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तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन ने शनिवार को कहा कि इसराइल को अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को पटरी से उतारने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए.
उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के कोशिश तब तक कामयाब नहीं हो सकती जब तक कि क्षेत्रीय देशों का समर्थन और सहयोग न मिले.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ इस्तांबुल में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस में अर्दोआन ने कहा, “क्षेत्रीय देशों की इच्छा और उनके योगदान पर आधारित समाधान ही टिकाऊ हो सकता है. ऐसा कोई भी समाधान, जिसे क्षेत्र के देशों का समर्थन न मिले, लंबे समय तक नहीं चल सकता.”
अर्दोआन ने कहा, “हम इसराइली सरकार की उन कोशिशों पर कड़ी नज़र रखे हुए हैं, जिनका मकसद अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को पटरी से उतारना है. मौजूदा इसराइली सरकार लगातार युद्ध का रास्ता अपना रही है. उसे हमारे क्षेत्र को एक बार फिर बारूद और खून की गंध में डुबोने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए.”
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अर्दोआन पहले भी कई बार इसराइल पर अमेरिका-ईरान समझौते को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगा चुके हैं.
इसके अलावा उन्होंने गज़ा, लेबनान और सीरिया में इसराइल के सैन्य हमलों की भी बार-बार कड़ी आलोचना की है.
इससे पहले तुर्की के विदेश मंत्री हकान फ़िदान ने कहा था कि इसराइल इस समय एक नए दुश्मन की तलाश में है.
फिदान ने सीएनएन तुर्क से बातचीत में कहा था, “जब तक इसराइल या कोई अन्य पक्ष तुर्की के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय हितों के ख़िलाफ़ काम करता रहेगा तब तक हमें किसी से डरने, हिचकिचाने या पीछे हटने की कोई वजह नहीं है.”
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