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कच्चे तेल के दाम में गिरावट, मार्जिन में सुधार…अब पेट्रोल-डीजल पर मिलेगी राहत?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अगर सबकुछ ठीक रहा तो एक बार फिर से पेट्रोल और डीजल के दाम घट सकते हैं। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखी जा रही है। इस गिरावट का फायदा सरकारी तेल कंपनियों को मिल रहा है। जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि फ्यूल मार्केटिंग मार्जिन में सुधार हो रहा है। हालांकि, बढ़ते कर्ज और फ्यूल टैक्स को लेकर अनिश्चितता इस क्षेत्र की लंबी अवधि की कमाई की संभावनाओं को सीमित कर सकती है।

क्या है रिपोर्ट में अनुमान?

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी रिफाइनरियों और रिटेल फ्यूल सेलर के पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर ज्वाइंट मार्जिन अब हाल के पश्चिम एशिया संघर्ष से पहले के स्तर से ऊपर है। इसका कारण कच्चे तेल की कम कीमतें और केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कटौती है। जेपी मॉर्गन ने कहा, ”पेट्रोल और डीजल पर पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों के ज्वाइंट मार्जिन के लिए हमारे अनुमान अब युद्ध-पूर्व स्तर से अधिक हैं। एलपीजी पर नुकसान अब भी अधिक है लेकिन जल्द ही तेल की कीमतों के साथ इसमें भी कमी आनी चाहिए।” रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कमाई पर असर पड़ सकता है लेकिन दूसरी तिमाही में लाभ बेहतर होना चाहिए।

जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट में कहा गया, ”मार्जिन में इस सुधार को लेकर हमारे उत्साह को दो बातें सीमित करती हैं। पिछले कुछ महीनों में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर काफी कर्ज चढ़ा है। इससे मूल्यांकन प्रभावित हुआ है और लाभ का एक बड़ा हिस्सा उत्पाद शुल्क में कटौती के कारण है। हो सकता है कि सरकार कुछ समय के लिए टैक्स कम रखे, जिससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियां कर्ज चुका सके। हालांकि, भविष्य में उत्पाद शुल्क बढ़ने का जोखिम बना हुआ है।”

किन कंपनियों को ज्यादा फायदा?

जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने मार्च में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में प्रति लीटर 10 रुपये की कटौती की थी ताकि खुदरा कीमतों में तुरंत बढ़ोतरी न हो। जब वैश्विक तेल की कीमतें युद्ध से पहले के स्तर पर आ जाएंगी और स्थिर हो जाएंगी, तो शुल्क को फिर से लगाया जा सकता है। तेल की कीमतें अगर कम होती रहती हैं तो कुछ कंपनियों को निकट भविष्य में सबसे अधिक लाभ होने की उम्मीद है। ब्रोकरेज कंपनी का अनुमान है कि भारत पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल के लिए मौजूदा संयुक्त पेट्रोल और डीजल मार्जिन संघर्ष से पहले के स्तर से अधिक है जबकि एचपीसीएल के मार्जिन काफी हद तक तेल की कीमतों में हाल के उछाल से पहले के स्तर पर या उससे ऊपर आ गए हैं।

अगर कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहती हैं और रिफाइनिंग मार्जिन ऊंचा बना रहता है, बेहतर मार्जिन दूसरी तिमाही से कमाई को सहारा दे सकता है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में हाल की गिरावट के कारण पहले के बचे माल भंडार के स्तर पर नुकसान की वजह से पहली तिमाही की कमाई पर दबाव बने रहने की संभावना है। हालांकि, एलपीजी पर नुकसान अब भी काफी है लेकिन तेल की कम कीमतों का असर इस क्षेत्र पर पड़ने से नुकसान कम होने की उम्मीद है।

बता दें कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने से वैश्विक तेल की कीमतों में उछाल आया लेकिन देश में पेट्रोल पंप पर फ्यूल की खुदरा कीमतें काफी हद तक स्थिर रहीं। इसमें वृद्धि जरूरी बढ़ोतरी के मुकाबले बहुत कम रही। मई में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद भी, पेट्रोल पंप पर ईंधन के दाम लागत से कम थे।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN