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गोल्ड लोन लेने वालों पर बढ़ रहा दबाव, इन 2 फाइनेंस कंपनियों ने जताई चिंता

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • अगस्त 2026 में बैंकों का गोल्ड लोन साल-दर-साल 83% बढ़कर 5.6 लाख करोड़ रुपये हो गया
  • वहीं, NBFC के गोल्ड लोन 69% बढ़कर 3.6 लाख करोड़ रुपये हो गए
  • बजाज फाइनेंस ने अब शॉर्ट-टर्म गोल्ड देना बंद कर दिया है

भारत के बड़े नॉन-बैंक लेंडर बजाज फाइनेंस और पिरामल फाइनेंस ने सोने के बदले लोन यानी गोल्ड लोन लेने वाले ग्राहकों में शुरुआती दबाव के संकेत दिए हैं। पिछले एक साल में सोना गिरवी रखकर कर्ज लेने का चलन तेजी से बढ़ा है। हालांकि, अभी इस सेगमेंट में डिफॉल्ट का स्तर कम है, लेकिन कुछ ग्राहकों के भुगतान में देरी ने कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में बैंकों का गोल्ड लोन सालाना आधार पर 83% बढ़कर 5.6 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) का गोल्ड लोन 69% बढ़कर 3.6 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। बैंक और NBFC सोने के बदले मिलने वाली सुरक्षा के कारण इन कर्जों को अपेक्षाकृत सुरक्षित मानते हैं।

गोल्ड लोन में शुरुआती दबाव के अलावा ब्रोकरेज हाउसों ने बजाज फाइनेंस के लिए कुछ और जोखिम भी गिनाए हैं, जैसे बढ़ती महंगाई, RBI के रिवॉल्विंग क्रेडिट पर संभावित सख्त कदम और बीमा नियामक के कमीशन नियम सख्त होना, इनमें शामिल हैं।

बजाज फाइनेंस के गोल्ड लोन में बढ़ा दबाव

बजाज फाइनेंस ने जुलाई-सितंबर तिमाही के नतीजों में बताया कि 30 दिन से ज्यादा समय से बकाया कर्ज से जुड़ी उसकी स्टेज-2 और स्टेज-3 एसेट्स में पिछली तिमाही के मुकाबले 15 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई। कंपनी के मुताबिक, इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह कम अवधि वाले गोल्ड लोन रहे हैं। कंपनी ने अब ऐसे शॉर्ट-टर्म गोल्ड लोन देना बंद कर दिया है।

बजाज फाइनेंस का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो करीब 24,000 करोड़ रुपये का है। हालांकि, कंपनी का कंसोलिडेटेड मुनाफा सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर करीब 30% बढ़ा। इसके बावजूद गोल्ड लोन की गुणवत्ता और ग्राहकों की भुगतान क्षमता पर नजर रखी जा रही है।

पीरामल फाइनेंस ने भी जताई चिंता

पीरामल फाइनेंस के सीईओ जयराम श्रीधरन ने एनालिस्ट्स के साथ बातचीत में कहा कि गोल्ड लोन में तेजी से बढ़ोतरी जोखिम का उभरता हुआ सेक्टर है। उनके मुताबिक, कंपनी के करीब 35% ग्राहकों के पास किसी दूसरी वित्तीय संस्था से भी गोल्ड लोन है।

श्रीधरन ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में उद्योग स्तर पर करीब 4.7 लाख करोड़ रुपये के गोल्ड लोन ऐसे ग्राहकों को दिए गए, जिनके दूसरे कर्ज 90 दिनों से ज्यादा समय से बकाया थे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी ग्राहक के पास गोल्ड लोन होना अपने आप में उसके ज्यादा जोखिम वाला कर्जदार होने का संकेत नहीं है। फिर भी ऐसे आंकड़ों पर नजर रखना जरूरी है। पीरामल फाइनेंस ने सितंबर तिमाही में 545 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि से 66% ज्यादा है।

गोल्ड लोन मार्केट पर क्यों बढ़ी नजर

गोल्ड लोन को आमतौर पर सुरक्षित कर्ज माना जाता है, क्योंकि इसके बदले ग्राहक अपना सोना गिरवी रखते हैं, लेकिन अगर ग्राहक समय पर भुगतान नहीं कर पाते हैं, तो कर्जदाता के लिए जोखिम बढ़ सकता है। कई संस्थानों से कर्ज लेने वाले ग्राहकों के मामले में यह जोखिम और महत्वपूर्ण हो जाता है।

इनपुट: रॉ

SOURCE : LIVE HINDUSTAN