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सोने की कीमतों में लगातार दूसरे हफ्ते गिरावट, क्या अभी और गिरेंगे दाम?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • ग्लोबल मार्केट में गोल्ड की कीमतों में लगातार दूसरे हफ्ते भी गिरावट जारी है
  • 28 सितंबर को स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) करीब 2.55% गिरकर 4,176 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गया
  • आइए जानते हैं कि आगे सोने की कीमतों में गिरावट आएगी या नहीं?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार दूसरे हफ्ते भी जारी है। 28 सितंबर को स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) करीब 2.55% गिरकर 4,176 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गया। 22 सितंबर को 4,370 डॉलर के वीकली हाई से तुलना करें तो सोना करीब 4.44% नीचे है। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी दबाव में रहे और दिसंबर डिलीवरी वाले कॉन्ट्रैक्ट में करीब 2.48% की गिरावट दर्ज की गई, यानी कुछ ही दिनों में कीमती धातु में अच्छी-खासी कमजोरी देखने को मिली है।

भारत में भी गोल्ड फ्यूचर (Gold Futures) पर इसका असर नजर आया। MCX पर 4 दिसंबर डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर (Gold Futures) सोमवार को 2.22% गिरकर ₹1,49,875 प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता दिखा। सोने की कीमतों पर एक साथ कई वैश्विक फैक्टर्स दबाव बना रहे हैं। खासतौर पर मजबूत अमेरिकी डॉलर, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों के लिए बिना ब्याज देने वाली संपत्ति यानी गोल्ड (Gold) को अपेक्षाकृत कम आकर्षक बनाया है।

ब्रेंट क्रूड का भाव $107 प्रति बैरल के ऊपर

सोने की हालिया कमजोरी में क्रूड ऑयल (Crude Oil) की बढ़ती कीमत भी अहम भूमिका निभा रही है। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) का भाव $107 प्रति बैरल के ऊपर चला गया है। आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव के समय महंगा तेल सोने के लिए सेफ हैवन डिमांड बढ़ा सकता है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग है। हाई एनर्जी प्राइस (Energy Prices) से महंगाई (Inflation) को लेकर चिंता बढ़ी है, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की आशंका मजबूत हुई है। इससे डॉलर मजबूत हुआ और ट्रेजरी यील्ड्स (Treasury Yields) भी ऊंची रहीं।

बाजार में फिलहाल अक्टूबर की फेड मीटिंग (Fed Meeting) पर खास नजर है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, बाजार करीब 68% संभावना को अक्टूबर में फेड रेट हाइक (Fed Rate Hike) के रूप में देख रहा था। अगर अमेरिकी केंद्रीय बैंक महंगाई पर कंट्रोल के लिए ब्याज दरों को ऊंचा रखता है या आगे सख्त रुख का संकेत देता है, तो गोल्ड पर दबाव बढ़ सकता है। इसकी वजह यह है कि ब्याज देने वाली संपत्तियों की यील्ड (Yield) बढ़ने पर निवेशकों के लिए गोल्ड (Gold) रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट (Opportunity Cost) बढ़ जाती है।

PL कैपिटल के हेड-कमोडिटीज आशीष राजोड़िया के अनुसार, MCX गोल्ड दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट लगातार दूसरे सप्ताह कमजोर हुआ है। उनके मुताबिक, मौजूदा दौर में ऊंचा क्रूड गोल्ड के सेफ-हैवन सपोर्ट के बजाय फेड टाइटनिंग, मजबूत डॉलर और बढ़ती यील्ड की कहानी को मजबूत कर रहा है। टेक्निकल लेवल पर उन्होंने MCX गोल्ड के लिए ₹1,48,000 और ₹1,46,000 को सपोर्ट जोन बताया है, जबकि ₹1,52,500 और ₹1,55,000 रेजिस्टेंस लेवल्स हो सकते हैं।

आगे गोल्ड की दिशा मुख्य रूप से दो बड़े घटनाक्रमों पर निर्भर कर सकती है। पहला अक्टूबर में फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला करता है और दूसरा, हॉर्मुज (Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच हालिया कूटनीतिक बातचीत वास्तव में तनाव कम करने की दिशा में आगे बढ़ती है या नहीं। फेड (Fed) का रुख अपेक्षा से नरम रहता है या ईरान बातचीत में ठोस प्रगति होती है, तो गोल्ड (Gold) में तेजी लौट सकती है। इसके उलट सख्त मौद्रिक संकेत और बातचीत में गतिरोध कीमतों पर दबाव को और बढ़ा सकते हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN