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हूतियों संग जंग नहीं लड़ने वाला पाकिस्तान? सऊदी से सिर्फ पैसे ऐंठना चाह रहे शरीफ-मुनीर; पाक पत्रकार ने ही खोली पोल

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Source :- LIVE HINDUSTAN

पाकिस्तानी पत्रकार, लेखक और विश्लेषक शकील चौधरी ने दावा किया है कि सऊदी अरब में पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती के पीछे का मुख्य मकसद हूतियों से जंग लड़ना नहीं बल्कि सऊदी अरब को सुरक्षा देने के बहाने उससे अधिक से अधिक पैसे ऐंठना है।

मिडिल-ईस्ट में सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच जंग गहरा गई है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में गुरुवार (8 अक्तूबर) को कई विस्फोटों की आवाज सुनी गई, जिनमें शहर के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुआ एक जोरदार विस्फोट भी शामिल है। पड़ोसी देश यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इस हमले की जिम्मेदारी ली है और कहा कि बैलिस्टिक मिसाइल से नुकसान हुआ है। हालांकि, इसके समर्थन में हूतियों ने कोई सबूत नहीं दिया। दूसरी तरफ, सऊदी अरब ने भी हूती ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं।

‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यमन में ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ हमलों में पाकिस्तान वायु सेना के लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया जा रहा है। खबर है कि इस्लामाबाद ने हाल ही में शुरू हुए ‘मक्का डिफेंस अलायंस’ के तहत सऊदी अरब को सैन्य मदद बढ़ा दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सऊदी अरब में पाकिस्तान ने करीब 8,000 सैनिक भी तैनात किए हैं। पाकिस्तान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर NYT को बताया कि हूती विद्रोहियों को निशाना बनाकर किए जा रहे हमलों में पाकिस्तानी वायु सेना के लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

फैसले के पीछे कोई सुरक्षा या धार्मिक कारण नहीं

इस बीच, पाकिस्तानी पत्रकार, लेखक और विश्लेषक शकील चौधरी ने दावा किया है कि सऊदी अरब में पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती के पीछे का मुख्य मकसद हूतियों से जंग लड़ना नहीं बल्कि सऊदी अरब को सुरक्षा देने के बहाने उससे अधिक से अधिक पैसे ऐंठना है। पाकिस्तान द्वारा सऊदी अरब में अपनी सेना तैनात करने की हालिया सैन्य पुष्टि पर सवाल उठाते हुए शकील चौधरी ने कहा है कि इस फैसले के पीछे कोई सुरक्षा या धार्मिक कारण नहीं, बल्कि पाकिस्तान की गंभीर आर्थिक लाचारी और सऊदी अरब से वित्तीय सहायता (पैसा) हासिल करने की कोशिश है।

संसद से मंजूरी लिए बिना ही सेना भेजी

पत्रकार कमर चीमा के डिजिटल शो में बातचीत करते हुए शकील चौधरी ने पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व और शहबाज़ शरीफ सरकार के इस कदम की पोल खोलते हुए पहले 2015 के राजनीतिक हालात की चर्चा की, जब शहबाज शरीफ के बड़े भाई नवाज शरीफ प्रधानमंत्री थे। उन्होंने बताया कि तब पाकिस्तानी संसद ने सेना भेजने से इनकार कर दिया था लेकिन इस बार संसद से मंजूरी लिए बिना ही वहां सेना भेजी गई है। शकील चौधरी ने याद दिलाया कि अप्रैल 2015 में पाकिस्तानी संसद ने सर्वसम्मति से यमन-हूती संघर्ष में तटस्थ (न्यूट्रल) रहने का प्रस्ताव पारित किया था और सऊदी अरब में अपनी फौज भेजने से मना कर दिया था। बकौल चौधरी उस समय देश की शिया आबादी (लगभग 15%) की प्रतिक्रिया और ईरान को नाराज न करने का ध्यान रखा गया था। हालांकि, इस बार संसद से कोई चर्चा किए बिना ही सेना की तैनाती कर दी गई, क्योंकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है और उसे सऊदी वित्तीय मदद की सख्त जरूरत है।

हूतियों का खतरा महज एक बहाना, असली मकसद ‘पैसा’

जब शो के होस्ट कमर चीमा ने पवित्र स्थलों (हरमैन शरीफैन) की सुरक्षा और हूतियों के खतरे का मुद्दा उठाया तो शकील चौधरी ने कहा कि हूती भी मुसलमान हैं और वे पवित्र स्थलों को नुकसान क्यों पहुंचाएंगे? उन्होंने जोर देकर कहा कि इस रणनीतिक सौदेबाजी में वित्तीय मदद (मनी फैक्टर) ही सबसे मुख्य वजह है और इसे इस समीकरण से अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होता, तो उसे ऐसे फैसले नहीं लेने पड़ते।

भारत से युद्ध हुआ तो सऊदी अरब नहीं भेजेगा अपनी सेना

पाक सरकार और सेना द्वारा इस समझौते को ‘कलेक्टिव डिटेरेंस’ के रूप में पेश करने पर शकील चौधरी ने कहा कि अगर भविष्य में भारत के साथ पाकिस्तान का कोई टकराव होता है, तो सऊदी अरब या तुर्की पाकिस्तान की तरफ से लड़ने के लिए अपनी सेना या वायुसेना नहीं भेजेंगे। उन्होंने याद दिलाया कि सऊदी अरब के भारत के साथ गहरे आर्थिक संबंध और कई बड़े संयुक्त प्रोजेक्ट्स हैं। उन्होने कहा कि सऊदी अरब ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया है। ऐसे में साफ है कि किसी भी सैन्य संघर्ष की स्थिति में सऊदी अरब पाकिस्तान को केवल कूटनीतिक संयम (रिस्ट्रेंट) की सलाह देगा और ये बात पाकिस्तानी हुक्मरानों (शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर) को भी पता है। इसलिए उनका असली मकसद सऊदी से पैसे ऐंठना है।

विश्व बैंक की रिपोर्ट: पाकिस्तान में 48% अत्यधिक गरीब

चर्चा के दौरान विश्व बैंक के आंकड़ों का जिक्र करते हुए चौधरी ने बताया कि इस पूरे क्षेत्र (MENA) के 48% अत्यधिक गरीब लोग पाकिस्तान में रहते हैं। विश्लेषक के अनुसार, पाकिस्तान की सरकारें और सेना आम जनता की गरीबी, स्वास्थ्य और बढ़ती आबादी जैसे गंभीर मुद्दों को नजरअंदाज करती रही हैं और देश के संसाधनों पर एलिट वर्ग का कब्जा हो चुका है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN