Source :- BBC INDIA
इमेज स्रोत, Getty Images
प्रकाशित
पढ़ने का समय: 6 मिनट
ईरान और ओमान ने कहा है कि रणनीतिक तौर पर अहम होर्मुज़ स्ट्रेट से यातायात मैनेज करने के लिए एक नई व्यवस्था पर बातचीत ‘सकारात्मक’ रही है. इससे समुद्री यातायात की बहाली की उम्मीद जगी है.
हाल के दिनों में बातचीत होर्मुज़ के ज़रिए एक संभावित नए मार्ग पर केंद्रित रही हैं. इस नए मार्ग की ज़िम्मेदारी ईरान और ओमान साझा करेंगे.
लेकिन जैसे-जैसे उम्मीद बढ़ी है, ईरान ने सार्वजनिक रूप से कई मांगें रखी हैं. ईरान का कहना है कि होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने से पहले अमेरिका को उनकी कुछ शर्तों को पूरा करना होगा.
इनमें से कई मांगें 17 जून को ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के कुछ हिस्सों से कहीं आगे जाती हैं. बाक़ी कुछ मांगें दोहराई गई हैं लेकिन अब उन्हें होर्मुज़ स्ट्रेट के फिर से खुलने से जोड़ दिया गया है.
तो ये शर्तें क्या हैं? और क्या अमेरिका इन्हें पूरा कर सकता है?
क्या हैं 6 मांगें
ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी पर छपे एक बयान में, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के पूर्व सचिव और सर्वोच्च नेता के वर्तमान सलाहकार मोहम्मद बगेर ज़ोलग़ादर ने चेतावनी दी कि अमेरिका को अपने व्यवहार में सुधार करना होगा और मांगों की एक सूची को पूरा करना होगा.
उनके मुताबिक़ रवैये में सुधार करने के लिए अमेरिका को नीचे दी गई शर्तें पूरी करनी होंगी-
1. ईरान को कभी भी किसी भी भाषा से धमकी न दें और न ही इस ‘राष्ट्र की पवित्रता’ का अपमान करें.
ईरान का कहना है कि अमेरिका को उनके देश को धमकाना बंद करना होगा और यह आश्वासन देना होगा कि भविष्य में ऐसी धमकियां दोबारा नहीं दी जाएंगी.
यह मुख्य रूप से एक राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी मांग है.
हालांकि युद्धविराम में दोनों पक्षों से संयम बरतने की बात निहित होती है, लेकिन भविष्य में ख़तरों के ख़िलाफ़ सार्वजनिक रूप से गारंटी की मांग करना अंतरिम समझौते की पहले बताई गई शर्तों में स्पष्ट रूप से शामिल होने के बजाय एक व्यापक रणनीतिक शर्त लगती है.
2. लेबनान, फ़लस्तीन, यमन और इराक़ में ईरान और उसके सहयोगियों के ख़िलाफ़ युद्ध और आक्रामकता को हमेशा के लिए ख़त्म करें.
ईरान का कहना है कि न केवल ईरान के ख़िलाफ़ बल्कि लेबनान, फ़लस्तीनी, यमन और इराक़ में उसके सहयोगियों और साझेदार समूहों के विरुद्ध भी सैन्य कार्रवाई बंद होनी चाहिए.
जून में हुए समझौते के ज्ञापन में ‘लेबनान सहित सभी मोर्चों’ का ज़िक्र था. यह अन्य देशों का भी ज़िक्र करता है और प्रभावी रूप से व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा गारंटी की मांग करता है.
प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

3. नौसैनिक नाकाबंदी हटाएँ और ईरान के आसपास से अपनी सेनाओं (नौसैनिक और वायु सेना) को वापस बुला लें.
जून में हुए अमेरिका-ईरान समझौते के ज्ञापन के तहत, अमेरिका को 30 दिनों के भीतर अपनी नाकाबंदी ख़त्म करनी थी, लेकिन यह सीधे तौर पर होर्मुज़ स्ट्रेट के फिर से खुलने से जुड़ा नहीं था.
4. दो आक्रामक युद्धों में ईरान को हुए नुक़सान के लिए मुआवज़ा दिया जाए.
इसमें 2025 में हुए 12 दिवसीय युद्ध के साथ-साथ हाल ही में हुई जंग का भी ज़िक्र है. जून में हुए समझौते के ज्ञापन के बाद अंतिम समझौते के हिस्से के रूप में मुआवज़े पर चर्चा होने की उम्मीद थी.
हालांकि, अब तेहरान सार्वजनिक रूप से मुआवज़े को सीधे होर्मुज़ के फिर से खुलने से जोड़ रहा है.
5. ईरान पर लगाए गए ‘क्रूर और अवैध’ प्रतिबंध हटाएँ.
प्रतिबंधों में ढील देने के टाइम टेबल को अंतिम समझौते की दिशा में होने वाली बातचीत का हिस्सा माना जा रहा था. इसलिए ईरान यहां कोई बिल्कुल नया मुद्दा नहीं उठा रहा है.
नया मुद्दा यह है कि प्रतिबंधों में ढील को होर्मुज़ के फिर से खुलने से स्पष्ट रूप से जोड़ा जा रहा है.
6. ईरानी जनता की ज़ब्त और चोरी की गई संपत्तियों को बिना शर्त रिलीज़ किया जाए.
यह मांग कोई नई नहीं है. विदेशों में अवरुद्ध या फ्रीज़ की गई संपत्तियों को रिलीज़ करने पर पहले भी चर्चा हो चुकी है.
इमेज स्रोत, Elke Scholiers/Getty Images
ईरान और अमेरिका का क्या है मानना
ईरान का कहना है कि होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने से पहले इन शर्तों को पूरा किया जाना चाहिए.
बीबीसी के मध्य पूर्व विश्लेषक सेबेस्टियन अशर का कहना है कि यह ईरान के रुख़ में सख़्ती का संकेत है.
उनका कहना है, “ये शर्तें समझौते के ज्ञापन के ढांचे के तहत पहले से ही मौजूद थीं. लेकिन इसका समय और तरीका बिल्कुल अलग लग रहा है.”
उनका कहना है कि तेहरान को शायद लगता है कि होर्मुज़ “अभी भी लगभग बंद है” इसलिए उसकी स्थिति मज़बूत है.
हालांकि, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के वीकेंड कार्यक्रम से बात करते हुए, अमेरिकी विदेश नीति थिंक टैंक क्विंसी इंस्टीट्यूट के कार्यकारी उपाध्यक्ष, त्रिता पारसी का आकलन अलग है.
उन्होंने कहा, “ईरानी खुद जानते हैं कि ये बातें बढ़ा-चढ़ाकर कही गई हैं और वे इनसे पीछे हट सकते हैं. सार्वजनिक स्तर पर जो बातें सामने रखी गई हैं, ज़रूरी नहीं कि बातचीत की मेज़ पर भी वही बातें प्रतिबिंबित हों.”
इमेज स्रोत, US Central Command / X
पारसी का यह भी मानना है कि यह एक बातचीत की रणनीति हो सकती है.
उन्होंने कहा, “ये भी मुमकिन है कि वे इस प्रक्रिया को लंबा खींचने की कोशिश कर रहे हों.” उनका कहना है कि ईरानी शासन के कई कट्टरपंथी तत्वों में यह धारणा है कि ईरान ने जून में समझौता ज्ञापन पर बहुत जल्दी सहमति दे दी थी.
फिर, यह समझौता कुछ ही दिनों तक चला और टूट गया, क्योंकि इस पर हस्ताक्षर होने के कुछ ही दिनों बाद जवाबी हमले फिर से शुरू हो गए.
पारसी का कहना है कि ईरान में कुछ लोगों का तर्क है कि अगर बातचीत को और लंबा खींचा जाता तो राष्ट्रपति ट्रंप शायद ईरानी ठिकानों पर हमले का आदेश इतनी जल्दी नहीं देते.
क्योंकि इस स्थिति में तेल की कीमतें और बढ़तीं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को और नुकसान होता. ज़ाहिर है, ईरान यह ‘ग़लती’ दोबारा नहीं दोहराना चाहता.
इसके बावजूद, उनका अब भी अनुमान है कि होर्मुज़ स्ट्रेट पर समझौता कुछ ही दिनों में हो सकता है.
जो लोग जहाज़ों का इंतज़ार कर रहे हैं या तेल की कीमतों पर नज़र रख रहे हैं, वे उम्मीद कर रहे होंगे कि पारसी का कहना सही हो.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट… सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.
और जानें
शॉर्ट वीडियो
प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
-

वीडियो, झारखंड: विधानसभा की ओर बढ़ रहे स्टूडेंट्स पर पानी की बौछारें, अवधि 0,29
-

वीडियो, मीराबाई चनू गोल्ड मेडल जीतने के बाद क्यों रोईं? पीएम मोदी से बातचीत में बताई वजह, अवधि 0,52
-

वीडियो, होर्मुज़ स्ट्रेट खोलने के बदले ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं ये छह शर्तें, अवधि 1,23
-

वीडियो, अजिंक्य रहाणे, जो लंबे समय तक याद किए जाएंगे, अवधि 1,31
-

वीडियो, इतना लंबा आदमी कि इंची टेप छोटी पड़ जाए…, अवधि 1,13
-

वीडियो, कांवड़ यात्रा में 12 साल की बेटी को लेकर पहुँचे पिता ने क्या बताया?, अवधि 1,26
-

वीडियो, झारखंड में जारी प्रोटेस्ट में एक छात्र ने बताई अपनी तकलीफ़, अवधि 1,16
-

वीडियो, राजस्थान: मूक बधिर बच्चों का विरोध प्रदर्शन, स्कूल के प्रिंसिपल को हटाया गया, अवधि 1,07
-

वीडियो, अतीक़ अहमद के छोटे बेटे की सड़क हादसे में मौत, अवधि 1,07
-

वीडियो, झारखंड: भूख हड़ताल पर बैठे ब्रह्मानंद कुमार कौन हैं?, अवधि 1,26
-

वीडियो, इस बच्चे का डॉक्टरों ने गर्भ में ही कर दिया ऑपरेशन, अवधि 1,22
-

वीडियो, ग़ज़ा में एक साथ दफ़नाए गए 112 लोगों के शव, अवधि 1,00
-

वीडियो, ग्रीसः जंगल की आग से बचने के लिए भागते दिखे घोड़े, अवधि 0,30
-

वीडियो, महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न केस में बृज भूषण सिंह बरी, अवधि 1,04
-

वीडियो, बांकीपुर में प्रशांत किशोर को बढ़त, बीजेपी इतने वोटों से पीछे, अवधि 1,23
शॉर्ट वीडियो का अंत
SOURCE : BBC NEWS



















