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गरीबी से बेहाल पाकिस्तान को महंगा पड़ेगा ‘मक्का पैक्ट’, हूतियों पर कर दी स्ट्राइक, मिलेगा जवाब?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

पाकिस्तान को मक्का डिफेंस पैक्ट महंगा पड़ता हुआ नजर आ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी अरब पर हूतियों की तरफ से होते हमले के बीच पाकिस्तान एयरफोर्स एक्टिव हुई है। पाकिस्तानी फाइटर जेट्स ने हूतियों पर बमबारी की है। हालांकि, इस्लामाबाद ने इन बातों को खारिज किया है।

पश्चिम एशिया की जंग में शांति दूत बनने की कोशिश कर रहा पाकिस्तान अब इसमें कूद गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मक्का डिफेंस पैक्ट के चलते पाकिस्तानी फाइटर जेट्स का इस्तेमाल हूती विद्रोहियों के ऊपर हमला करने के लिए किया गया है। बता दें, सऊदी अरब के ऊपर यमन के हूती लगातार हमला कर रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान के ऊपर लगातार इस बात का दबाव था कि वह मक्का पैक्ट का सम्मान करते हुए सऊदी अरब की सैन्य तरीके से मदद करे। रिपोर्ट्स के मुताबिक हूती विद्रोहियों पर पाकिस्तानी फाइटर जेट्स के इस्तेमाल के अलावा करीब 8000 पाकिस्तानी सैनिक भी सऊदी अरब की सुरक्षा में तैनात हैं।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सऊदी अरब में तैनात एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि हूतियों पर हमला करने के लिए पाकिस्तानी एयरफोर्स का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, पाकिस्तान या सऊदी अरब की तरफ से इस तरह की कोई सूचना जारी नहीं की गई थी। पाकिस्तानी सेना ने तो न्यूयॉर्क टाइम्स की इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि उसके फाइटर जेट्स का इस्तेमाल नहीं किया गया है। पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता ने इस रिपोर्ट को झूठी और बनावटी करार दिया है।

दरअसल, हूती विद्रोहियों को लेकर पाकिस्तान हमेशा से ही असमंजस की स्थिति में रहा है। क्योंकि हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है। पश्चिम एशिया की जंग में शांति दूत बनने की कोशिश कर रहा पाकिस्तान लगातार सीधे युद्ध में उतरने से बचने की कोशिश कर रहा है। अगर वह हूतियों पर हमला करता है, तो सऊदी अरब को तो साध लेगा। लेकिन ईरान को नाराज कर देगा। वर्तमान में पाकिस्तान की सीमा पर ईरान की एक ऐसा देश है, जिसके साथ उसके संबंध थोड़ी बेहतर स्थिति में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान बड़ी मात्रा में ईरानी तेल को भी जमीन के रास्ते निकालता है। इससे उसकी अर्थव्यवस्था को मदद मिलती है। गरीबी से बेहाल पाकिस्तान के लिए ईरान से दुश्मनी लेना, कहीं से भी सही नहीं रहेगा।

सऊदी अरब में तैनात हैं 8000 पाकिस्तानी फौजी

पाकिस्तान ऐतिहासिक रूप से अपने सैनिकों को पैसे के लिए दूसरे देशों में भेजता रहा है। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने इस्लामिक नाटो की परिकल्पना सामने रखते हुए। सऊदी अरब के साथ मक्का पैक्ट कर लिया। उस समय यह सैन्य समझौता करते हुए पाकिस्तान की सत्ता ने सोचा भी नहीं होगा कि यह इतने जल्दी उनका इम्तिहान लेने आ जाएगा। कुछ ही महीनों के बाद अमेरिका की सेना ने ईरान पर हमला कर दिया। तेहरान ने पलटवार करते हुए सऊदी अरब और यूएई समेत पश्चिम एशिया के बाकी देशों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान की परेशानी बढ़ गई।

सऊदी अरब और ईरान के बीच में तो एक कथित शांति समझौता हो गया। लेकिन हूति विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर हमला करना जारी रखा। अमेरिका और इजरायल ने भी हूतियों को खत्म करने की कोशिश की, लेकिन जमीन पर लड़ने में माहिर इन लड़ाकों का जवाब किसी के पास नहीं था। रिपोर्ट्स के मुताबिक अलाम यह है कि जब सऊदी अरब ने हूतियों के खात्मे के लिए अमेरिका से संपर्क साधा, तो ट्रंप ने इससे इनकार कर दिया।

हूतियों पर हमला करने का पाकिस्तान को मिलेगा जवाब?

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है कि हूति विद्रोहियों पर हमला करने के लिए पाकिस्तानी फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन पाकिस्तानी सेना की तरफ से इससे इनकार किया गया है। हालांकि, सऊदी अरब में 8000 तक पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती है। अभी तक इस मामले में हूति विद्रोहियों की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है। लेकिन अगर हूतियों की तरफ से इस बात की पुष्टि की जाती है कि पाकिस्तानी एयरफोर्स ने उन पर बम बरसाए हैं। तो शांति दूत बनने की कोशिश कर रहे इस्लामाबाद के लिए यह एक बड़ी मुसीबत होगी। क्योंकि, हूती ईरान के समर्थक हैं। ऐसे में बाब अल मंडेब से लेकर होर्मुज तक पाकिस्तान की परेशानी बढ़ सकती है। इसके अलावा शांति दूत बनकर इस्लामिक दुनिया का मसीहा बनने का उसका सपना भी टूट सकता है।

पाकिस्तान के सामने यमन में युद्ध में उतरने का डर पुराना है। चूंकि सऊदी अरब के साथ इस्लामाबाद इस्लाम के नाते अपना संबंध जोड़ता है, दूसरी तरफ रियाद भी उसे यमन के खिलाफ युद्ध में जाने के लिए कहता रहता है। 2015 में इन्हीं हालातों से बचने के लिए पाकिस्तानी संसद द्वारा इस बात पर सहमति बनाई गई थी कि पाकिस्तानी सेना को सऊदी अरब-यमन युद्ध से दूर रखा जाए। लेकिन अब मक्का पैक्ट के होने के बाद पाकिस्तान की स्थिति बदल गई है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN