Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान ने अमेरिका के लड़ाकू विमान को मार गिराया गया था। हालांकि विमान के 2 क्रू मेंबर्स बाहर निकलने में सफल रहे थे। इनमें से एक पायलट को तुरंत बचा लिया गया था, जबकि दूसरे पायलट की तलाश में अमेरिका ने ईरान में उतरकर दिन-रात एक कर दिया था।

ईरान और अमेरिका के बीच हालिया जंग को लेकर रोजाना नए खुलासे हो रहे हैं। अब एक रिपोर्ट में इस युद्ध में चीन की भूमिका को लेकर बड़ा दावा किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक 3 महीने से जारी जंग में एक तरफ जहां ड्रैगन खुद को एक शांति दूत के रूप में पेश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह पर्दे के पीछे बड़ा खेल खेल रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले महीने ईरान ने जिस अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया था, उसपर किसी साधारण मिसाइल से नहीं, बल्कि एक चीनी मिसाइल से हमला किया गया था।

अमेरिकी न्यूज आउटलेट एनबीसी न्यूज ने अपनी इस रिपोर्ट में कई दावे किए हैं। जानकारी के मुताबिक ईरान ने अमेरिकी फाइटर जेट को मार गिराने के लिए चीन में बनी, MANPADS मिसाइल का इस्तेमाल किया था। यह भी दावा है कि इस युद्ध में चीन शुरुआत से ही पर्दे के पीछे से ईरान को अत्याधुनिक सैन्य मदद पहुंचा रहा है। चीन ने तेहरान को चोरी-छिपे स्टील्थ एयरक्राफ्ट टेक्नोलॉजी और लॉन्ग-रेंज रडार सिस्टम भी दिए हैं। जानकारों की मानें तो इसी चीनी रडार तकनीक की मदद से ईरान की सेना अमेरिका के सबसे आधुनिक और अचूक माने जाने वाले ‘F-15E स्ट्राइक ईगल’ लड़ाकू विमान को ट्रैक करने और उसे मार गिराने में कामयाब रही।

क्या थी घटना?

ईरान ने युद्ध के बीच अप्रैल महीने की शुरुआत में अमेरिका के ‘एफ-15ई स्ट्राइक ईगल’ को देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में मार गिराया गया था। तब विमान के चालक दल के दो सदस्य बाहर निकलने में सफल रहे थे। इनमें से एक पायलट को तुरंत बचा लिया गया था, जबकि दूसरे पायलट की तलाश में अमेरिका ने ईरान में उतरकर दिन-रात एक कर दिया। पेंटागन ने पायलट को बचाने के लिए 36 घंटे का एक सर्च ऑपरेशन चलाया। वहीं ईरानी सेना ने बचने के लिए पायलट एक पहाड़ी में छिप गया था। दो दिन बाद अमेरिका सेना ने उसे सुरक्षित एयरलिफ्ट कर लिया था।

अमेरिका के लिए था झटका

भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सर्च ऑपरेशन को ऐतिहासिक बताया हो लेकिन अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक यह घटना बेहद गंभीर थी। पिछले कई दशकों में संभवतः यह पहला मौका था जब अमेरिका का कोई अत्याधुनिक फाइटर जेट दुश्मन के हमले का शिकार होकर आसमान से गिरा था। इसे अमेरिका की साख पर वार माना गया था।

चीन खेल रहा दोहरा खेल?

यह खबर ऐसे समय में सामने आई है जब डोनाल्ड ट्रंप हाल ही में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने खुद चीन पहुंचे थे। ट्रंप ने एक इंटरव्यू में यह भी कहा था कि चीनी राष्ट्रपति ने उन्हें खुद भरोसा दिया है कि वे ईरान को कोई हथियार नहीं भेजेंगे। लेकिन हालिया रिपोर्ट अलग हकीकत दिखा रही है। रिपोर्ट में दावा है कि चीन आने वाले दिनों में भी ईरान को मिलिट्री सपोर्ट देता रहेगा और इसके लिए विकल्पों पर विचार कर रहा है। हालांकि चीन ने सार्वजनिक रूप से ऐसे आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि वह क्षेत्रीय शांति का समर्थन करता है।

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