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सुप्रीम कोर्ट के ‘बैलेट’ फैसले से ट्रंप नाराज, अपने ही जजों पर भड़के; खूब सुनाया

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Source :- LIVE HINDUSTAN

नवंबर के मध्यावधि चुनाव से ठीक पहले डाक से वोटिंग पर नए नियम लगाने की ट्रंप प्रशासन की कोशिश सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोर्ट पर तीखा हमला बोला है।

अमेरिका में नवंबर में मध्यावधि चुनाव होना है। चुनाव से पहले डाक से मतदान पर नए प्रतिबंध लगाने की ट्रंप की कोशिश को सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दिया है। इस रोक के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोर्ट और अपने ही नियुक्त कुछ जजों पर तीखा हमला बोल है उन्होंने इस फैसले को रिपब्लिकनों के लिए बड़ा झटका बताया और कहा कि कोर्ट कट्टरपंथी वामपंथियों के दबाव में अमेरिका को पीछे धकेल रहा है।

ट्रंप ने मंगलवार को ट्रुथ सोशल पर लंबा पोस्ट लिखा। उन्होंने कहा कि यह फैसला रिपब्लिकनों के लिए बड़ा झटका है। उनके मुताबिक कोर्ट ने चुनाव की ईमानदारी बचाने में नाकामी दिखाई है। उन्होंने लिखा कि कट्टरपंथी वामपंथी इस सुप्रीम कोर्ट को धमका रहे हैं और बहका रहे हैं। इससे ऐसे फैसले हो रहे हैं जिन्होंने अमेरिका को कम से कम सौ साल पीछे धकेल दिया है।

ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में नियुक्त कुछ जजों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ये वे लोग नहीं हैं जिनसे मैंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में काम करने के लिए बात की थी। ये तो अपनी असली शक्ल की खोखली परछाईं भर हैं। इस कोर्ट को देश के इतिहास में कुछ सबसे नुकसानदेह और पीड़ादायक फैसले देने वाले कोर्ट के रूप में याद किया जाएगा।

कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने आपातकालीन आदेश में ट्रंप प्रशासन के नए डाक मतदान नियमों को लागू करने का प्रस्ताव खारिज कर दिया। कोर्ट ने विस्तृत वजह नहीं बताई, लेकिन संकेत दिया कि इस साल ये प्रतिबंध लागू करने की कोशिश अदालत में सफल नहीं होगी। न्यायमूर्ति सैमुअल एलिटो और क्लेरेंस थॉमस ने असहमति जताई। एलिटो ने कहा कि अमेरिकी डाक सेवा के पास डाक को नियंत्रित करने का व्यापक अधिकार है और वह ये नियम लागू कर सकती है। न्यायमूर्ति ब्रेट कावानाघ ने माना कि ये नियम 2026 के मध्यावधि चुनाव में लागू नहीं होने चाहिए, लेकिन बाद में मामला दोबारा आए तो वे अपना रुख बदल सकते हैं।

प्रशासन का तर्क था कि डाक सेवा पर संघीय नियंत्रण है, इसलिए वह चुनावी डाक के नियम तय कर सकती है। नए नियमों में राज्यों को एक जैसा लिफाफा इस्तेमाल करना पड़ता और योग्य मतदाताओं की सूची ऑनलाइन पोर्टल पर जमा करनी पड़ती। जो राज्य ये शर्तें नहीं मानते, उन तक डाक सेवा मतपत्र नहीं भेजती। चुनाव अधिकारियों का कहना था कि चुनाव से कुछ हफ्ते पहले पूरी व्यवस्था बदलना व्यावहारिक नहीं था। अलबामा, उत्तरी कैरोलिना और विस्कॉन्सिन पहले ही मतदाताओं को डाक मतपत्र भेज चुके थे। इन प्रतिबंधों से उन राज्यों में बड़ी दिक्कत होती जहां डाक से मतदान आम है। हाल के चुनावों में करीब एक तिहाई वोट डाक से पड़े हैं।

ट्रंप की आलोचना सिर्फ इसी फैसले तक सीमित नहीं

ट्रंप ने अपने लंबे बयान में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों पर भी हमला किया। उन्होंने टैरिफ कार्यक्रम और जन्म से नागरिकता रोकने वाले प्रयासों से जुड़े फैसलों की आलोचना की। उन्होंने लिखा कि टैरिफ वाले फैसले से अमेरिका को आने वाले सालों में खरबों डॉलर का नुकसान होगा। जन्म से नागरिकता वाले फैसले को उन्होंने अमेरिका के लिए पूरी आपदा बताया और कहा कि इससे नागरिकता को लेकर बड़ा भ्रष्टाचार बढ़ा है। ट्रंप ने कहा कि कुछ जज इन उन्मादी और भ्रष्ट डेमोक्रेटों से डरते हैं। वे अमेरिका को बचाने के लिए जरूरी साहस नहीं दिखा पा रहे।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN