों में गिना जाता है। यहां पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, केरोसिन, एविएशन टर्बाइन फ्यूल, लुब्रिकेंट्स और पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक जैसे कई उत्पाद बनाए जाते हैं।
कंपनी की एक और खास उपलब्धि यह है कि उसने उद्योग जगत का पहला **समुद्री जल विलवणीकरण (Desalination) प्लांट भी स्थापित किया, जो रिफाइनरी की पानी की जरूरतों को पूरा करता है। इसके अलावा CPCL रक्षा क्षेत्र के लिए विशेष ईंधन, जैसे लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल होने वाला JP-5 फ्यूल और मिसाइल फ्यूल भी बनाती है।
एक्सपर्ट का मानना है कि नवरत्न का दर्जा मिलने के बाद CPCL को विस्तार योजनाओं को तेजी से लागू करने में मदद मिलेगी। इससे कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी, निवेश के नए अवसर खुलेंगे और भारत के ऊर्जा क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी। आने वाले वर्षों में CPCL न केवल घरेलू बाजार में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी मौजूदगी और प्रभाव बढ़ाने की दिशा में बड़े कदम उठा सकती है।
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