Home rss world hindi ट्रंप के कानून से बढ़ा तनाव: रूस की US को खुली चेतावनी,...

ट्रंप के कानून से बढ़ा तनाव: रूस की US को खुली चेतावनी, नए प्रतिबंधों से बिगड़ेगा यूक्रेन युद्ध का खेल

7
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

रूस ने कहा है कि अमेरिका के नए प्रतिबंध यूक्रेन युद्ध का शांतिपूर्ण हल निकालने की कोशिशों को जरूर और जटिल बना देंगे। यह चेतावनी उस समय आई जब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस के खिलाफ पिछले कई वर्षों का सबसे बड़ा प्रतिबंध विधेयक पास कर दिया।

अमेरिका के नए प्रतिबंध को लेकर रूस ने सख्त चेतावनी दी है। गुरुवार को क्रेमलिन ने कहा कि अमेरिका के नए प्रतिबंध यूक्रेन युद्ध का शांतिपूर्ण हल निकालने की कोशिशों को जरूर और जटिल बना देंगे। यह बयान उस समय आया जब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस के खिलाफ बड़ा प्रतिबंध विधेयक 262-159 वोट से पास कर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेज दिया। इस कानून से ट्रंप को भारत और चीन जैसे रूसी तेल-गैस के बड़े खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार भी मिल सकता है।

बता दें कि अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बुधवार को लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026 को 262 के मुकाबले 159 वोट से मंजूरी दी। इससे पहले अगस्त में सीनेट ने इसे 86-11 से पास किया था। अब विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए गया है। ट्रंप के इस पर दस्तखत करने की संभावना बताई जा रही है। विधेयक दक्षिण कैरोलिना के दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर है। ग्राहम ने इस कानून पर एक साल से ज्यादा समय तक बातचीत की थी। जुलाई 2026 में उनकी मृत्यु हो गई थी। उनके निधन के बाद इस बिल को उनके सम्मान में यही नाम दिया गया।

विधेयक में क्या है?

यह कानून रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र को निशाना बनाता है। इसमें राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उनके करीबी अधिकारी, बैंक और वित्तीय संस्थाएं शामिल हैं। साथ ही रूस के उन गुप्त टैंकर जहाजों यानी शैडो फ्लीट को भी निशाना बनाया गया है, जिनसे रूस पश्चिमी प्रतिबंधों से बचकर तेल बेचता है। सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि ट्रंप को अधिकार दिया गया है कि वे रूसी तेल और गैस के बड़े खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकें। यह प्रावधान मुख्य रूप से उन पांच देशों पर लागू हो सकता है जो रूस से सबसे ज्यादा तेल या गैस खरीदते हैं। भारत और चीन इस सूची में प्रमुख माने जाते हैं, क्योंकि दोनों रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में हैं।

हालांकि कानून में एक छूट भी है। अगर कोई देश रूस की कुल प्राकृतिक गैस का 15 प्रतिशत से कम खरीदता है और खरीद कम करने के ठोस कदम उठा रहा है, तो उस पर यह टैरिफ नहीं लग सकता। ईरान पर लगे मौजूदा प्रतिबंधों को भी पांच साल के लिए बढ़ाने का प्रावधान है। अमेरिकी सांसदों का कहना है कि इसका मकसद रूस की युद्ध फंडिंग कम करना है। रूस तेल-गैस की कमाई से यूक्रेन युद्ध चला रहा है। समर्थकों का दावा है कि आर्थिक दबाव बढ़ने से मास्को बातचीत की मेज पर आएगा।

क्रेमलिन ने क्या कहा?

क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि हम इस दस्तावेज की प्रगति देख रहे हैं। यह अमित्रतापूर्ण कदमों की श्रेणी में आता है। अमेरिका द्वारा और प्रतिबंध लगाने से यूक्रेन में शांतिपूर्ण समाधान की खोज निश्चित रूप से जटिल हो जाएगी। पेस्कोव ने साफ किया कि मास्को इस कानून को शत्रुतापूर्ण कार्रवाई मानता है। रूस का रुख है कि और आर्थिक दबाव बातचीत को आसान नहीं, बल्कि और उलझा देगा।

जेलेंस्की का स्वागत, भारत की चिंता

यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने इस कानून के पारित होने का स्वागत किया। उन्होंने इसे प्रतीकात्मक बताया और अमेरिकी सांसदों का धन्यवाद किया। जेलेंस्की पहले भी इस बिल के समर्थन में अमेरिकी नेताओं से मिले थे।

वहीं भारत के लिए यह टेंशन देने वाली है। हालांकि कानून अपने आप में भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ नहीं लगाता। यह सिर्फ ट्रंप को यह अधिकार देता है। अगर वाशिंगटन इस अधिकार का इस्तेमाल करता है, तो भारतीय निर्यात प्रभावित हो सकते हैं। भारत पहले ही कह चुका है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाएगा।

शांति वार्ता के बीच नया दबाव

यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका एक तरफ रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और दूसरी तरफ बातचीत से युद्ध खत्म करने की कोशिश कर रहा है। हाल के महीनों में अमेरिकी दूत मास्को और कीव गए थे, लेकिन बातचीत अभी अटकी हुई है। युद्ध फरवरी 2022 से चल रहा है और अब पांचवें साल में है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN