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झारखंड में कथित परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज़ થયા

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झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) अपने नवीनतम संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताओं के आरोपों के बाद तीखी आलोचना के घेरे में आ गया है। पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं और परीक्षा प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग उठ रही है। यहां बताया गया है कि यह संकट कैसे सामने आया और फिलहाल स्थिति क्या है।

## आक्रोश की वजह: विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

**19 अप्रैल, 2026** को JPSC ने 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम जारी किए। इसके तुरंत बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन किया और कई चिंताएं उठाईं:

– परिणामों के साथ कट-ऑफ अंक जारी नहीं किए गए।
– मेरिट सूची पर अधिकृत संवैधानिक सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे।
– अधिकारियों पर आरोप लगा कि उन्होंने कुछ अभ्यर्थियों को योग्य घोषित कर दिया, जबकि उनके उत्तरों का पैटर्न इसके विपरीत संकेत देता था—जैसे एक अभ्यर्थी ने कथित तौर पर केवल लगभग 48 प्रश्नों के उत्तर दिए, फिर भी करीब 144 बताए जा रहे मानक को पार कर लिया।

इन आरोपों से परीक्षार्थियों का अविश्वास बढ़ा और व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।

## विरोध प्रदर्शन का विस्तार: छात्रों, नेताओं और विपक्ष ने कार्रवाई की मांग की

BJP और उसके युवा संगठन BJYM के नेतृत्व में सैकड़ों अभ्यर्थियों तथा राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने रांची में प्रदर्शन किया। प्रमुख प्रदर्शनों में JPSC कार्यालय और कांग्रेस मुख्यालय के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने, मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और सभी विवादित परीक्षाओं की जांच की मांग की।

BJP नेताओं ने JMM-कांग्रेस गठबंधन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर निष्पक्षता सुनिश्चित करने और जनता का भरोसा बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया। इसके जवाब में सरकार ने मामला Crime Investigation Department (CID) को सौंप दिया और आरोपों की जांच के लिए Special Investigation Team (SIT) का गठन किया।

## CID की कार्रवाई: गिरफ्तारियां, छापेमारी और परीक्षाएं स्थगित

**22 जुलाई, 2026** को CID ने प्रमुख अधिकारियों के घरों, JPSC कार्यालयों और परीक्षा एजेंसियों से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें शामिल हैं:

– **Shweta Kumari Gupta**, परीक्षा उपनियंत्रक;
– **Ramveer Singh**, TSR Data Processing Private Limited के निदेशक;
– तथा तीन अन्य व्यक्ति।

इन लोगों के खिलाफ Bharatiya Nyaya Sanhita और **Jharkhand Competitive Examination (Measures for Prevention and Remedy of Unfair Means in Recruitment) Act, 2023** की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए।

उसी दिन JPSC ने **25-27 जुलाई** से निर्धारित मुख्य (लिखित) परीक्षा स्थगित कर दी। इसमें 2023 और 2025 की लंबित परीक्षाएं भी शामिल थीं। आयोग ने इसके लिए “अपरिहार्य कारणों” का हवाला दिया।

## नेतृत्व पर असर और बढ़ता राजनीतिक दबाव

विरोध के बीच JPSC के अध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव **L. Khiangte** ने इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा CID की छापेमारी के बाद सामने आया। सरकार ने इस्तीफे की पुष्टि की, लेकिन BJP नेताओं ने बाद में दावा किया कि विरोध के दबाव में उनसे इस्तीफा लिया गया, जिससे व्यवस्था में गहरे संकट को लेकर अटकलें और तेज हो गईं।

विपक्षी दलों, विशेष रूप से BJP, ने जांच केंद्रीय एजेंसी यानी CBI को सौंपने की मांग की। उनका तर्क था कि राज्य की एजेंसियां प्रभावित हो सकती हैं। छात्र संगठनों ने न्याय, परीक्षाएं रद्द करने और पक्षपातपूर्ण प्रक्रियाओं को समाप्त करने की मांग को लेकर नारे लगाए।

## मूल समस्या: यह अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि एक सिलसिला है

यह पहली बार नहीं है जब झारखंड में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाएं सवालों के घेरे में आई हैं। बार-बार सामने आने वाले विवादों में शामिल हैं:

– प्रश्नपत्र लीक
– परिणाम घोषित करने में देरी
– गलत उत्तर कुंजी
– साक्षात्कार अंकों को लेकर विवाद
– आरक्षण से जुड़े कानूनी विवाद

पहले के मामलों में 2023 में Jharkhand Staff Selection Commission (JSSC) की आबकारी सिपाही परीक्षा भी शामिल है, जिसमें कथित प्रश्नपत्र लीक और अनियमितताओं के आरोप में 159 अभ्यर्थियों तथा अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

आलोचकों का कहना है कि बार-बार सामने आ रही इन समस्याओं ने झारखंड की भर्ती व्यवस्था पर भरोसा कमजोर कर दिया है। कई लोग केवल अलग-अलग परीक्षाओं की जांच नहीं, बल्कि व्यापक सुधारों की मांग कर रहे हैं।

## आगे क्या: दावे, मांगें और संभावित परिणाम

प्रदर्शनकारियों की मांगों में शामिल हैं:

– त्रुटिपूर्ण प्रारंभिक परीक्षा रद्द करना
– सभी विवादित भर्ती परीक्षाओं की CBI या किसी समकक्ष केंद्रीय एजेंसी से जांच
– OMR शीट, श्रेणीवार कट-ऑफ और मेरिट सूची पर हस्ताक्षर को पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करना

राज्य सरकार ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। जांच जारी है और अधिकारियों ने कहा है कि यदि किसी गड़बड़ी की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। 2023 के अधिनियम के तहत होने वाली जांच से अधिक मजबूत कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

## प्रभाव: परीक्षा केंद्र से आगे का असर

हजारों अभ्यर्थियों के लिए परीक्षाओं में देरी और अनियंत्रित अनियमितताएं वर्षों की तैयारी, मानसिक तनाव और आर्थिक बोझ को प्रभावित कर रही हैं। JPSC और JSSC जैसी संस्थाओं पर भरोसा कम होना झारखंड में लोकतांत्रिक जवाबदेही को भी कमजोर करता है।

राजनीतिक असर भी दिखाई दे रहा है—यह मुद्दा BJP के लिए सरकार की पारदर्शिता और ईमानदारी पर हमले का प्रमुख आधार बन गया है। सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए भर्ती प्रक्रियाओं में भरोसा बहाल करना अब प्रशासनिक और राजनीतिक, दोनों दृष्टि से आवश्यक हो गया है।

जुलाई 2026 के अंत तक संकट का समाधान नहीं हुआ है। JPSC मुख्यालय में अव्यवस्था बनी हुई है, परीक्षाएं स्थगित हैं, नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है और CID की जांच जारी है। छात्रों, राजनीतिक विरोधियों और नागरिक समूहों के नेतृत्व में सार्वजनिक आक्रोश जारी है। वे केवल पिछली गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही नहीं, बल्कि यह आश्वासन भी मांग रहे हैं कि झारखंड में भविष्य की भर्ती परीक्षाएं निष्पक्ष और सत्यापन योग्य मानकों पर आधारित होंगी।

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