Source :- LIVE HINDUSTAN
इजरायल में जारी चुनाव में समर्थन के लिए नेतन्याहू ने ट्रंप से समर्थन बढ़ाने की अपील की है। ट्रंप इससे पहले ही इजरायली लोगों को सार्वजनिक रूप से अपना संदेश दे चुके हैं। इसमें उन्होंने कहा था कि अगर नेतन्याहू हारते हैं, तो दोनों देशों के संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है।
इजरायल इस समय चुनाव के दौर से गुजर रहा है। सबसे लंबे समय तक यहूदी देश के प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड रखने वाले नेतन्याहू एक बार फिर इस दौड़ में शामिल हैं। लेकिन पिछले कई चुनावों की तरह इस बार भी उन्हें अपनी पार्टी और गठबंधन की जीत पर भरोसा नहीं है। ऐसे में एक बार फिर से वह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सहारे की उम्मीद कर रहे हैं। ट्रंप एक बार पहले ही नेतन्याहू के समर्थन में इजरायली जनता से अपील कर चुके हैं।
एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस अपील के बाद भी नेतन्याहू को जीत से पिछड़ने का डर सता रहा है। इसी को लेकर नेतन्याहू ने पिछले तीन दिनों में ट्रंप से दो बार फोन पर बात करके सपोर्ट करने की मांग की है। रिपोर्ट में इस मामले की जानकारी रखने वाले एक अमेरिकी सूत्र और नेतन्याहू के इन प्रयासों से वाकिफ एक इजरायली सूत्र का हवाला दिया गया है। अमेरिकी सूत्र ने बताया कि व्हाइट हाउस ने नेतन्याहू की इस कोशिश को “हताशा की निशानी” के रूप में देखा है। इससे संकेत मिलता है कि इजरायली प्रधानमंत्री को लग रहा है कि वे चुनावी दौड़ में पीछे चल रहे हैं।
नेतन्याहू ने ट्रंप से किसी प्रकार के समर्थन की मांग नहीं की- लिकुड पार्टी प्रवक्ता
बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के प्रवक्ता से जब इस बारे में बात की गई, तो उन्होंने इससे साफ इनकार किया। प्रवक्ता नेटा मोल्चो ने इस बात से इनकार किया कि प्रधानमंत्री ने ट्रंप से “हाल के दिनों में या उनके समर्थन वाले बयान से पहले” कोई मदद मांगी थी। व्हाइट हाउस ने इस पर टिप्पणी करने के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया।
ट्रंप पहले ही कर चुके हैं नेतन्याहू का समर्थन
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही इजरायली चुनाव में अपना समर्थन नेतन्याहू को दे चुके हैं। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर नेतन्याहू के सपोर्ट में अपनी बात रखी थी, जिसमें उन्होंने इजरायली लोगों के लिए इसे एक चेतावनी के तौर पर कहा कि अगर नेतन्याहू चुनाव हार जाते हैं, तो इसका असर दोनों देशों के रिश्तों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, रिपोर्ट की मानें तो, इसके बाद भी नेतन्याहू ने ट्रंप से और समर्थन करने के लिए कहा है। इजरायली सूत्र ने ‘एक्सियोस’ को बताया कि उन्होंने सुझाव दिया था कि ट्रंप इजरायली पत्रकारों से फोन पर बात करें और चुनाव अभियान के लिए अपना समर्थन जताएं।
बता दें, इसी दौरान इजरायली प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी को भी फोन किया था। हालांकि, इस बातचीत के बाद पीएम मोदी की तरफ से इजरायली चुनाव के लिए किसी तरह का संदेश जारी नहीं किया गया।
यह पहली बार नहीं है जब नेतन्याहू चुनाव में विदेशी नेताओं के साथ अपने संबंधों को दिखा रहे हैं। इससे पहले भी हुए चुनाव में उन्होंने इजरायल की इमारतों पर पीएम मोदी, ट्रंप और अन्य नेताओं के साथ अपनी पोस्टर लगवा दिए थे।
नेतन्याहू की क्या है परेशानी?
नेतन्याहू के डर की सबसे बड़ी वजह चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में सामने आए आंकड़े हैं। इन तीनों के अनुमानों के अनुसार, 120 सदस्यों वाली संसद (नेसेट) में नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत के आंकड़े से काफी पीछे रह जाएगा। सर्वेक्षणों में नेतन्याहू के गुट को 50 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है, जो उनके मौजूदा गठबंधन के पास मौजूद सीटों की संख्या से 17 कम है। उनकी लिकुड पार्टी, जिसके पास अभी 32 सीटें हैं, उसके केवल 20 सीटें जीतने का अनुमान है।
हालाँकि, नेतन्याहू का समर्थन करने वाले चैनल 14 का अनुमान अन्य नेटवर्कों से अलग है। सप्ताह की शुरुआत में जारी एक सर्वेक्षण में, इसने नेतन्याहू के गुट के लिए 60 और लिकुड के लिए 30 सीटों का अनुमान लगाया था।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN




