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स्वामी चिन्मयानंद के निधन के 33 साल बाद मोदी की होलोग्राफिक वार्ता को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल

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Source :- BBC INDIA

मोदी

पढ़ने का समय: 8 मिनट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया था.

इस दौरान उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद के एआई होलोग्राम से बातचीत की थी. इसमें पीएम मोदी ने 1993 में आध्यात्मिक गुरु से हुई ‘अपनी मुलाक़ात’ को याद किया.

एआई होलोग्राफ से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भविष्य के कार्यों के लिए आध्यात्मिक गुरु का आशीर्वाद मांगा.

प्रधानमंत्री ने कहा, “यह मेरा सौभाग्य था कि मैं आपसे मिला था और आज मैं चाहता हूँ कि आप मुझे उन कार्यों के लिए आशीर्वाद दें, जिन्हें मैं करना चाहता हूं.”

मोदी की बात के जवाब में स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम ने उन्हें प्रधानमंत्री बनते देखकर ख़ुशी जताई और अपना समर्थन व्यक्त करते हुए कहा, “नरेंद्र, भारत आपके साथ है.”

स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम से पीएम मोदी की बातचीत की आलोचना भी हो रही है.

द वायर के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन ने एक्स पर एक पोस्ट में आलोचना करते हुए लिखा है, ”जब मुख्यधारा का मीडिया नरेंद्र मोदी और एक दिवंगत व्यक्ति के एआई-आधारित होलोग्राम के बीच हुई इस अजीब और फ़र्ज़ी बातचीत को यह कहकर रिपोर्ट करता है कि “मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद से बातचीत की”, तो वह जानबूझकर आंख मूंदकर विश्वास करने का ऐसा उदाहरण पेश करता है, जिसके सामने नोटबंदी के दौर में गोदी मीडिया की वह काल्पनिक कहानी भी फीकी पड़ जाती है, जिसमें दावा किया गया था कि करेंसी नोटों में माइक्रोचिप लगी है.”

स्वामी चिन्मयानंद का निधन तीन अगस्त 1993 को अमेरिका के सैन डिएगो में हुआ था. ऐसे में सिद्धार्थ का सवाल है कि मीडिया में एआई आधारित होलोग्राम के ज़रिए एक नक़ली बातचीत क्यों दिखाई जा रही है.

हालांकि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इसे आस्था और आधुनिक तकनीक का असाधारण संगम बताया.

स्वामी चिन्मयानंद

कांग्रेस सेवा दल के चीफ़ ऑर्गेनाइज़र श्रीनिवास बीवी ने एक्स पर लिखा है, ”दुनिया एआई का इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और विज्ञान में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए कर रही है. वहीं, मोदी जी 1993 में दिवंगत हो चुके एक बाबा जी से अपनी तारीफ़ करवाने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं.”

श्रीनिवास बीवी ने स्वामी चिन्मयानंद का एक पुराना वीडियो क्लिप पोस्ट किया है, जिसे इस रूप में पेश किया जा रहा है कि यह मोदी और उनकी पार्टी की विचारधारा से मेल नहीं खाता है.

इस वीडियो क्लिप में स्वामी चिन्मयानंद कह रहे हैं, ”अच्छे लोगों को धर्म की ज़रूरत नहीं होती. मैं इस पेशे से थक चुका हूं. क्यों? क्योंकि मेरे पास कोई स्वस्थ व्यक्ति आता ही नहीं है. इसी तरह, किसी योग्य स्वामी के आसपास बुरे लोग ही होंगे, क्योंकि उन्हें ख़ुद में सुधार लाने की ज़रूरत है. यह उन लोगों के लिए है, जो ख़तरनाक हैं.”

दरअसल यह वीडियो भगवद्गीता के अध्याय 3, श्लोक 30 पर 25 मिनट का एक प्रवचन का हिस्सा है. इसे चिन्मय मिशन के एक चैनल ने 27 मई 2020 को अपलोड किया था.

इसमें उद्धृत अंश लगभग 15:29 से 16:40 मिनट के बीच है. प्रवचन स्वयं स्वामी चिन्मयानंद के जीवनकाल में रिकॉर्ड किया गया था. उनका निधन 1993 में हुआ था, हालांकि रिकॉर्डिंग की सटीक तारीख़ ज्ञात नहीं है.

स्वामी चिन्मयानंद इस वीडियो में कहते हैं, ”अगर बुरा व्यक्ति अच्छा नहीं बन सकता, तो फिर अच्छे व्यक्ति के और अच्छा बनने का क्या मतलब है? अच्छा बनने का अवसर तो उन लोगों को मिलना चाहिए, जो बुरे हैं, है न?”

”आप धर्म को नहीं समझते. धर्म में तो सारे बदमाश भरे पड़े हैं. धर्म की ज़रूरत केवल बदमाशों को होती है. अच्छे लोगों को किसी धर्म की ज़रूरत नहीं होती. लोग पूछते हैं, “स्वामी जी, ऐसा क्यों है कि आपके आसपास रहने वाले सभी लोग दुष्ट और बुरी इच्छाओं वाले हैं?”

”मैं कहता हूँ, मेरे प्रिय मित्र, किसी प्रसिद्ध डॉक्टर के आसपास हमेशा किस तरह के लोग होंगे? क्या आपने कभी किसी डॉक्टर को यह शिकायत करते सुना है कि मैं इस पेशे से थक गया हूं और अब इसे छोड़ देना चाहता हूं? क्यों? क्योंकि मेरे पास कोई स्वस्थ व्यक्ति आता ही नहीं है. आख़िर किसी स्वस्थ व्यक्ति को डॉक्टर के पास जाने की क्या ज़रूरत है? इसी तरह, किसी योग्य स्वामी के आसपास बुरे लोग ही होंगे, क्योंकि उन्हें ख़ुद में सुधार लाने की ज़रूरत है.”

स्वामी चिन्मयानंद

होलोग्राम कैसे काम करता है?

यह सिमुलेशन उस व्यक्ति की रिकॉर्डिंग, तस्वीरों, संदेशों और पीछे छोड़ी गई अन्य सामग्री पर आधारित होता है. इसका उस व्यक्ति की चेतना से कोई संबंध नहीं होता.

यह बातचीत कैसे काम करती है?

सॉफ्टवेयर उस व्यक्ति के संदेशों, ईमेल और रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल करके उसकी बोलने की शैली की नक़ल करता है. एआई नया जवाब तैयार करता है, वॉइस क्लोनिंग तकनीक उसे उस व्यक्ति की आवाज़ जैसा बनाती है और डिजिटल अवतार उसके चेहरे-मोहरे को प्रदर्शित करता है. ये शब्द सॉफ्टवेयर तैयार करता है.

होलोग्राम की भूमिका क्या होती है?

होलोग्राम जैसी छवि इस तकनीक का विजुअल फॉर्मेट है. इससे डिजिटल रूप में दोबारा बनाए गए व्यक्ति की मौजूदगी का आभास होता है, लेकिन जवाब तैयार करने का काम होलोग्राम नहीं करता. बातचीत का हिस्सा पहले से रिकॉर्ड की गई सामग्री या एआई पर आधारित होता है, जबकि विजुअल हिस्सा उस व्यक्ति की छवि दिखाता है. कुछ सेवाएं इन दोनों को जोड़कर इंटरैक्टिव वीडियो या ऑगमेंटेड रियलिटी का अनुभव भी उपलब्ध कराती हैं.

मिसाल के तौर पर, अगर आप किसी से पूछें, “आप मुझे क्या करने की सलाह देंगे? तो उस व्यक्ति का एआई अवतार उसकी परिचित आवाज़ में एक विश्वसनीय जवाब दे सकता है. लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि वह व्यक्ति वास्तव में क्या सोचता या क्या सलाह देता. एआई नई बातें, यादें या विचार भी गढ़ सकता है. यही किसी व्यक्ति के वास्तविक शब्दों को सुरक्षित रखने और उसकी पहचान का इस्तेमाल करके नए शब्द तैयार करने के बीच सबसे अहम फ़र्क़ है.

स्वामी चिन्मयानंद

पीएम मोदी की मुलाक़ात चिन्मयानंद से कब हुई थी?

इस पूरे मामले से जुड़ी जानकारी मोदी के अपने बाद के बयानों पर आधारित है. इनमें 2015 में सिक्के जारी करने के एक कार्यक्रम में दिया गया उनका भाषण और 23 अक्तूबर 2026 का भाषण शामिल है. मोदी के मुताबिक़, उनकी मुलाक़ात स्वामी से फ़रवरी-मार्च 1993 के आसपास वडोदरा में हुई थी.

वह स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण की शताब्दी के कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण देने गए थे. मोदी का कहना है कि दोनों ने एक मज़बूत भारत के निर्माण के लिए युवाओं की शक्ति यानी ‘युवा शक्ति’ के इस्तेमाल पर चर्चा की थी.

उस समय मोदी गुजरात बीजेपी के संगठन सचिव थे. यह मुलाक़ात बाबरी मस्जिद विध्वंस के कुछ महीने बाद हुई थी. उस समय विश्व हिंदू परिषद पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि स्वामी चिन्मयानंद वीएचपी के सह-संस्थापकों में से एक थे.

स्वामी को शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद के लिए हिंदू प्रतिनिधि के तौर पर अध्यक्ष चुना गया था. यह कार्यक्रम 28 अगस्त से चार या पाँच सितंबर तक आयोजित हुआ था.

इसके अलावा, उन्हें वॉशिंगटन में 6 से 8 अगस्त तक होने वाले वीएचपी के ‘ग्लोबल विजन 2000’ कार्यक्रम में एक पुरस्कार भी दिया जाना था.

स्वामी को 26 जुलाई को सैन डिएगो में दिल का दौरा पड़ा था और 29 जुलाई को उनकी बाईपास सर्जरी हुई थी. तीन अगस्त 1993 को सैन डिएगो में उनका निधन हो गया. 19 अगस्त को हिमाचल प्रदेश के सिद्धबाड़ी में उन्हें समाधि दी गई.

शिकागो में मोदी के मेज़बान का कहना है कि मोदी और मुरली मनोहर जोशी सितंबर 1993 में बीजेपी का प्रतिनिधित्व करने के लिए वहां आए थे. वहीं, कुछ अन्य लोगों को अगस्त में वॉशिंगटन में आयोजित कार्यक्रम में मोदी की मौजूदगी याद है.

लेकिन 2015 में मोदी ने कहा था कि स्वामी का निधन कार्यक्रम से तीन दिन पहले हुआ था. यह बात वॉशिंगटन में छह अगस्त को शुरू हुए कार्यक्रम से मेल खाती है.

लेकिन 23 अक्तूबर 2026 को मोदी ने शिकागो में 1993 में हुई विश्व धर्म संसद का ज़िक्र करते हुए कहा कि स्वामी का निधन उससे कुछ सप्ताह पहले हुआ था.

मोदी ने कहा कि विश्व धर्म संसद 11 सितंबर को आयोजित हुई थी. हालांकि, यह कार्यक्रम 5 सितंबर तक समाप्त हो चुका था. 11 सितंबर स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक शिकागो भाषण की वर्षगांठ थी.

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों की मुलाकात शिकागो में हुई थी. हालांकि, आधिकारिक भाषण प्रतिलेखों में मुलाकात का स्थान वडोदरा बताया गया है.

2026 के कार्यक्रम में एआई होलोग्राम के ज़रिए सुनाए गए संवादों में यह कथन भी शामिल था, “मैंने आपसे तब कहा था कि मैं बूढ़ा हो रहा हूँ.”

ये शब्द एआई होलोग्राम के ज़रिए प्रस्तुत किए गए थे. इन्हें स्वामी चिन्मयानंद के वास्तविक शब्द नहीं माना जा सकता.

स्वामी चिन्मयानंद

स्वामी चिन्मयानंद कौन थे?

स्वामी चिन्मयानंद का जन्म 8 मई 1916 को हुआ था. 25 फ़रवरी 1949 को स्वामी शिवानंद ने उन्हें दीक्षा दी. दिसंबर 1951 में उन्होंने पुणे में पहली बार सार्वजनिक रूप से आध्यात्मिक प्रवचन दिए. इसके बाद 8 अगस्त 1953 को चिन्मय मिशन की औपचारिक स्थापना हुई.

चिन्मयानंद मिशन के अनुसार, ”उनका जन्म 8 मई 1916 को केरल के एर्नाकुलम में बालकृष्ण मेनन के रूप में हुआ था. वह मेधावी, ऊर्जावान और युवावस्था के जोश से भरपूर थे. अंग्रेज़ी साहित्य में डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने लेखन के क्षेत्र में अपना करियर शुरू किया. हालांकि, जल्द ही एक पत्रकार के रूप में वह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए.”

चिन्मयानंद मिशन के अनुसार, ”जेल की सज़ा और गंभीर बीमारी का सामना करने के बाद 1942 में उनके जीवन को देखने का नज़रिया बदल गया. पत्रकारिता में लौटने के बाद उन्हें लगा कि भारत में राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक सुधारों के लिए काम करना चाहिए. उनकी आंतरिक खोज उन्हें तीर्थस्थल ऋषिकेश ले गई. यहां युवा और संशयवादी मेनन की मुलाकात स्वामी शिवानंद से हुई और उनके भीतर एक बड़ा बदलाव शुरू हुआ.”

पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा था कि स्वामी चिन्मयानंद अंतरधार्मिक संवाद के प्रबल समर्थक थे.

मई 2015 में भारत के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने स्वामी चिन्मयानंद की जन्म शताब्दी पर कहा था, ”जब मैं चिन्मयानंद के बारे में सोचता हूँ, तो सबसे पहले मन में हृदय की पवित्रता का विचार आता है. स्वामी विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों के बीच संवाद में विश्वास करते थे. ऐसे संवाद समाज को आध्यात्मिक मान्यताओं की विविधता और उनकी कार्यप्रणाली को समझने में मदद करते हैं.

उन्होंने कहा था, “मन को शुद्ध करना, समाज में सद्भाव लाना, ग़रीबों को राहत पहुंचाना और नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहना, वे मूल्य थे जिनका उन्होंने प्रचार किया.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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