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जिस चीन पर पाकिस्तान को था भरोसा, उसी ने बना ली दूरी; इस मोहभंग की वजह क्या?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

लाइव हिन्दुस्तान, इस्लामाबाद
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पाकिस्तान की बिजली कंपनी के निजीकरण की दौड़ से चीनी कंपनी बाहर हो गई है। चीन की कंपनी के इस कदम को पाकिस्तान के पावर सेक्टर में चीनी दिलचस्पी से जोड़कर देखा जा रहा है। जानें पूरा मामला और इसकी वजह।

पाकिस्तान की बिजली कंपनी पर चीन की नजर थी, फिर क्या हुआ? डील के अगले चरण से चीनी कंपनी बाहर

पाकिस्तान की बिजली कंपनी पर चीन की नजर थी, फिर क्या हुआ? डील के अगले चरण से चीनी कंपनी बाहर

पाकिस्तान और चीन की करीबी दोस्ती जगजाहिर है। लेकिन अब इसमें दरार पड़ती नजर आ रही है। चीन ने पाकिस्तान के बिजली क्षेत्र अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। दरअसल चीन की एक कंपनी पाकिस्तान की बड़ी बिजली वितरण कंपनी ‘फैसलाबाद इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी’ (FESCO) के निजीकरण की दौड़ से बाहर हो गई है। जो कंपनी बाहर हुई है वह चीन की सरकारी कंपनी पावरचाइना की एक सहायक कंपनी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब पाकिस्तान अपनी सरकारी बिजली वितरण कंपनियों में निजी निवेश लाने की कोशिश कर रहा है। Nikkei Asia ने इस घटनाक्रम को पाकिस्तान के पावर सेक्टर में चीन की घटती दिलचस्पी के संकेत के तौर पर देखा है।

FESCO की डील में क्या हुआ?

पाकिस्तान सरकार ने FESCO के निजीकरण के लिए घरेलू और विदेशी निवेशकों से रुचि पत्र यानी EOI मांगे थे। सरकार 51 से 100 फीसदी तक हिस्सेदारी के साथ कंपनी का मैनेजमेंट कंट्रोल निजी निवेशकों को देने की योजना पर काम कर रही है।

FESCO के लिए कुल 12 निवेशकों ने EOI जमा किए थे। इनमें तीन कंपनियां तुर्किये की, एक चीन की और आठ पाकिस्तानी निवेशक या समूह शामिल थे। चीनी पक्ष के तौर पर जियांग्शी इलेक्ट्रिक पावर कंस्ट्रक्शन ने रुचि दिखाई थी। यह PowerChina समूह से जुड़ी कंपनी है।

शुरुआत में यह चीन की भागीदारी पाकिस्तान के बिजली वितरण क्षेत्र में एक अहम कदम मानी जा रही थी। लेकिन अगस्त के अंत में तस्वीर बदल गई। पाकिस्तान की निजीकरण आयोग बोर्ड ने FESCO के लिए 10 कंपनियों को प्री-क्वालिफाई किया, जबकि जियांग्शी इलेक्ट्रिक पावर कंस्ट्रक्शन उनमें शामिल नहीं थी।

चीनी कंपनी क्यों बाहर हुई?

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