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अमेरिका-ईरान युद्ध फिर भड़का तो क्या होगा? पूरी दुनिया के सामने खड़े हैं ये 3 बड़े खतरे!

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Source :- LIVE HINDUSTAN

पूरे खाड़ी क्षेत्र में इस समय हवाई हमलों के सायरन गूंज रहे हैं। अमेरिका ने ईरान पर तेल प्रतिबंधों की छूट को भी तुरंत रद्द कर दिया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि यह पूरा इलाका एक अनियंत्रित और भयानक युद्ध के मुहाने पर आ खड़ा हुआ है।

जून के महीने में जो सीजफायर हुआ था, वो बहुत ही कम समय में पूरी तरह टूट चुका है। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर ‘जैसे को तैसा’ वाले हमलों का सिलसिला शुरू हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस शांति समझौते को आधिकारिक तौर पर “खत्म” घोषित कर दिया है। यह कदम तब उठाया गया जब ईरान ने सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ में कमर्शियल जहाजों पर हमले किए। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के 80 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी की। ईरान ने भी पलटवार करते हुए बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिका के 85 सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलें दाग दीं।

पूरे खाड़ी क्षेत्र में इस समय हवाई हमलों के सायरन गूंज रहे हैं। अमेरिका ने ईरान पर तेल प्रतिबंधों की छूट को भी तुरंत रद्द कर दिया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि यह पूरा इलाका एक अनियंत्रित और भयानक युद्ध के मुहाने पर आ खड़ा हुआ है।

अगर जंग बढ़ी, तो सामने आएंगे ये 3 डरावने हालात

सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि अगर आने वाले दिनों में यह लड़ाई और तेज होती है, तो मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) और पूरी दुनिया को तीन बेहद खतरनाक स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है:

1. दुनिया में ऊर्जा का बड़ा संकट और समंदर की ‘नाकेबंदी’

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई का सबसे मुख्य रास्ता है। अगर ईरान अपने एंटी-शिप मिसाइलों, ड्रोनों और समुद्री बारूदी सुरंगों के जरिए इस रास्ते को पूरी तरह बंद करने की अपनी धमकी पर अमल करता है, तो दुनियाभर का व्यापार पूरी तरह ठप हो जाएगा।

  • 20% तेल-गैस ब्लॉक: दुनिया के कुल तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की 20 प्रतिशत से ज्यादा सप्लाई इसी रास्ते से होती है, जो तुरंत रुक जाएगी।
  • महंगाई का झटका: इसके चलते दुनिया भर में तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएंगी, जिससे एशिया और यूरोप की अर्थव्यवस्थाएं चरमरा जाएंगी।
  • हाई-इंटेनसिटी वॉर जोन: इस नाकेबंदी को तोड़ने के लिए अमेरिकी नौसेना और उसके सहयोगी देश जवाबी कार्रवाई करेंगे, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता एक सीधे और भयानक जंग के मैदान में बदल जाएगा।

2. कई मोर्चों पर एक साथ छिड़ सकती है जंग

अभी भले ही यह लड़ाई सीधे तौर पर अमेरिका और ईरान के बीच दिख रही हो, लेकिन ईरान का ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ यानी उसका समर्थक गुटों का नेटवर्क इस दायरे को बहुत बढ़ा सकता है।

  • लेबनान-इजरायल मोर्चा: लेबनान का हिजबुल्लाह गुट उत्तरी और मध्य इजरायल पर हजारों सटीक निशाना लगाने वाले रॉकेट दाग सकता है, जिससे वहां का एयर डिफेंस सिस्टम भी लाचार हो जाएगा।
  • लाल सागर में हाहाकार: यमन के हूती विद्रोही बाब अल-मंडब और लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर दोबारा बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर देंगे, जिससे स्वेज नहर के रास्ते होने वाला यूरोपीय व्यापार पूरी तरह कट जाएगा।
  • सीरिया और इराक में टकराव: इराक और सीरिया में सक्रिय ईरान समर्थक मिलिशिया वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएगी, जिसके जवाब में अमेरिकी गठबंधन सेनाएं इन देशों पर बड़े हवाई हमले करने को मजबूर होंगी।

खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर सीधा हमला

खाड़ी के जिन देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, वे न चाहते हुए भी इस युद्ध की आग में झुलस जाएंगे। बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हुए हालिया हमलों ने यह साफ कर दिया है कि ये देश सीधे तौर पर इस टकराव का हिस्सा बन चुके हैं।

ईरान पहले भी खाड़ी देशों के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की धमकी दे चुका है। अगर तनाव और बढ़ा, तो संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और सऊदी अरब के पानी साफ करने वाले प्लांट (डीसेलिनेशन प्लांट), पावर ग्रिड और बड़ी तेल रिफाइनरियों पर ड्रोन हमले हो सकते हैं। खाड़ी देशों के कारखानों, डेटा सेंटरों और नागरिक परिवहन केंद्रों पर सीधे हमले होने से वहां विदेशी निवेश पूरी तरह रुक जाएगा और पूरे GCC क्षेत्र में घरेलू सुरक्षा के कड़े लॉकडाउन लगाने की नौबत आ जाएगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN