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आज टाटा संस की बोर्ड मीटिंग: IPO और चेयरमैन से जुड़े मुद्दों पर हो सकता है बड़ा फैसला

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Source :- LIVE HINDUSTAN

टाटा ग्रुप (Tata Group) की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons) के लिए 17 सितंबर की बोर्ड मीटिंग काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में दो बड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। पहला मुद्दा RBI (Reserve Bank of India) के उस निर्देश से जुड़ा है, जिसके तहत टाटा संस (Tata Sons) को लागू नियमों का पालन करते हुए संभावित रूप से शेयर बाजार में लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ना होगा। दूसरा अहम मुद्दा मौजूदा चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का है। उनकी मौजूदा अवधि फरवरी 2027 में खत्म हो रही है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

दरअसल, RBI ने 11 सितंबर 2026 को टाटा संस (Tata Sons) की उस अर्जी को स्वीकार नहीं किया, जिसमें कंपनी ने अपना CoR (Certificate of Registration) स्वेच्छा से वापस करने का अनुरोध किया था। टाटा संस (Tata Sons) चाहती थी कि उसे एक अनरजिस्टर्ड कोर इंवेस्टमेंट कंपनी (Core Investment Company) के तौर पर काम करने की अनुमति मिले। RBI के फैसले के बाद कंपनी को NBFC-अपर लेयर से जुड़े नियमों का पालन करना होगा, जिसमें लिस्टिंग से जुड़ी शर्त भी शामिल है। इस फैसले ने टाटा संस (Tata Sons) के संभावित IPO और लिस्टिंग की चर्चा को फिर तेज कर दिया है।

बोर्ड मीटिंग से पहले कंपनी ने RBI के निर्देश के कानूनी पहलुओं को समझने के लिए कई कानूनी राय भी ली हैं। रिपोर्टों के मुताबिक बोर्ड में इस बात पर चर्चा हो सकती है कि RBI के निर्देश को किस तरह लागू किया जाए और आगे की प्रक्रिया क्या होगी। अगर कंपनी इस दिशा में आगे बढ़ती है तो आने वाले महीनों में संभावित लिस्टिंग की तैयारियां शुरू हो सकती हैं। हालांकि, अंतिम प्रक्रिया, समयसीमा और IPO का स्वरूप अभी तय नहीं माना जा सकता।

दूसरी ओर टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन को लेकर भी बोर्ड मीटिंग में महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है। उन्होंने मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद तीसरी बार चेयरमैन पद के लिए खुद को पेश नहीं करने का फैसला किया था। लेकिन, NRC (Nomination and Remuneration Committee) की ओर से उन्हें अपने फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए कहा जा सकता है। अगर नटराजन चंद्रशेखरन जारी रहने पर सहमत होते हैं, तो उनके अगले कार्यकाल की अवधि और उसका स्वरूप बोर्ड में चर्चा का विषय हो सकता है।

इस पूरे मामले में टाटा ट्रस्ट (Tata Trusts) की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसके पास टाटा संस (Tata Sons) में बहुमत हिस्सेदारी है। बोर्ड के फैसलों में टाटा ट्रस्ट (Tata Trusts) द्वारा नामित निदेशकों के मतदान अधिकारों को लेकर भी कानूनी प्रावधानों की समीक्षा की जा रही है। टाटा संस (Tata Sons) के आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन (Articles of Association) में कुछ खास मामलों के लिए ट्रस्ट-नॉमिनेटेड डायरेक्टर्स (Trust-nominated directors) की सहमति से जुड़े प्रावधान हैं। हालांकि, किसी प्रस्ताव पर वास्तविक वोटिंग कैसे होगी, यह उस प्रस्ताव और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।

इसलिए 17 सितंबर की बैठक टाटा संस (Tata Sons) के लिए केवल चेयरमैन के भविष्य से जुड़ी बैठक नहीं है, बल्कि RBI का नियामकीय निर्देश, संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग, नेतृत्व में बदलाव और टाटा ट्रस्ट (Tata Trusts) से जुड़े गवरनेंस (governance) मुद्दे एक साथ सामने हैं। बोर्ड का रुख आगे की रणनीति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन बैठक से पहले किसी अंतिम फैसले को निश्चित मानना उचित नहीं होगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN