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अमेरिका में मिडटर्म चुनाव: कब तक आएंगे अंतिम नतीजे और कैसे होती है वोटों की गिनती?

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Source :- BBC INDIA

बैंगनी रंग की पृष्ठभूमि पर लाल और नीली पट्टियों के साथ एक युवती को नोटपैड पर नोट्स लिखते हुए दर्शाया गया है. उसने डेनिम जैकेट पहनी है जिस पर

अमेरिका में हो रहे मिडटर्म चुनावों के नतीजे तय करेंगे कि डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल का बाक़ी समय कैसा रहेगा.

नतीजों से ये भी तय होगा कि अमेरिकी कांग्रेस में किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा- ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी या विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी.

मुमकिन है कि अंतिम परिणाम आने में कई घंटे, दिन या यहाँ तक कि हफ़्ते भी लग जाएं.

नतीजे कब तक आएंगे और कांग्रेस पर किसका नियंत्रण होगा?

अमेरिकी कांग्रेस के दो सदन हैं. निचला सदन हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स और ऊपरी सदन सीनेट.

हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स में बहुमत हासिल करने के लिए किसी पार्टी को 218 सीटें जीतनी होती हैं. वहीं, सीनेट में स्पष्ट बहुमत के लिए 51 सीटें ज़रूरी हैं.

हालांकि, अगर ऊपरी सदन यानी सीनेट में दोनों पार्टियों के पास 50-50 सीटें होती हैं, तो उपराष्ट्रपति को बराबरी की स्थिति में निर्णायक वोट देने का अधिकार होता है. इससे उनकी पार्टी को सीनेट पर नियंत्रण मिल जाता है.

शुरुआती नतीजों से पूरे चुनाव की तस्वीर साफ़ नहीं होगी, क्योंकि ये उन राज्यों से आएंगे जहां रिपब्लिकन पार्टी (केंटकी और इंडियाना) या डेमोक्रेटिक पार्टी (वर्मॉन्ट) की जीत लगभग तय मानी जा रही है.

बीबीसी के विश्लेषक उन सीटों पर नज़र रख रहे हैं, जहाँ कड़ा मुक़ाबला है. इन सीटों के नतीजों से पता चलेगा कि ट्रंप के लिए चुनाव किस दिशा में जा रहा है.

सीनेट की कई सीटों पर कड़ा मुक़ाबला है. इन सीटों के नतीजों से शुरुआती संकेत मिल सकते हैं कि मतदाताओं का रुझान किस तरफ़ है.

अमेरिकी मीडिया ने कुछ अहम सीटों पर जीत के अनुमान जारी किए हैं. इसके लिए वे ऐसे मॉडल का इस्तेमाल करते हैं, जिनकी मदद से वोटों की पूरी गिनती होने से पहले ही अनुमान लगाया जाता है कि किसी राज्य में किस पार्टी की जीत हुई है.

ऐसा तब होता है, जब मीडिया संस्थानों को लगता है कि किसी पार्टी या उम्मीदवार ने इतनी बढ़त हासिल कर ली है, जिसे पार करना दूसरे उम्मीदवार के लिए मुमकिन नहीं है.

हालांकि, जिन राज्यों में मुक़ाबला बेहद क़रीबी है, वहां मीडिया संस्थानों को नतीजों का अनुमान जारी करने में काफ़ी वक़्त लग सकता है.

चुनाव के पूरे नतीजे आने में कितना समय लगेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि मुक़ाबला कितना कड़ा है और किन सीटों के नतीजे निर्णायक साबित होते हैं.

वोटों की गिनती कैसे होती है?

मिडटर्म चुनाव

अमेरिका के हर राज्य में चुनाव कराने की ज़िम्मेदारी वहां के प्रशासन की होती है. हर राज्य में वोटों की गिनती और उन्हें दर्ज करने के अपने अलग नियम हैं.

फ़्लोरिडा जैसे कुछ राज्यों में चुनाव के दिन से पहले ही शुरुआती और डाक से आए बैलेट की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है. वहीं, कुछ राज्य 3 नवंबर को ही वोटों की गिनती शुरू करते हैं.

स्थानीय चुनाव अधिकारी हर वोट की जांच करते हैं, उसे प्रक्रिया से गुज़ारते हैं और उसकी गिनती करते हैं. इस पूरी प्रक्रिया को कैनवसिंग कहा जाता है.

ज़्यादातर राज्यों में चुनाव के बाद ऑडिट करना ज़रूरी होता है. इसमें मशीन से हुई वोटों की गिनती का मिलान बैलेट की मैन्युअल गिनती से किया जाता है.

हालांकि, इसके नियम अलग-अलग राज्यों में अलग हैं. आमतौर पर पूरी गिनती हाथ से तभी की जाती है, जब दोबारा गिनती की नौबत आती है.

हर राज्य और स्थानीय प्रशासन के अपने नियम हैं. इन नियमों में तय होता है कि वोटों की जांच और गिनती की प्रक्रिया में कौन शामिल हो सकता है, वोटों की गिनती किस क्रम में होगी और प्रक्रिया के कौन-कौन से हिस्से आम लोगों के लिए खुले रहेंगे.

इनमें यह भी शामिल है कि राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधि किस तरह गिनती पर नज़र रख सकते हैं और कुछ राज्यों में औपचारिक आपत्तियां कैसे दर्ज करा सकते हैं.

नतीजों में देरी किन वजहों से हो सकती है?

उत्साह में दिख रहे डेमोक्रेटिक पार्टी के कार्यकर्ता

जिन सीटों पर मुक़ाबला कड़ा होता है, वहां नतीजे आने में ज़्यादा समय लगता है. ऐसी सीटों पर दोबारा गिनती की नौबत आ सकती है और कानूनी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं.

डाक से भेजे गए बैलेट की गिनती में ज़्यादा समय लगता है, क्योंकि चुनाव अधिकारियों को लिफ़ाफ़ों की जांच करनी होती है और उन पर मौजूद हस्ताक्षरों का मिलान करना होता है.

अमेरिका के 30 से ज़्यादा राज्यों में चुनाव के दिन से पहले ही बैलेट की प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति है, लेकिन कुछ राज्यों में ऐसा नहीं होता.

कैलिफ़ोर्निया में सभी बैलेट चुनाव के दिन से पहले या उसी दिन तक डाक से भेजना ज़रूरी है. हालांकि, चुनाव के सात दिन के भीतर पहुंचने वाले बैलेट की भी गिनती की जाएगी.

अलास्का में रैंक्ड चॉइस वोटिंग की वजह से वोटों की गिनती में देश के दूसरे राज्यों के मुक़ाबले काफ़ी ज़्यादा समय लग सकता है. बैलेट को लेकर विवाद होने पर कानूनी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं, जिससे प्रक्रिया और जटिल हो सकती है.

अगर चुनाव के नतीजों को चुनौती दी जाती है तो क्या होगा?

जब सभी वोटों को अंतिम नतीजों में शामिल कर लिया जाता है और दोबारा गिनती जैसी प्रक्रियाएं पूरी हो जाती हैं, तब चुनाव के नतीजों को आधिकारिक रूप से प्रमाणित किया जाता है. यह प्रक्रिया पहले स्थानीय और काउंटी स्तर पर होती है और फिर पूरे राज्य में पूरी की जाती है.

इसके बाद आमतौर पर राज्य के गवर्नर हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स और सीनेट के विजेताओं के प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर करते हैं, जिन्हें कांग्रेस को भेजा जाता है.

चुनाव के नतीजों को चुनौती दी जा सकती है. कड़े मुक़ाबले वाली सीटों पर उम्मीदवार दोबारा गिनती की मांग कर सकते हैं. कुछ राज्यों में अगर जीत का अंतर तय सीमा के भीतर रहता है, तो अपने आप दोबारा गिनती शुरू हो जाती है.

उम्मीदवार चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कानूनी चुनौती भी दे सकते हैं.

इस मामले में अंतिम फ़ैसला कांग्रेस करती है. हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स और सीनेट, दोनों के चुनाव में हारने वाले उम्मीदवार नतीजों को चुनौती दे सकते हैं. हालांकि, दोनों सदनों में इसकी प्रक्रिया थोड़ी अलग है.

सैद्धांतिक रूप से दोनों सदन किसी व्यक्ति को सदस्य के तौर पर स्वीकार करने से इनकार कर सकते हैं या जांच का आदेश दे सकते हैं.

2022 में चुनाव के नतीजे कब आए थे?

डेनवर में  एक मेज के चारों ओर बैठकर वोटों की गिनती कर रहा है.

साल 2022 में मिडटर्म चुनावों के एक दिन बाद भी 9 नवंबर को भी रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के बीच अमेरिकी कांग्रेस पर नियंत्रण को लेकर कड़ा मुक़ाबला जारी था.

उस साल हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स में रिपब्लिकन पार्टी की जीत की संभावना ज़्यादा थी, लेकिन सीनेट पर नियंत्रण को लेकर मुक़ाबला बेहद क़रीबी था.

तब चुनाव की पूरी तस्वीर साफ़ होने में कई दिन लगे थे. सीबीएस न्यूज़ ने 17 नवंबर को अनुमान जताया कि रिपब्लिकन पार्टी ने हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स में बहुमत के लिए ज़रूरी 218 सीटें जीत ली हैं.

सीनेट की एक अहम सीट नेवादा में वोटों की गिनती पूरी होने में चार दिन लगे थे. इस राज्य में डेमोक्रेटिक पार्टी की मामूली जीत के बाद उसके पास 50 सीटें हो गईं.

उस समय उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के पास बराबरी की स्थिति में निर्णायक वोट देने का अधिकार था. इसकी वजह से डेमोक्रेटिक पार्टी सीनेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखने में कामयाब रही.

जॉर्जिया में सीनेट की सीट पर दोबारा चुनाव कराना पड़ा था, क्योंकि नवंबर में किसी भी उम्मीदवार को 50 फ़ीसदी से ज़्यादा वोट नहीं मिले थे.

इस सीट के नतीजे 7 दिसंबर को आए, जब डेमोक्रेटिक पार्टी ने जीत हासिल की.

2026 में किन सीटों पर रहेगी नज़र?

इस संयुक्त तस्वीर में बाईं ओर एशली हिंसन और दाईं ओर जोश ट्यूरेक हैं. दोनों तस्वीरों में केवल सिर और कंधे दिखाई दे रहे हैं. हिंसन ने काले और गहरे नीले रंग की पैटर्न वाली टॉप और चश्मा पहना हुआ है. ट्यूरेक ने गहरे रंग की शर्ट पहनी है.

स्वतंत्र चुनाव विश्लेषक संस्था कुक पॉलिटिकल रिपोर्ट ने सीनेट की छह सीटों पर कड़ा मुक़ाबला होने का अनुमान लगाया है.

इनमें अलास्का, कंसास, आयोवा, मेन, ओहायो और टेक्सस शामिल हैं. इन सभी छह सीटों पर फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण है. सीनेट में 51 सीटों के साथ नियंत्रण हासिल करने के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी को इनमें से तीन सीटें जीतनी होंगी.

इसके अलावा उसे उन पांच सीटों पर भी जीत हासिल करनी होगी, जहां डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत की संभावना ज़्यादा मानी जा रही है या जहां उसका पलड़ा भारी है.

ओपिनियन पोल के मुताबिक़, टेक्सस में डेमोक्रेटिक पार्टी के पास जीतने का मौक़ा है. यहां पूर्व शिक्षक जेम्स तालारिको, केन पैक्सटन को हरा सकते हैं. पैक्सटन राज्य के मौजूदा अटॉर्नी जनरल और ट्रंप के क़रीबी सहयोगी हैं. अगर तालारिको जीतते हैं, तो 1988 के बाद टेक्सस से सीनेट की सीट जीतने वाले पहले डेमोक्रेटिक उम्मीदवार बन जाएंगे.

डेमोक्रेटिक पार्टी को मिशिगन में भी अपनी सीट बचानी होगी. यहां वामपंथी विचारधारा वाले राजनीतिक क्षेत्र के नए चेहरे अब्दुल अल-सैयद का मुक़ाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स से है. रोजर्स ट्रंप के सहयोगी और एफबीआई के पूर्व एजेंट हैं. इस सीट पर काफ़ी नज़र रखी जा रही है.

कुक पॉलिटिकल रिपोर्ट ने शुरुआत में मिशिगन की इस सीट को कड़े मुक़ाबले वाली सीट बताया था. हालांकि, मतदान से एक दिन पहले उसने अपना अनुमान बदलकर इसे डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में झुका हुआ बताया.

कांग्रेस के निचले सदन हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स में फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत बहुत कम है. उसके पास 218 प्रतिनिधि हैं. इसके अलावा एक निर्दलीय सदस्य भी है, जो उसके साथ वोट करता है.

कुक पॉलिटिकल रिपोर्ट के मुताबिक़, हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स की जिन सीटों पर सबसे कड़ा मुक़ाबला है, उनमें से कई पूर्वी तट के राज्यों में हैं. इनमें न्यूयॉर्क का 17वां डिस्ट्रिक्ट, पेनसिल्वेनिया का आठवां डिस्ट्रिक्ट और वर्जीनिया का पहला डिस्ट्रिक्ट शामिल हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS