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होमबायर की बड़ी जीत! फ्लैट की पजेशन में देरी पड़ी भारी! बिल्डर को देना होगा ₹7.1 लाख ब्याज

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Source :- LIVE HINDUSTAN

महाराष्ट्र में फ्लैट की पजेशन में देरी से परेशान एक होमबायर के पक्ष में MahaRERA ने अहम फैसला सुनाया है। अथॉरिटी ने बिल्डर को देरी के लिए ब्याज चुकाने का आदेश दिया है। इस मामले में बिल्डर ने PMC और PMRDA के बीच बदली प्लानिंग अथॉरिटी को निर्माण में देरी की वजह बताया था। हालांकि, होमबायर द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों से सामने आया कि बिल्डर को इस बदलाव की जानकारी पहले से थी। इस वजह से MahaRERA ने बिल्डर की दलील को स्वीकार नहीं किया।

क्या है पूरा मामला?

मामला पुणे के वाघोली इलाके में स्थित एक प्रोजेक्ट का है। होमबायर प्रकाश ने 12 सितंबर 2022 को फ्लैट खरीदने के लिए एग्रीमेंट फॉर सेल किया था। इसमें फ्लैट की पजेशन 31 दिसंबर 2024 तक देने की बात तय हुई थी। लेकिन, तय समय तक फ्लैट की कानूनी और पूरी पजेशन नहीं दी गई। बिल्डर ने कहा कि 2022-23 के दौरान वाघोली की प्लानिंग अथॉरिटी PMC और PMRDA के बीच बदलने से नए प्लान और मंजूरियों की जरूरत पड़ी, जिससे प्रोजेक्ट में देरी हुई।

प्रकाश ने इस दलील को चुनौती देते हुए MahaRERA के सामने दस्तावेज पेश किए। उन्होंने 30 जून 2021 की UDD अधिसूचना का हवाला दिया, जिसमें वाघोली को PMC के अधिकार क्षेत्र में लाया गया था। इसके अलावा, प्रोजेक्ट की C-विंग के प्लान को जनवरी 2022 में ही मंजूरी मिल चुकी थी, यानी सितंबर 2022 में बिक्री समझौता होने से पहले ही बिल्डर को संबंधित प्लानिंग अथॉरिटी की स्थिति की जानकारी थी। MahaRERA ने इसी तथ्य को महत्वपूर्ण माना।

MahaRERA ने कहा कि जरूरी परमिशन, अप्रूवल और OC (Occupancy Certificate) हासिल करना बिल्डर की वैधानिक जिम्मेदारी है। सिर्फ प्रशासनिक या रेगुलेटरी दिक्कतों का सामान्य हवाला देकर तय पजेशन डेट के बाद की देरी को सही नहीं ठहराया जा सकता। अथॉरिटी ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी अप्रूवल में संभावित परेशानी थी, तो बिल्डर को एग्रीमेंट फॉर सेल (Agreement for Sale) में पजेशन की समयसीमा तय करते वक्त उसका अनुमान लगाना चाहिए था, बिल्डर अपनी ही जानकारी या चूक का फायदा नहीं उठा सकता।

इस मामले में बिल्डर ने ₹35,000 का ‘गुडविल कंपनसेशन’ देने की पेशकश भी की थी, लेकिन MahaRERA ने इसे उसकी वैधानिक जिम्मेदारी से अलग माना। अथॉरिटी ने कहा कि केवल फ्लैट का आंतरिक काम पूरा होना पर्याप्त नहीं है, OC (Occupancy Certificate) के बिना इसे कानूनी और पूर्ण पजेशन नहीं माना जा सकता। इसलिए बिल्डर को 1 जनवरी 2025 से OC के साथ वास्तविक पजेशन दिए जाने तक ब्याज देना होगा।

MahaRERA के 8 सितंबर 2026 के आदेश के अनुसार, ब्याज SBI के MCLR से 2% अधिक दर पर वास्तविक भुगतान की गई राशि पर लगेगा। फ्लैट की कीमत ₹41.85 लाख थी और होमबायर ने करीब ₹39.15 लाख का भुगतान किया था। उपलब्ध कैलकुलेशन के आधार पर 1 जनवरी 2025 से 8 सितंबर 2026 तक ब्याज करीब ₹7.1 लाख बैठता है। हालांकि अंतिम देय राशि वास्तविक पजेशन/OC की तारीख और लागू ब्याज कैलकुलेशन पर निर्भर करेगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN