Source :- LIVE HINDUSTAN
ऑपरेशन से जन्मे 90 प्रतिशत बच्चों को तुरंत मां का दूध नहीं मिलता है। बाल रोग अकादमी के सर्वे में यह बात सामने आई है। कई बच्चों को पहला दूध जन्म के दो-तीन दिन बाद मिल रहा है, जबकि विशेषज्ञों के मुताबिक ऑपरेशन के बाद भी स्तनपान कराने में देरी नहीं करनी चाहिए।
कानपुर, आशीष दीक्षित
जन्म के बाद वह पहला पल हर मां को हमेशा याद रहता है, जब बच्चे को गोद में लेकर पहली बार स्तनपान कराया जाता है। लेकिन ऑपरेशन से प्रसव के मामले में यही पहला हक कई बच्चों को समय पर नहीं मिल पा रहा। दर्द, टांकों पर असर और कमजोरी के डर से परिवार स्तनपान टाल देते हैं। नतीजा यह कि ऑपरेशन से जन्मे 90 फीसदी शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद मां का दूध नहीं मिल रहा। बाल रोग अकादमी के सर्वे में यह तस्वीर सामने आई है। कई बच्चों को पहला दूध जन्म के दो-तीन दिन बाद मिल रहा है, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य स्थिति में ऑपरेशन के बाद भी स्तनपान कराने में देरी नहीं करनी चाहिए।
एक से सात अगस्त तक चले विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान 550 महिलाओं पर हुए सर्वे में कई भ्रम सामने आए। सामने आया कि 70 फीसदी महिलाएं सर्दी, खांसी या बुखार होने पर स्तनपान कराना बंद कर देती हैं। उन्हें डर रहता है कि बीमारी का असर बच्चे तक पहुंच जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य सर्दी-खांसी जैसी स्थिति में स्तनपान बंद करने की जरूरत नहीं होती। बीमारी और दवाओं के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। इस दौरान बच्चे की एंटी बॉडी और बेहतर होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, छह महीने तक केवल मां का दूध ही पर्याप्त होता है और अलग से पानी देने की जरूरत नहीं होती।
समाज में आज भी कई भ्रांतियां
भारतीय बाल रोग अकादमी के सचिव डॉक्टर शैलेंद्र कुमार गौतम कहते हैं कि स्तनपान को लेकर कई खामियां और भ्रांतियां हैं। सबसे अधिक भ्रम यह है कि ऑपरेशन से हुए बच्चे को तुरंत मां का दूध नहीं पिलाना चाहिए। वहीं खुद को हल्का बुखार, सर्दी-खांसी होने पर स्तनपान नहीं कराना भी बेहद गलत है। बच्चे को जन्म के शुरुआती समय में मिलने वाला पहला दूध बेहद महत्वपूर्ण होता है। छह माह तक केवल स्तनपान कराना चाहिए।
स्तनपान को लेकर सामाजिक और व्यक्तिगत भ्रम भी बड़ी बाधा है। सर्वे में 55 फीसदी महिलाओं को डर था कि स्तनपान कराने से उनकी शारीरिक सुंदरता प्रभावित होगी। वहीं 40 फीसदी महिलाओं का मानना था कि वे खुद ज्यादा दूध पीयेंगी तो बच्चे को भी ज्यादा फायदा होगा। डॉक्टरों का कहना है कि मां का संतुलित और पौष्टिक आहार जरूरी है, लेकिन केवल अधिक दूध पीने से स्तन में दूध की मात्रा स्वत: नहीं बढ़ती।
सर्वे से जुड़े अहम तथ्य
● 550 महिलाओं को सात दिन तक चले सर्वे में शामिल किया।
● 2 से 3 दिन बाद बच्चे को मां को मां का दूध मिल रहा, तुरंत देना चाहिए।
● 70 फीसदी महिलाएं सर्दी, खांसी, बुखार होने पर दूध पिलाना बंद कर देती हैं।
● 55% महिलाओं को स्तनपान कराने से शारीरिक सुंदरता बिगड़ने का डर है।
● 40 फीसदी महिलाओं को भ्रम है कि खुद भी पिएंगे ज्यादा दूध तो बच्चे को फायदा होगा।
● 6 माह की अवधि से पहले ही 60 फीसदी मां अपने बच्चों को पानी देना शुरू कर देती हैं।
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