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हांगकांग में चीन लगा रहा ‘सोने का अंबार’, भारत में उछले दाम

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Source :- LIVE HINDUSTAN

दुनिया के सबसे बड़े सोना खरीदारों में शामिल पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना अब अपने गोल्ड रिजर्व का बड़ा हिस्सा लंदन से हटाकर हांगकांग में जमा कर रहा है। जानकारों के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में चीन के केंद्रीय बैंक ने हांगकांग की तिजोरियों में बड़ी मात्रा में सोना जमा कराया है। इसे हांगकांग को ग्लोबल गोल्ड ट्रेडिंग और बुलियन हब बनाने की रणनीति का अहम कदम माना जा रहा है।

इस बीच आज भारत के घरेलू मार्केट में सोने और चांदी के दाम एक बार फिर बढ़ गए हैं। एमसीएक्स पर सुबह 9:43 बजे सोने का वायदा भाव 0.53 प्रतिशत चढ़कर 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब ट्रेड कर रहा था। जबकि, चांदी 1.14 प्रतिश की तेजी के साथ 228401 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई थी।

लंदन से हटाकर हांगकांग में रखा जा रहा सोना

अब तक दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अपने सोने का बड़ा हिस्सा लंदन में रखते रहे हैं, क्योंकि वहां दुनिया का सबसे बड़ा बुलियन बाजार है। लेकिन चीन अब धीरे-धीरे अपने गोल्ड रिजर्व को लंदन से हटाकर हांगकांग ला रहा है।

ब्लूमबर्ग के सूत्रों के अनुसार, यह प्रक्रिया आगे भी जारी रह सकती है। इससे साफ संकेत मिलता है कि बीजिंग अपने स्वर्ण भंडार को घर के करीब रखने और हांगकांग की वैश्विक भूमिका मजबूत करने पर जोर दे रहा है।

लगातार 20 महीने से सोना खरीद रहा चीन

पीबीओसी लगातार 20 महीने से सोने की खरीद कर रहा है। इसी दौरान उसने हांगकांग में अपना गोल्ड स्टॉक बढ़ाना भी शुरू किया है। हालांकि, चीन ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया है कि उसने हांगकांग में कितना सोना ट्रांसफर किया है।

हांगकांग को नया गोल्ड हब बनाने की तैयारी

हाल ही में हांगकांग ने एक नया गोल्ड क्लियरिंग सिस्टम शुरू की है। इसमें नया गोल्ड बेंचमार्क भी शामिल है, जिससे ग्लोबल गोल्ड प्राइसिंग में हांगकांग की भूमिका बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इस कदम से हांगकांग सीधे तौर पर लंदन, न्यूयॉर्क और सिंगापुर जैसे बड़े बुलियन ट्रेडिंग सेंटर्स को चुनौती देना चाहता है।

हांगकांग ने अन्य केंद्रीय बैंकों को भी इस गोल्ड क्लियरिंग सिस्टम से जुड़ने का निमंत्रण दिया है। खासकर बेल्ट एंड रोड पहल से जुड़े देशों को प्राथमिकता दी जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक कंबोडिया पहले ही अपने गोल्ड रिजर्व को हांगकांग में रखने के प्रस्ताव को स्वीकार कर चुका है।

सोने की कीमतों पर क्या होगा असर?

लगातार खरीदारी के कारण इस साल सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची थीं। हालांकि बाद में मध्य-पूर्व तनाव, बढ़ती ऊर्जा कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण सोने में गिरावट आई। इसके बावजूद चीन की लगातार खरीदारी ने सोने को 4,000 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर से ऊपर बनाए रखने में मदद की है। कीमतों में गिरावट आने पर संस्थागत निवेशकों ने भी खरीदारी बढ़ाई है।

फिलहाल निवेशकों की नजर तीन बड़े कारकों पर टिकी है। चीन के केंद्रीय बैंक की आगे की सोना खरीद, मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और इन तीनों का असर आने वाले समय में सोने की कीमतों की दिशा तय कर सकता है।

इनपुट: ब्लूमबर्ग

SOURCE : LIVE HINDUSTAN