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दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण से कैसे बचें? डॉक्टर ने बताए बच्चों और बुजुर्गों के लिए 8 जरूरी टिप्स

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Source :- LIVE HINDUSTAN

दिल्ली-NCR की हवा हर दिन जहरीली होती जा रही है और दीवाली आने तक प्रदूषण का स्तर काफी ज्यादा हो जाएगा। ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों को अभी से अपनी सेहत का खास ख्याल रखना चाहिए। डॉक्टर ने प्रदूषण के दौरान सुरक्षित रहने के कुछ टिप्स बताए हैं।

दिल्ली-NCR की हवा जहरीली होना शुरू हो चुकी है और दीवाली के बाद लोगों का बिना मास्क के बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा। प्रदूषण में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की सेहत पर बुरा असर होता है और इसके कारण आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ जैसी परेशानियां होती रहती हैं। खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्ग जो पहले से अस्थमा, एलर्जी या दिल की बीमारी से जूझ रहे लोगों को प्रदूषित हवा में ज्यादा दिक्कत होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जहरीली हवा में बच्चों और बुजुर्गों का ख्याल कैसे रखें। नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल के फिजिशियन डॉक्टर जेके गुप्ता का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों को अभी से आप प्रदूषण से बचाने के लिए कुछ कदम उठा सकते हैं। अगर अभी से ही तबियत खराब होने लगी या एलर्जी हो गई तो आगे संभालना मुश्किल होगा। आइये जानते हैं बच्चों और बुजुर्गों को कैसे सुरक्षित रखें।

दिल्ली-NCR में प्रदूषण से सेहत को क्या नुकसान हो सकता है?

वायु प्रदूषण में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे कण सांस के जरिए शरीर में घुस सकते हैं। इनसे आंखों में जलन, नाक बहना, गले में खराश, खांसी और सांस फूलने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। लंबे समय तक खराब हवा में रहने से फेफड़ों और दिल की सेहत पर भी बुरा असर पड़ सकता है। खासतौर पर बच्चों के लंग्स ज्यादा मजबूत नहीं होते हैं और इम्यूनिटी भी कमजोर होती है। इसके अलावा बुजुर्गों में उम्र के साथ कई बीमारियां पहले से होती हैं, जो बढ़ सकती हैं।

बच्चों को प्रदूषण से कैसे बचाएं?

डॉक्टर गुप्ता का कहना है कि आप बच्चों को पूरी तरह से कंट्रोल में नहीं रख सकते हैं लेकिन कुछ जरूरी चीजें हैं, जिन्हें कर सकते हैं। इन चीजों से बच्चों को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

1. प्रदूषण ज्यादा होने पर बाहर खेलने से बचाएं

जब हवा की गुणवत्ता ज्यादा खराब हो, तो बच्चों को पार्क, सड़क या खुले मैदान में लंबे समय तक खेलने के लिए न भेजें। दौड़ने और ज्यादा मेहनत वाली एक्टिविटीज से सांस के साथ शरीर में गंदगी जा सकती हैं। AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स देखकर बच्चों को खेलने के लिए भेजें।

2. मास्क लगाने की सलाह

बच्चों के लिए भी मास्क आने लगे हैं और वह स्कूल जाता हो या फिर खेलने के लिए जा रहा हो, तो उसे मास्क लगाकर ही भेजें। मास्क से काफी हद तक सुरक्षा होती है और सूक्ष्म कण शरीर के अंदर नहीं जाते हैं।

3. घर के अंदर की हवा साफ रखें

घर में धूम्रपान, अगरबत्ती, धूप और अन्य चीजों से निकलने वाले धुएं को कम करें। खाना बनाते समय वेंटिलेशन का ध्यान रखें। अगर संभव हो, तो कमरे के आकार के अनुसार एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर घर में ज्यादा छोटा बच्चा हो तो प्यूरीफायर लगवाना सही रहेगा।

4. बच्चों के लक्षणों को नजरअंदाज न करें

अगर बच्चे को लगातार खांसी, घरघराहट, सांस लेने में परेशानी या आंखों में तेज जलन हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लें। सांस लेने में गंभीर परेशानी होने पर तुरंत अस्पताल लेकर जाएं। कई बार पेरेंट्स साधारण एलर्जी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

बुजुर्गों को प्रदूषण से बचने के लिए क्या करना चाहिए?

1. खराब AQI में सुबह की सैर से बचें

सुबह की हवा हमेशा साफ हो, ऐसा जरूरी नहीं है। बुजुर्गों को सैर या योगा पर जाने से पहले AQI की जांच करनी चाहिए। प्रदूषण ज्यादा होने पर बाहर टहलने के बजाय घर के अंदर हल्की शारीरिक गतिविधियां करना बेहतर हो सकता है।

2. दवाएं रूटीन से लें

अस्थमा, COPD, हृदय रोग या अन्य पुरानी बीमारियों से पीड़ित बुजुर्ग अपनी तय दवाएं समय पर लें। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें और न ही उसकी खुराक बदलें। कई बार सेहत में सुधार को देखते हुए हम ऐसा करते हैं लेकिन प्रदूषण के कारण आपकी इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है, जिससे वह समस्या बढ़ सकती है।

3. बाहर निकलते समय सही मास्क चुनें

अगर प्रदूषण के दौरान बाहर जाना जरूरी हो, तो अच्छी फिटिंग वाला N95 या रेस्पिरेटर मास्क पहनें। सही मास्क में बारीक प्रदूषक कणों से बचाव में मदद मिलती है। मास्क नाक और मुंह को अच्छी तरह ढकना चाहिए। मास्क पूरी तरह से सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है लेकिन ये कुछ हद तक बचायेगा।

4. सांस और दिल से जुड़े लक्षणों पर ध्यान दें

सांस फूलना, सीने में दर्द, असामान्य कमजोरी या पहले से मौजूद बीमारी के लक्षण बढ़ना गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। सांस से जुड़ी समस्या को आम एलर्जी या बीमारी ना समझें। कई बार ये गंभीर समस्या हो सकती है।

नोट- यह खबर सामान्य जानकारियों पर आधारित है। किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ से उचित सलाह लें।

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