Source :- BBC INDIA
इमेज स्रोत, Anand Dutt
“सरकार को पेपर ही लीक करवाना है तो इसका भी नोटिफ़िकेशन जारी कर दे.”
“सरकार ऐसे ही धांधली करवाती रही तो ग़रीब के बच्चों का पढ़कर क्या होगा?”
झारखंड की राजधानी रांची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम हर उम्र के लोगों से आजकल भरा रहता है.
कॉलेज यूनिफ़ॉर्म पहने युवा, स्कूल जाने वाले बच्चे, कुछ बुजुर्ग और प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों का हौसला बढ़ाने के लिए कई दंपती अपने युवा होते बच्चों और उनके सपनों की फ़िक्र में यहां रोजाना आते हैं.
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम यानी वो जगह, जहाँ जेपीएससी (झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन) सहित अन्य भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर बीती 25 जुलाई से आंदोलन चल रहा है.
इस आंदोलन में आठ व्यक्ति अनशन पर हैं. इसमें से शुक्रवार सुबह राहुल क्रांति नाम के एक अनशनकारी की तबीयत ख़राब हो गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है.
एक आंदोलन, दो मंच
इमेज स्रोत, Anand Dutt
बारिश से नहाए जयपाल सिंह स्टेडियम में घुसते ही आपको आंदोलन के दो ठिकाने मिलते है.
स्टेडियम के गेट पर ही देवेंद्रनाथ महतो का कैंप है, जिसमें देवेंद्र के ठीक बगल में महेन्द्र प्रसाद मंडल लेटे हैं. इन दोनों के सीने पर भारत के संविधान और नायकों से जुड़ी किताबें रखी हैं.
बीती दो अगस्त से आमरण अनशन पर बैठे देवेंद्रनाथ महतो कैंप या मंच में कुल चार अनशनकारी हैं. देवेंद्रनाथ महतो, महेन्द्र प्रसाद मंडल, प्रेम नायक और कुश महतो.
देवेंद्रनाथ महतो जहाँ दो अगस्त से आमरण अनशन पर हैं, वहीं बाकी सभी अलग-अलग तारीखों पर अनशन पर बैठे हैं.
देवेंद्रनाथ महतो के सहयोगी हर आने जाने वाले ख़ासतौर पर मीडिया वालों का नाम एक बड़े से रजिस्टर में लिखवा रहे हैं.
देवेंद्र के होठों पर सूखी पपड़ी की मोटी परत जम चुकी है और बाएं हाथ पर सलाइन वाली पट्टी लगी है.
देवेंद्र कहते हैं, “हेमंत को जेपीएससी की परीक्षा रद्द करनी ही होगी.”
लेकिन जब उनसे पूछा गया कि आपके ऊपर छात्रों की मांग में राजनीति करने का आरोप भी लग रहा है, तो वो बोले, “मीडिया वालों को मुद्दे की बात करनी चाहिए. उसे भटकाना नहीं चाहिए.”
जो सरकार आई उसने छात्रों को ठगा

देवेंद्रनाथ के ठीक बगल में लेटे महेन्द्र प्रसाद मंडल दो बेटियों के पिता हैं. उनके घरवाले उनसे नाराज़ हैं क्योंकि उनकी शिक्षा के हिसाब से वो एक सफल अधिकारी बन सकते थे.
महेन्द्र बीबीसी से कहते हैं, “मेरे घरवाले नाराज़ हैं लेकिन मैं उनकी नाराज़गी के चलते यह नहीं भूल सकता कि बीते 26 साल में झारखंड में जो सरकार आई, उसने छात्रों को ठगा ही. हालत यह है कि छात्र जैसे ही एग्ज़ाम देकर निकलते हैं, पता चलता है कि पेपर लीक हो गया और आंदोलन करो तो लाठी मिलती है.”
देवेंद्र और महेन्द्र से कुछ दूरी पर ही प्रेम नायक और कुश महतो लेटे हैं. ये दोनों भी अनशन पर हैं.
प्रेम नायक बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहते हैं, “झारखंड में मैट्रिक तक का पेपर लीक हो जाता है. छात्र क्या करेंगे. हम लोग आवाज़ नहीं उठाएगें तो कौन उठाएगा?”
देवेंद्रनाथ महतो के इस मंच पर पॉलिटिकल लोग भी आ रहे हैं. गुरुवार को यहाँ झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेकेएलएम) के जयराम कुमार महतो पहुंचे थे.
इससे पहले बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी भी देवेंद्रनाथ महतो से मिलने पहुंचे थे. देवेंद्रनाथ महतो ख़ुद भी जेकेएलएम से जुड़े हुए हैं.
‘राजनीति नहीं, सिर्फ छात्रों की बात’

देवेंद्रनाथ महतो के कैंप में ज़्यादातर छात्र राजनीति से जुड़े लोग मिलते हैं. लेकिन इस स्टेडियम में दूसरा मंच है, जिसमें चार युवा छात्र अनशन कर रहे हैं.
ये वो छात्र है, जिन्होंने 14वीं जेपीएससी की परीक्षा दी है. इन अनशनकारी समूह में हबीबा, सविता कुमारी, रूपेश कुमार पाल और राहुल क्रांति शामिल हैं
राहुल क्रांति की शुक्रवार सुबह तबीयत ख़राब होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
मंच पर ये अनशन कर रहे विद्यार्थी लेटे हैं और अब मीडिया बाइट्स पर लगभग पाबंदी लग गई है. आयोजन का ज़िम्मा संभाले लोग, मीडिया वालों से अनशनकारी छात्रों की बिगड़ती सेहत का हवाला दे रहे हैं.
मंच से लगातार राजनीतिक बातें करने से छात्रों को मना किया जा रहा है. उनसे यह अपील की जा रही है कि वो सिर्फ़ छात्रहित की बात ही उठाएं और किसी मीडिया वाले के साथ दुर्व्यवहार न करें.
अनशन कर रही सविता कुमारी ग़ुस्से में मुझसे कहती हैं, “अगर सरकार को पेपर ही लीक करवाना है तो नोटिफ़िकेशन जारी करते वक़्त क्यों नहीं लिख देते?”
“हम लोग पढ़ेंगे ही नहीं. दूसरा काम करेंगे क्योंकि मेरे पापा बहुत मेहनत से हमको पैसे कमाकर देते हैं. और मैं जब जेपीएससी एग्जाम पास नहीं कर पाती हूँ तो मेरे गांव वाले सोचते हैं कि मैं पढ़ाई नहीं करती हूँ बल्कि मस्ती करती हूँ.”
हमें सीएम से सहानुभूति नहीं, अधिकार चाहिए

उम्मे हबीबा और उनके तीन भाई बहन भी प्रोटेस्ट में शामिल हैं. उनमें हबीबा अनशन पर हैं.
बोकारो के कसमात गांव की उम्मे हबीबा सामान्य किसान परिवार से आती हैं.
वो कहती हैं, “संविधान हमें शांतिपूर्ण धरना देने का अधिकार देता है तो हम अपना आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से कर रहे हैं. सत्ता में बैठे लोगों के बच्चे तो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं लेकिन हम एक छोटी सी नौकरी और उसमें समान अवसर के लिए तरस जाते हैं. हमें अपनी सीएम से सहानुभूति नहीं चाहिए, बल्कि अपना अधिकार चाहिए.”
छात्रों के इस मंच में शामिल हो रहे प्रोटेस्टर राजीव कुमार भी कहते हैं, “हमने अपने सीएम को चुना है. हमें उनका इस्तीफ़ा नहीं चाहिए लेकिन वोट लेकर युवाओं को भूल जाना कहां तक सही है?”
जेपीएससी प्रोटेस्ट
इमेज स्रोत, Mohammad Sartaj Alam
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम जहां यह आंदोलन चल रहा है, उसके किरदार यानी जयपाल सिंह मुंडा हॉकी के खिलाड़ी थे. झारखंड में उन्हें मारंग गोमके (महान नेता) कहा जाता है. उन्होंने शिक्षा, राजनीति, खेल और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी.
जेपीएससी और जेएसएससी (झारखंड स्टॉफ़ सेलेक्शन कमीशन) की परीक्षाओं में गड़बड़ी से नाराज़ छात्र बीती 25 जुलाई से आंदोलन पर हैं.
छात्रों की मांग है कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द की जाए, भर्ती परीक्षा में हुई अनियमितता की जांच सीबीआई से कराई जाए. वित्तीय अनियमितता के मामले में इडी जांच और दोषियों पर सख़्त कार्रवाई की भी मांग ये उठा रहे हैं.
छात्रों की ये भी मांग है कि 14 वीं जेपीएससी को आयोजित करने वाली कंपनी टीडीपीएल ( टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड) की ओर से पूर्व में आयोजित हुईं सभी परीक्षाओं को रद्द किया जाए.
जयपाल सिंग मुंडा स्टेडियम में अहले सुबह अनशन करने वाले छात्रों के साथ बहुत कम छात्र दिखाई देते हैं. लेकिन दिन बढ़ने के साथ यहां छात्रों और उनके समर्थन में आने वालों की संख्या बढ़ने लगती है.
यहां आने वालों में प्रदर्शनकारियों से ज़्यादा उनके साथ समर्थन ज़ाहिर करने वालों की संख्या अधिक है.
इन छात्रों के साथ अपना समर्थन जताने के लिए रोजाना अनीता वर्मा आती हैं.
वह कहती हैं, “मैं अपने बेटा और बेटी के भविष्य के लिए आती हूं. अगर सरकार ऐसे ही धांधली करवाती रही तो गरीब के बच्चों का पढ़कर क्या होगा? बच्चे पढ़ते हैं, मेहनत करते हैं और सरकार ढंग से एक एग्ज़ाम नहीं करवा सकती.”
छात्रों से बातचीत को तैयार है सरकार

जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच शुक्रवार को राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल और अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत हुई.
सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, चमरा लिंडा और संजय प्रसाद यादव बातचीत में शामिल थे.
छात्रों के प्रतिनिधिमंडल में शामिल राजेश प्रसाद ने बताया, मंत्रियों के सामने सभी मांगों और इन मांगों का आधार रखा गया. मंत्रियों ने हमारी मांग को ध्यान से सुना और कहा कि ये बिल्कुल जायज़ हैं.
छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक पूरी मांगें नहीं पूरी होंगी, तक तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा. साथ ही उन्होंने कहा है कि 10 अगस्त से पहले मांगे पूरी हो जाए, वरना वे विधानसभा मार्च का कार्यक्रम करेंगे.
इस अनशन के मामले में स्थानीय पत्रकार आनंद दत्ता बीबीसी से कहते हैं, “जेपीएससी की कोई भी परीक्षा आज तक पारदर्शिता से नहीं हुई. जेपीएससी की 14वीं परीक्षा में भी धांधली हुई, जिसके बाद ये पूरा आंदोलन हो रहा है. वहीं जेएसएससी की भी अधिकांश परीक्षाएं विवादित रही है.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट… सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.
SOURCE : BBC NEWS




