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इंडिया गठबंधन की बैठक में ये फ़ैसले लिए गए, लेकिन अखिलेश समेत कई अहम विपक्षी नेता रहे ग़ैरहाज़िर

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Source :- BBC INDIA

इंडिया गठबंधन

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पढ़ने का समय: 7 मिनट

बुधवार को विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक हुई. इसमें 19 पार्टियों के नेता शामिल हुए. हालांकि, गठबंधन के अहम घटक समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई प्रमुख नेता बैठक में मौजूद नहीं थे.

अखिलेश यादव लखनऊ में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए अपनी पार्टी के दो उम्मीदवारों के नामांकन में मौजूद रहे. उनकी जगह समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता बैठक में शामिल हुए.

अखिलेश यादव के अलावा, डीएमके नेता एमके स्टालिन और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल भी बैठक में शामिल नहीं हुए.

बीजेपी ने विपक्षी गठबंधन के नेताओं की गैरमौजूदगी को लेकर ‘इंडिया’ ब्लॉक की एकता पर सवाल उठाए हैं.

अखिलेश की गैरमौजूदगी पर बोले सपा नेता

अखिलेश यादव

हालांकि, अखिलेश की गैरमौजूदगी को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता महिबुल्लाह नदवी ने दावा किया कि इंडिया गठबंधन मज़बूत है.

उन्होंने कहा, “समाजवादी पार्टी ने हमारे प्रतिनिधिमंडल से दो लोगों, हरेंद्र मलिक जी और मुझे, के नाम भेजे थे. चूंकि उत्तर प्रदेश में चुनाव हो रहे हैं, हमारी पार्टी के नेता अखिलेश यादव जी वहां व्यस्त थे. इसलिए चर्चा के बाद उन्होंने अपने यहां नहीं आ पाने की वजह बताई और हम दोनों को यहां भेजा. इससे पता चलता है कि पूरा इंडिया गठबंधन एकजुट है.”

इस बैठक को लेकर बीजेपी ने इंडिया गठबंधन में एकजुटता पर सवाल उठाए. केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता शिवराज सिंह चौहान ने सवाल किया कि ‘उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं, अखिलेश यादव कहां थे?’

इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, ममता बनर्जी समेत कई शीर्ष नेता मौजूद थे. इसमें दो से आठ अक्तूबर के बीच पूरे देश में ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ निकालने समेत कई अहम फ़ैसले किए गए और गठबंधन में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की गई.

ग़ौरतलब है कि चीफ़ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने भी दो अक्तूबर को जेल भरो आंदोलन का आह्वान किया है. सीजेपी की मुंबई और दिल्ली में प्रदर्शन की योजना है.

इंडिया गठबंधन में क्या फ़ैसले लिए गए?

सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी

दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ़ इंडिया में इंडिया गठबंधन की मीटिंग में सोनिया गांधी, ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ’ब्रायन, कल्याण बनर्जी, तेजस्वी यादव, सुप्रिया सुले, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती, जम्मू-कश्मीर के मौजूदा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह, सीपीआई-एमएल के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, कपिल सिब्बल समेत कई नेता मौजूद थे.

इस बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने की. इसमें लिए गए अहम फ़ैसलों के बारे में खड़गे ने जानकारी दी.

  • 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक ज़िला स्तरीय ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’.
  • 6 अक्तूबर को विपक्षी पार्टियों के सांसद चुनाव आयोग तक मार्च निकालेंगे.
  • विपक्षी पार्टियों के नेता अक्तूबर के दूसरे हफ़्ते में भारत की राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगेंगे.
  • इंडिया गठबंधन पांच बड़ी रैलियां आयोजित करेगा.
  • एक नवंबर को दिल्ली में एक बड़ी रैली होगी, जिसमें ‘वोट चोरी’ से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा.
  • इंडिया गठबंधन की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर से जुड़े सभी मामलों का जल्द से जल्द निपटारा किया जाए.

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी

बैठक के दौरान कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि ‘जो लोग भारतीय लोकतंत्र को नष्ट कर रहे हैं, उन्हें सज़ा दी जाएगी. इससे फ़र्क नहीं पड़ता कि वे कितने वरिष्ठ हैं या वे कौन हैं.’

उन्होंने कहा, “भारतीय लोकतंत्र देश के किसी भी व्यक्ति से बड़ा है. सभी पार्टियों की राय है कि हिंदुस्तान के जो लोकतांत्रिक सिस्टम है, उस पर बीजेपी, नरेंद्र मोदी, अमित शाह, ज्ञानेश कुमार ने आक्रमण किया है. और हम इसे यूं ही नहीं जाने देने वाले हैं. सभी विपक्षी नेता भारतीय लोकतंत्र के सामूहिक रक्षक हैं. एक साथ काम करना हमारे लिए सम्मान की बात है और हमें विश्वास है कि अगले कुछ महीनों में देश में हम कुछ गंभीर बदलाव ले आएंगे.”

राहुल गांधी ने कहा, “कमरे में यह भावना भी है कि विपक्ष भारत के लोगों के बीच यह बात पहुंचाने में काफ़ी सफल रहा है कि चुनावों में चोरी होती है, नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने लोकतंत्र को नष्ट कर दिया है. ख़ासकर युवाओं के बीच विरोध की एक नई भावना पैदा हुई है कि भारत में जो कुछ हो रहा है, वह ग़लत है और इसे रोका जाना चाहिए.”

बैठक के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “असल में चुनाव आयोग के अंदर दो-तीन लोग सिर्फ़ मोहरे हैं, जबकि अमित शाह और नरेंद्र मोदी उन्हें कठपुतली की तरह चला रहे हैं.”

उन्होंने आगे कहा कि इस बैठक में सभी दलों ने इस लड़ाई को एकजुट होकर लड़ने की बात कही.

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और हाल ही में चुनाव आयोग द्वारा दिए गए नए नाम ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की.

उन्होंने कहा, “वोट चोरी करके बीजेपी मध्य प्रदेश, हरियाणा और बिहार में जीती और बंगाल में लूट की. हम सुप्रीम कोर्ट भी जा चुके हैं और सभी दरवाज़े खटखटा चुके हैं.”

ममता बनर्जी ने कहा, “आइए लोकतंत्र को बचाएं और लोगों की सुरक्षा और वोटिंग के अधिकारों को सुरक्षित करें. ये हमारे संवैधानिक अधिकार हैं. लोगों के प्रति हमारी यह ज़िम्मेदारी है.”

“अगर लोग वोट नहीं दे पा रहे हैं, अगर उनके वोट लूटे जा रहे हैं या उनके साथ धोखाधड़ी हो रही है, तो देश किस ओर जाएगा? इसलिए, हमारी गुज़ारिश है. यह हमारी मांग है.”

नेताओं की गैरमौजूदगी पर बीजेपी ने उठाए सवाल

शिवराज सिंह चौहान

दिल्ली में विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद बीजेपी ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कांग्रेस और गठबंधन की आलोचना की.

इंडिया गठबंधन की बैठक को लेकर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “बैठक से पहले ही गठबंधन बिखरा हुआ दिखा. यूपी में चुनाव होने वाले हैं, अखिलेश यादव कहां थे? अगर मुद्दा इतना अहम है तो अखिलेश यादव वहां क्यों नहीं थे?”

उन्होंने कहा, “डीएमके प्रमुख स्टालिन, जेएमएम प्रमुख हेमंत सोरेन और आप के अरविंद केजरीवाल भी नदारद थे. वहीं उद्धव ठाकरे भी वहां नहीं पहुंचे और वर्चुअली जुड़े.”

उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन राहुल गांधी को अपना नेता मानने को तैयार नहीं है.

हालांकि, मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि हेमंत सोरेन और उद्धव ठाकरे ऑनलाइन जुड़े थे और उन्होंने अपनी बात रखी.

केरल बीजेपी के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि इंडिया गठबंधन को देश की कोई वास्तविक चिंता नहीं है.

उन्होंने कहा, “इंडिया गठबंधन की अब कोई प्रासंगिकता नहीं रह गई है. यह मूल रूप से राहुल गांधी को आगे बढ़ाने और उनकी छवि बनाने का माध्यम बन गया है. यहां तक कि पूरी कांग्रेस पार्टी की बात भी नहीं है, बल्कि ख़ास तौर पर राहुल गांधी की बात है. उनका पूरा ध्यान राहुल गांधी को आगे बढ़ाने और उन्हें प्रासंगिक बनाए रखने पर है. गठबंधन की कई पार्टियां अब इससे अलग हो रही हैं. जो पार्टियां अभी इसमें बनी हुई हैं, वे भी आख़िरकार इस बात को समझ जाएंगी.”

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा, “उन्हें सत्ता की भूख है और जब कोई अधिकार का भूखा होता है तो वह बहुत आक्रामक होता है. लेकिन इसका हल हम नहीं दे सकते. इसका हल है जनता का दिल जीतना.”

“सबसे दुर्भाग्य और हैरानी की बात है कि वो डेमोक्रेसी के बारे में बात कर रहे हैं. उन्होंने इमरजेंसी में डेमोक्रेसी को पूरी तरह तबाह किया था. और अभी एक ही परिवार के तीन लोग संसद में हैं. यह वंशवाद है. ये लोग बात करेंगे लोकतंत्र के बारे में?”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS