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https://www.livehindustan.com/lh-img/smart/img/2026/06/04/1200x900/iok_1780601267559_1780601277357_68eaacdb-9b41-4ba4-95b5-0d29b42ef7dc.jpgराजेश खन्ना की पहली फिल्म थी आखिरी खत। पहली ही फिल्म काफी इमोशनल थी। इतना ही नहीं, इस फिल्म के लिए डायरेक्टर ने राजेश खन्ना को 3 दिन तक सोने नहीं दिया था।
एक एक्टर को अपने किरदार के लिए काफी कुछ करना पड़ता है। कोई बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन करता है तो कोई मेंटली खुद को तैयार करता है। अब हम आपको राजेश खन्ना और उनकी फिल्म आखिरी खत के बारे में बताते हैं। आखिरी खत, राजेश खन्ना की पहली फिल्म थी। इस फिल्म को चेतन आनंद डायरेक्ट कर रहे थे। लेकिन ऐसा क्या हुआ था कि इस फिल्म के शूट के दौरान राजेश 3 दिन तक नहीं सोए थे।
क्यों नहीं राजेश को सोने दिया 3 दिन तक
इस फिल्म को शूट करते वक्त डायरेक्टर ने राजेश खन्ना को 3 दिन तक सोने नहीं दिया था। दरअसल, फिल्म में राजेश का एक ऐसा किरदार था जो परेशान है। राजेश के चेहरे पर असली की थकावट दिखाने के लिए डायरेक्टर आधी-रात को कॉल करके राजेश को जगाया करते थे।
थके हुए लग रहे थे राजेश
डायरेक्टर की ये टेक्नीक काम आ गई थी क्योंकि जब राजेश सेट पर आए तो वह काफी थके हुए थे।
अकादमी अवॉर्ड्स में बेस्ट विदेशी भाषा फिल्म कैटेगरी में हुई थी एंट्री
आखिरी खत फिल्म की बात करें तो इस फिल्म का 1968 में अकादमी अवॉर्ड्स में बेस्ट विदेशी भाषा फिल्म कैटेगरी में एंट्री हुई थी। यह फिल्म द लास्ट लेटर के नाम से नॉमिनेट हुई थी।
राजेश और बच्चे बंटी की पहली फिल्म
इस फिल्म में राजेश खन्ना और मास्टर बंटी बहल को इंट्रोड्यूस करवाया गया था। वहीं 20 साल बाद दोनों का फिल्म अमृत में दादा-पोते का रोल था।
आखिरी खत की क्या थी कहानी
आखिरी खत की कहानी की बात करें तो इसमें एक लड़के गोविंद की कहानी बताई गई है जिसे लज्जो(इंद्राणी मुखर्जी) से प्यार हो जाता है गांव में। दोनों शादी कर लेते हैं और गोविंद फिर शहर में निकल जाता है काम के लिए, यह वादा करते हैं कि वह लज्जो को भी लेकर जाएगा। लेकिन चीजें बदल जाती हैं। लज्जो का बेटा हो जाता है। अब वह एक आखिरी खत लिखती है अपने मरने से पहले गोविंद को कि बेटे का ध्यान रखना।
बच्चे के साथ शूट करना था काफी मुश्किल
इसके बाद दिखाया जाता है कि कैसे वह बच्चा मुंबई की सड़कों पर खो जाता है। वहीं उसका पिता उसे ढूंढता है। इस फिल्म को शूट करना काफी मुश्किल था।
साल 2007 में चेतन आनंद के बेटे केतन ने एक इंटरव्यू में इस फिल्म को लेकर बात करते हुए कहा था, ‘मेरे पिता ने एक मास्टरपीस बनाया था। उन्होंने 15 महीने के बच्चे के साथ शूट किया जो शहर में खो जाता है और उसे कैमरे से फॉलो किया।’
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