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इंदौर के एक नौजवान का दिल, लिवर, किडनी और आंखें अब छह ज़िंदगियां बचाएंगीं

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Source :- BBC INDIA

25 साल के गौरव को हेमब्रेज होने के बाद ब्रेन डेड घोषित किया गया था, जिसके बाद उनके माता-पिता ने उनके अंगदान किए

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मध्य प्रदेश में इंदौर में 25 साल के गौरव दवे ने ब्रेन डेड घोषित किए जाने के महज दो महीने पहले अंग दान की इच्छा जताई थी.

ब्रेन डेड घोषित कर दिए जाने के बाद गहरे दुख में डूबी मां कविता दवे को बेटे की दो महीने पुरानी बात याद आई.

बेटे की इसी इच्छा का सम्मान करते हुए परिवार ने अंगदान का फ़ैसला लिया, जिससे छह लोगों को नई ज़िंदगी मिल सकी.

इंदौर के इस नौजवान का दिल, लिवर, किडनी और आंखें अब दूसरे लोगों के काम आएंगी.

मुख्यमंत्री के आदेश पर अंग दान के लिए उन्हें गार्ड ऑफ़ ऑनर के साथ अंतिम विदाई दी गई.

13 जुलाई को ब्रेन हेमरेज के बाद गौरव को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था. कई दिनों तक इलाज चला, लेकिन 26 जुलाई को डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया.

इकलौते बेटे की असमय मौत इस परिवार के लिए सबसे मुश्किल पल था. तब गौरव के पिता और मां उसकी कही वो बात याद कर रहे थे जो घर में आम बातचीत के दौरान उन्होंने कही थी.

एक निजी बैंक में काम करने वाले गौरव के पिता सतीश दवे ने बताया, “लगभग दो महीने पहले हम सब साथ बैठकर खाना खा रहे थे. तभी गौरव ने अपनी मां से कहा था कि अगर उसे कभी कुछ हो जाए तो उसके अंग दान कर दिए जाएं. उस समय किसी ने इस बात पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया था. लेकिन जब डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित किया, तो उसकी मां कविता दवे को बेटे की वही बात याद आई.”

इंदौर में प्रशासन के साथ अंगदान के लिए काम करने वाली सामाजिक संस्था ‘मुस्कान’ के कार्यकर्ता भी तभी इस परिवार से मिले.

उन्होंने अंगदान की पूरी प्रक्रिया समझाकर उन्हें अंगदान के लिए प्रेरित किया. बेटे की इच्छा और संगठन की सलाह के बाद दवे दंपति ने बेटे के अंगदान के लिए सहमति दे दी. इस एक फ़ैसले ने छह लोगों की ज़िंदगी बदल दी.

कास्टिंग डायरेक्टर थे गौरव

सतीश दवे अपने बेटे को खोने के बाद गहरे शोक में हैं मगर उन्हें सुकून है कि बेटे के अंग कई जिंदगियों की उम्मीद बन गए

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अपोलो अस्पताल के डॉ. सुशील जैन ने बताया, “परिवार की सहमति मिलने के बाद राष्ट्रीय प्रोटोकॉल और वेटिंग लिस्ट के आधार पर यह तय किया गया कि ये अंग किन्हें देने हैं.”

उन्होंने बताया कि गौरव दवे का हार्ट अहमदाबाद के एक अस्पताल में भर्ती एक मरीज को ट्रांसप्लांट किया गया.

उनका लिवर इंदौर के एक अस्पताल में भर्ती मरीज को लगाया गया, जबकि दोनों किडनियां इंदौर के ही अस्पताल में भर्ती दो मरीजों को लगाई गईं.

उनकी आंखें भी दो ज़रूरतमंद मरीज़ों को दी गईं. जबकि फेफड़े भी चेन्नई भेजे जाने थे लेकिन लॉजिस्टिक परेशानी की वजह से संभव नहीं हो सका.

इंदौर के खजूरी बाजार के रहने वाले गौरव दवे पेशे से फ़िल्म कास्टिंग डायरेक्टर थे, वे इंदौर के साथ मुंबई में भी काम कर रहे थे.

उनके दोस्त तनय जोशी के मुताबिक़, “गौरव एक मिलनसार और सपने देखने वाला लड़का था. मेरी उससे 17 साल से दोस्ती थी. वो ज़िंदगी में बड़ा आदमी बनना चाहता था और देखिए मौत के बाद अंगदान ने उसे वाकई बड़ा बना दिया. आज सोशल मीडिया पर लोग रील बनाकर उसे याद कर रहे हैं.”

अपने मम्मी-पापा और बहन के साथ गौरव दवे; ब्रेन हेमरेज के बाद उन्हें ब्रेनडेड घोषित कर दिया गया था (फ़ाइल फ़ोटो)

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तनय जोशी ने आगे कहा, “गौरव अपने परिवार का इकलौता बेटा था, तो वो मम्मी-पापा और बहन की जिम्मेदारी निभा रहा था. उसकी मौत से उसका परिवार टूट गया है, उसकी मां रोते-रोते बेहोश हो जाती हैं. उसकी मौत से तीन दिन पहले हमें पता लगा कि अब उसके बचने की उम्मीद नहीं है. तब हमने उसके मम्मी-पापा को अंगदान को लेकर समझाया. उनके अंगदान के फ़ैसले ने उन्हें इस बात का सुकून भी दिया है कि गौरव का एक हिस्सा आज भी कई लोगों के बीच ज़िंदा है.”

दो ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अंग पहुंचाए गए

गौरव को अस्पताल से अंतिम विदाई देते समय फूल बरसाए गए

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ब्रेन डेड हो चुके गौरव के अंगों को समय पर अलग-अलग अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए इंदौर में ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया. प्रशासन, ट्रैफ़िक पुलिस, एयरपोर्ट अथॉरिटी और डॉक्टरों की टीम ने मिलकर पूरी व्यवस्था संभाली.

ट्रांसप्लांट के लिए हृदय को ले जाने अहमदाबाद से एक टीम इंदौर पहुंची. विशेष व्यवस्थाओं के बीच गौरव का हृदय महज 171 मिनट में अहमदाबाद पहुंचाकर प्रत्यारोपित किया गया. इसके लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी, चिकित्सा विशेषज्ञों और प्रशासन ने मिलकर पूरी योजना बनाई.

मानव अंगों को समय पर अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए इंदौर ट्रैफिक पुलिस ने दो ग्रीन कॉरिडोर बनाए.

27 जुलाई की सुबह पहला ग्रीन कॉरिडोर सुबह 8:02 बजे अपोलो अस्पताल से एयरपोर्ट तक बनाया गया, जिसे केवल 13 मिनट में पार किया गया.

दूसरा ग्रीन कॉरिडोर सुबह 9:15 बजे चोइथराम अस्पताल तक बनाया गया, जो 16 मिनट में पूरा हुआ. इस दौरान संबंधित मार्गों पर यातायात पूरी तरह रोक दिया गया ताकि अंगों को बिना किसी बाधा के पहुंचाया जा सके. इंदौर में यह 68वां ग्रीन कॉरिडोर था.

इंदौर शहर में प्रशासन के साथ अंगदान के लिए कार्य करने वाली सामाजिक संस्था मुस्कान के सेवादार जितेंद्र बगानी (जीतू) ने बताया, दस साल में इंदौर में 68 ग्रीन कॉरिडोर बनाए जा चुके हैं.

शहर में करीब 19 हजार नेत्रदान, 1100 से अधिक त्वचा दान और 300 से ज्यादा देहदान हो चुके हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS