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हर हफ्ते ₹12726060 कमाने वाला मानव तस्करी का ‘किंग’ पहुंचा ब्रिटेन, इराकी सरगना बोला- मुझे शरण दो

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Source :- LIVE HINDUSTAN

लीसेस्टरशायर के ब्लैबी गांव में मानव तस्करी के दोषी इराकी नागरिक ट्वाना जमाल का पता चला है। फ्रांस में इंग्लिश चैनल के पार प्रवासियों की तस्करी के बड़े नेटवर्क चलाने के आरोप में पांच साल की जेल की सजा काट चुका जमाल ब्रिटेन में फर्जी पहचान का इस्तेमाल करते हुए शरण का दावा कर रहा था।

हर हफ्ते ₹12726060 ( 1 लाख पाउंड ) कमाने वाला मानव तस्करी का ‘किंग’ ब्रिटेन पहुंच गया है। फ्रांस की कोर्ट से सजा पाए इराकी सरगना ट्वाना जमाल का पता ब्रिटेन के लीसेस्टरशायर के ब्लैबी गांव में चला है। बताया जा रहा है कि वह यहां फर्जी पहचान का इस्तेमाल करते हुए शरण के दावे पर फैसले का इंतजार कर रहा है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, इंग्लिश चैनल पार करने वाले प्रवासी तस्करी नेटवर्क का कथित सरगना ब्रिटेन की धरती पर सुरक्षित रहते हुए कानूनी प्रक्रिया का फायदा उठा रहा था। दरअसल, ट्वाना जमाल पर आरोप है कि उसने उत्तरी फ्रांस से ब्रिटेन जाने वाले प्रवासियों का बड़ा नेटवर्क चलाता था। फ्रांसीसी अधिकारियों ने 2016 में उसे गिरफ्तार किया था और उसे उस वक्त के सबसे सफल और खतरनाक तस्करों में शामिल बताया था।

ट्वाना जमाल का आपराधिक इतिहास

अभियोजकों के मुताबिक, जमाल उत्तरी फ्रांस के ग्रैंड सिंथे प्रवासी शिविर से काम करता था। बताया जाता है कि वह ब्रिटेन पहुंचने की कोशिश कर रहे प्रवासियों से प्रति व्यक्ति करीब 4500 पाउंड वसूलता था। इस तरह वह हर सप्ताह लगभग 1 लाख पाउंड ( 12726060 भारतीय रुपये ) की कमाई करता था। रिपोर्ट के अनुसार, उसका नेटवर्क हर महीने औसतन 80 प्रवासियों को ब्रिटेन भेजता था। जांच में पता चला कि जमाल शुरू में प्याज और पनीर से लदे ट्रकों में प्रवासियों को छिपाकर ले जाता था। इन ट्रकों से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड की वजह से डिटेक्टरों को अंदर छिपे लोगों का पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता था। स्थानीय प्रवासी शिविरों में उसे ‘पाशा’ के नाम से जाना जाता था, जो तुर्की भाषा में उच्च पदाधिकारी या बॉस के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है।

लीसेस्टरशायर में ऐसे रह रहा जमाल

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, जमाल ब्लैबी गांव में एक दुकान में अवैध रूप से काम कर रहा था। वह बिना ड्राइविंग लाइसेंस के गाड़ी चलाते था और फर्जी नाम का इस्तेमाल कर रहा था। पूछताछ के दौरान उसने मानव तस्करी से जुड़े आरोपों से सीधे इनकार किया। दावा किया कि वह 2009 से ब्रिटेन में रह रहा है और शरण के लिए आवेदन कर चुका है, लेकिन अभी भी फैसले का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एक सीक्रेट फोन कॉल में जमाल के ये कहते सुना गया कि हम इस शहर में सभी को जानते हैं, यह शहर हमारा है। उसने यह भी दावा किया कि वह अच्छी कमाई कर रहा है और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से कोई खतरा नहीं है। इस दौरान उसने यह भी कहा कि यहां कोई हमें हाथ नहीं लगा सकता और पुलिस भी नहीं रोकेगी।

नियमों का उल्लंघन

ब्रिटेन के मौजूदा आव्रजन नियमों के अनुसार, विदेश में कम से कम एक साल की जेल की सजा काट चुके व्यक्ति का शरण आवेदन सामान्यतः खारिज कर दिया जाता है। ट्वाना जमाल ने फ्रांस में पांच साल की सजा काटी थी, फिर भी उसका आवेदन लंबित है। ऐसे में इसने ब्रिटेन की शरण प्रणाली और सुरक्षा जांच की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दूसरा तस्कर भी आया सामने

रिपोर्ट में दावा किया गया कि, जांच के दौरान एक अन्य कथित मानव तस्कर करदो जाफ को भी पकड़ा गया। जाफ को अफगानिस्तान से ब्रिटेन तक फैले अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क का सरगना माना जाता है। वह ‘करदो रान्या’ नाम से काम करता था, जिसकी वजह से पुलिस को उसकी असली पहचान का पता लगाने और अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट जारी करने में दिक्कत हुई।

रिपोर्ट के अनुसार, जाफ भी इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। 2024 की चैथम हाउस रिपोर्ट में इस क्षेत्र को सक्रिय तस्करी नेटवर्क से भरा हुआ बताया गया था। सीक्रेट रूप से की गई बातचीत में जाफ ने ब्रिटेन पहुंचने के कई रास्ते बताए थे। उसने कहा था कि फ्रांस में हमारे पास ट्रक, विमान या नाव हैं। ब्रिटेन पहुंचने के इतने सारे तरीके हैं, आप जिस तरीके को पसंद करें, हम आपको ब्रिटेन पहुंचा देंगे।

क्या बोली सरकार?

दूसरी ओर रिपोर्ट सामने आने के बाद ब्रिटेन में हलचल मच गई है। ब्रिटेन के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सभी शरण चाहने वालों को पहचान, सुरक्षा और आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच के लिए अनिवार्य सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN