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स्विट्जरलैंड पहुंचे जेडी वेंस, ईरान के परमाणु ठिकानों तक जाने के बदले क्या देगा अमेरिका?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उनकी टीम भी स्विट्जरलैंड पहुंच गई है। पहले चरण की इस वार्ता में अमेरिका ईरान के परमाणु ठिकानों तक जाने की मांग कर सकता है। इसके बदले 6 अरब डॉलर का फंड रिलीज किया जा सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच डील पक्की होने के बाद पहली बार दोनों देशों के बीच आमने-सामने बातचीत होने जा रही है। ईरान के टीम स्विट्जरलैंड पहुंच चुकी है तो वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उनके साथी भी स्विट्जरलैंड पहुंच गए हैं। इधर पाकिस्तान से पीएम शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर स्विट्जरलैंड के लिए निकल गए हैं। बीते दिनों लेबनान में इजरायली स्ट्राइक की वजह से शांति वार्ता टाल दी गई थी। जानकारों का कहना है कि अमेरिका चाहता है कि पहले चरण की वार्ता में ईरान में परमाणु स्थलों के निरीक्षण को लेकर बात फाइनल हो। अमेरिका चाहता है कि ईरान अमेरिकी प्रतिनिधियों को उन जगहों पर जाने का रास्ता दे जहां पर अमेरिका ने बमबारी की थी। इसके बदले में अमेरिका उसका 6 अरब डॉलर का फंड रिलीज करेगा।

6 अरब डॉलर का फंड रिलीज कर सकता है अमेरिका

अमेरिका और ईरान के बीच हुई डील में बातचीत के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है। ईरान और अमेरिका की शांति वार्ता के ऊपर इजरायल का खतरा मंडरा रहा है। इजरायल पहले ही कह चुका है कि वह इस डील को नहीं मानता है और अपनी सुरक्षा के लिए स्वतंत्र रूप से कार्रवाई कर सकता है। स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में डील के तकनीकी पहलुओं पर चर्चा होनी है। इस वार्ता का उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच लगभग चार महीने से जारी युद्ध को रोकने के लिए हुए प्रारंभिक समझौते के प्रमुख ब्योरे तय करना है।

ईरान की टीम में कौन-कौन?

अधिकारियों ने बताया कि हालांकि, अमेरिका और कतर के वार्ताकारों ने ईरान के सहयोग से इजराइल और हिजबुल्ला के बीच एक ऐसा समझौता कराने में सफलता हासिल की जिससे जारी सैन्य झड़पों और तनाव को कम किया जा सके। इसके बाद ईरान के सरकारी मीडिया ने शनिवार को घोषणा की कि उसके शीर्ष अधिकारी स्विट्जरलैंड जाएंगे। ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अलावा केंद्रीय बैंक एवं तेल क्षेत्र के अधिकारी भी शामिल हैं।

आपको बता दें कि एक दिन पहले भी ईरान ने होर्मुज को बंद करने का ऐलान कर दिया था। ईरान के संयुक्त सैन्य कमान ने कहा था कि लेबनान में इज़राइल के हमले जारी रहने और अमेरिका की ”बदनीयती” व युद्ध खत्म करने संबंधी वादों के स्पष्ट उल्लंघन की वजह से उठाया गया है। सरकारी टेलीविज़न पर दिए गए बयान में यह चेतावनी भी दी गई कि ”अगर आक्रामकता जारी रहती है, तो आगे के कदम उठाने की योजना बना ली गई है।’ हालांकि इस घटनाक्रम से वार्ता पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN