Source :- LIVE HINDUSTAN
मुख्य बातें
- Cude Price Impacts: BPCL का शेयर NSE पर 286 रुपये पर खुला और गिरकर 277.05 रुपये के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया
- इसमें करीब 3% की गिरावट आई
- वहीं, IOCL का शेयर भी करीब 3% और HPCL का शेयर 3% से ज्यादा टूटा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी हुई है। इसकी तेज आंच का असर भारतीय शेयर बाजार में सरकारी तेल कंपनियों पर दिख रहा है। शुक्रवार दोपहर कारोबार में भारत पेट्रोलियम (BPCL), इंडियन ऑयल (IOCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के शेयर झुलस रहे थे। इनमें बिकवाली देखी गई। सऊदी अरब पर ताजा हमलों के बाद कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। इससे तेल कंपनियों की लागत बढ़ने और मुनाफे पर दबाव आने की चिंता निवेशकों को सता रही है।
BPCL, IOCL और HPCL के शेयरों में कितनी गिरावट?
शुक्रवार को दोपहर के कारोबार में BPCL का शेयर NSE पर 286 रुपये पर खुला और गिरकर 277.05 रुपये के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया। इसमें करीब 3% की गिरावट आई। वहीं, IOCL का शेयर भी करीब 3% और HPCL का शेयर 3% से ज्यादा टूट गया।
114 डॉलर के करीब पहुंचा ब्रेंट क्रूड
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव 114 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल WTI 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। सऊदी अरब पर हमलों और मिडिल ईस्ट में संघर्ष बढ़ने की आशंका से तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ा है।
इस साल अब तक 85% से ज्यादा बढ़ा ब्रेंट क्रूड
ब्रेंट क्रूड की कीमत इस साल अब तक 85% से ज्यादा बढ़ चुकी है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी से भारत जैसी आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ता है। इसका सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ सकता है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चा तेल खरीदकर घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल बेचती हैं।
तेल कंपनियों के शेयर गिरने की 3 बड़ी वजहें
अविनाश मेंटर रिसर्च के संस्थापक अविनाश गोरक्षकर के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियों के शेयरों में गिरावट के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं।
1. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी: ब्रेंट क्रूड 114 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से तेल कंपनियों की खरीद लागत बढ़ने का खतरा है। अगर कंपनियां बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पाती हैं, तो उनके मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है।
2. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं: भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव के साथ तुरंत नहीं बदलतीं। ऐसे में कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद अगर पंप पर ईंधन के दाम स्थिर रहते हैं, तो कंपनियों का मार्केटिंग मार्जिन घट सकता है।
3. रुपये में कमजोरी: गुरुवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 0.4% गिरकर 94.8175 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। कच्चे तेल का आयात डॉलर में होता है। इसलिए रुपये में कमजोरी से तेल खरीदने की लागत और बढ़ जाती है।
मार्केट एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, कच्चे तेल की तेजी और रुपये की कमजोरी का संयुक्त असर सरकारी तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर पड़ सकता है।
कच्चे तेल की हर 1 डॉलर की तेजी का कितना असर?
जेएम फाइनेंशियल के एक पुराने आकलन के मुताबिक, करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कच्चे तेल की कीमत में हर 1 डॉलर की बढ़ोतरी से ऑटो-फ्यूल ग्रॉस मार्केटिंग मार्जिन पर लगभग 0.55 रुपये प्रति लीटर का दबाव पड़ सकता है। रिपोर्ट में कंपनियों के कंसोलिडेटेड EBITDA पर 7-9% तक असर का अनुमान भी दिया गया था।
हालांकि, यह आकलन उस समय की परिस्थितियों और मान्यताओं पर आधारित था। इसे मौजूदा कीमतों पर होने वाले निश्चित नुकसान के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
IOCL, BPCL और HPCL के अहम प्राइस लेवल
चॉइस ब्रोकिंग के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुमीत बगाड़िया के मुताबिक, तीनों सरकारी तेल कंपनियों के शेयर फिलहाल एक निश्चित दायरे में कारोबार कर रहे हैं।
- IOCL: 120 से 132 रुपये
- BPCL: 275 से 300 रुपये
- HPCL: 325 से 355 रुपये
उनके मुताबिक, इन दायरों से ऊपर या नीचे निर्णायक ब्रेकआउट मिलने पर शेयरों की अगली दिशा का संकेत मिल सकता है। ये तकनीकी स्तर हैं, निश्चित लक्ष्य या गारंटीकृत भाव नहीं।
निवेशक क्या करें? शेयर बेचें या होल्ड करें?
एक्सपर्ट्स ने कच्चे तेल की तेजी के कारण घबराहट में बिकवाली करने से बचने की सलाह दी है। उनका कहना है कि मौजूदा गिरावट में मिडिल ईस्ट का तनाव और बाजार की नकारात्मक धारणा अहम भूमिका निभा रहे हैं। अगर क्षेत्र में तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो इन शेयरों में रिकवरी संभव है।
(डिस्क्लेमर: यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले सूझ-बूझ के साथ फैसला करें या फाइनेंशियल एडवायजर से सलाह ले लें। लाइव हिन्दुस्तान इस आधार पर शेयरों को खरीदने और बेचने की सलाह नहीं देता है।)
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