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ध्रुव राठी बोले, ‘मोदी चुनाव आयोग में सुधार की बात कहें तो मैं उनका भी समर्थन करूंगा’

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Source :- BBC INDIA

ध्रुव राठी

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पॉपुलर यूट्यूबर ध्रुव राठी ने बीबीसी की भारतीय भाषाओं की डिजिटल वीडियो एडिटर सर्वप्रिया सांगवान से विशेष बातचीत में कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव आयोग में सुधार की बात करते हैं, तो वह उनका भी ‘समर्थन’ करेंगे.

दरअसल, उनसे पूछा गया था कि क्या वो कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के अलावा कांग्रेस और अन्य संगठनों का भी समर्थन करते हैं?

इस पर उन्होंने कहा, “जो भी सही मुद्दा उठा रहे हैं, वो उनके समर्थन में हैं. अगर आज नितिन गडकरी भी कह दें कि वो इस मुद्दे के साथ हैं, तो मैं उनका भी समर्थन करूंगा. बात मुद्दे की होनी चाहिए, पार्टी की नहीं.”

ध्रुव राठी कई सालों से जर्मनी में रहते हैं. कॉकरोच जनता पार्टी ने जब अपने दूसरे दौर के आंदोलन का आह्वान किया, तो वो भारत आ गए.

बीते दिनों बेंगलुरु में हुए एक कार्यक्रम में वो सीजेपी के नेताओं के साथ मंच पर खड़े नज़र आए. मगर 10 अक्तूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन में उन्हें शामिल होना था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने उन्हें गुरुग्राम स्थित उनके घर से हिरासत में ले लिया.

यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को रोकने की मांग को लेकर बुलाया गया था.

ध्रुव राठी को क़रीब 22 घंटे बाद पुलिस हिरासत से रिहा कर दिया गया. ध्रुव राठी ने उस दिन उनके साथ क्या हुआ, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग और दूसरे कई मुद्दों पर सर्वप्रिया सांगवान से बात की.

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हिरासत के दिन क्या हुआ?

ध्रुव राठी ने कहा कि शुरू में उन्हें यह देखना बहुत ‘सदमे वाला’ लगा कि “देश में हालात इस क़दर बिगड़ गए हैं कि एक ऐसे नागरिक को सोते हुए कुछ गुंडे घसीटते हुए पुलिस स्टेशन ले जाते हैं, जिसने कोई क़ानून नहीं तोड़ा और कोई अपराध नहीं किया था.”

उन्होंने कहा कि जो लोग उन्हें घर से उठाने आए थे, वे सादी वर्दी में थे और उनके पास नेम प्लेट भी नहीं थी.

ध्रुव राठी ने कहा, “मैं उन्हें गुंडे ही कहूंगा, क्योंकि अगर वे नेम प्लेट लगाते, वर्दी में होते, तो मैं कहता कि पुलिस ऑफ़िसर हैं. पुलिस वाले होते तो किसी के घर में ऐसे घुसते नहीं हैं. मुझे नहीं लगता कि ऐसा करना लीगल है… आप किसी भी एंगल से देखिए, ऐसा करना ग़ैर-क़ानूनी है. अगर मेरे ख़िलाफ़ कोई मुक़दमा होता, कोई एफ़आईआर होती, तो उन्हें बताना चाहिए था. हिरासत में भी लेना था, तो बताना चाहिए था कि इसलिए हम प्रिवेंटिव डिटेंशन कर रहे हैं. ये बात उन्होंने बाद में बताई, पहले नहीं.”

डीके बासु बनाम स्टेट ऑफ वेस्ट बंगाल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में लिए जाने को लेकर गाइडलाइंस तय की थीं. इसके मुताबिक़, किसी की गिरफ़्तारी के समय कुछ निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना होता है. हिरासत में लिए जाने के दौरान भी पुलिस के लिए यह प्रक्रिया पूरी करना ज़रूरी है.

लेकिन ध्रुव राठी ने कहा कि उनके मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ. उन्हें कोई वकील नहीं दिया गया और उनका फ़ोन भी ले लिया गया.

बीबीसी की सर्वप्रिया सांगवान ने ध्रुव राठी से बात की

जब उनसे पूछा गया कि क्या वो इस मामले में कोई क़ानूनी कार्रवाई करेंगे, तो उन्होंने कहा कि वो अपने और अपने पैरेंट्स के साथ जो कुछ हुआ, उसके ख़िलाफ़ एक्शन लेना चाहते हैं.

उन्होंने कहा, “जब उन्होंने मुझे हिरासत में रखा, तो वही पुलिस वाले मेरे साथ एक प्रोफ़ेशनल की तरह अच्छा व्यवहार करने लगे. उनसे मेरी अच्छी बातचीत हो गई, तो उन्होंने बताया कि वे मेरे सपोर्टर हैं. यह देखकर मैं हैरान था. उन्होंने कहा कि वो मेरे साथ खड़े हैं, लेकिन ऊपर से ऑर्डर आया है और अगर उन्होंने उसे फ़ॉलो नहीं किया, तो वे अपनी नौकरी खो देंगे.”

ध्रुव राठी ने कहा, “इसलिए मेरे लिए यह थोड़ी असमंजस वाली चीज़ है. क्योंकि अगर मैं क़ानूनी एक्शन लूं, तो भी जो वाक़ई ज़िम्मेदार व्यक्ति है, उसके ख़िलाफ़ कुछ नहीं होगा.”

नागरिकता पर क्या बोले?

ध्रुव राठी

लंबे समय से ध्रुव राठी की नागरिकता को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें की जाती रही हैं. लेकिन सीजेपी के प्रोटेस्ट का समर्थन करने के बाद जब उनकी नागरिकता को लेकर फिर से सवाल उठे, तो उन्होंने अपना पासपोर्ट दिखाते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया.

इसमें उन्होंने कहा कि वह अभी भी भारतीय नागरिक हैं.

इस मुद्दे पर बीबीसी से बात करते हुए ध्रुव राठी ने कहा, “जो लोग मेरे ख़िलाफ़ बोलते हैं, ये उनकी असली नीयत दिखाता है. इन्हें लगता है कि अगर कोई विदेश गया है, तो वो जल्दी से जल्दी पासपोर्ट बदलने और दूसरी नागरिकता लेने की कोशिश करेगा, क्योंकि हर कोई वही करता है. लेकिन मुझे अपने देश की फ़िक्र है.”

उन्होंने कहा, “मैं अभी भी देश के लिए आवाज़ उठाना चाहता हूं, इसलिए मैंने नागरिकता रखी हुई है.”

उन्होंने कहा कि अगर वो चाहते, तो नागरिकता कब की बदल चुके होते.

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ध्रुव राठी ने कहा, “मैं 2012 से ही (जर्मनी में) रह रहा हूं. चौदह साल हो गए. मैं 2020 में बहुत आसानी से वहां की नागरिकता ले सकता था. लेकिन मैंने नागरिकता नहीं बदली. मेरा यह सोचा-समझा निर्णय है.”

बहुत से लोग सोचते हैं कि जर्मनी में रहने के कारण वह स्वतंत्र होकर वीडियो बनाते हैं या सरकार की आलोचना कर लेते हैं और फिर भी सुरक्षित हैं, क्योंकि उनकी नागरिकता कुछ और है और वो जर्मनी में रहते हैं.

इस पर ध्रुव राठी ने कहा, “मैं लोगों को यही दिखाना चाह रहा हूं कि असल मामला साहस का है. हर किसी के पास ये साहस होता है. भारत में बहुत से पत्रकार हैं, जो ज़मीन पर आकर आवाज़ उठा रहे हैं. ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ मैं ही हूं. अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका, नेहा बोरा और यहां तक कि जो पत्रकार हैं, ये सब अपना काम कर रहे हैं और यहां रहते हुए ज़मीन पर कर रहे हैं, तो हर कोई कर सकता है.”

उन्होंने कहा, “लोगों को बस अपनी ताक़त समझने की ज़रूरत है कि लोगों की आवाज़ में कितनी ताक़त है और लोगों की एकता में कितनी ताक़त है.”

ध्रुव राठी किसका समर्थन करते हैं?

सीजेपी के प्रोटेस्ट में शामिल होने से यह संदेश गया कि वह सीजेपी का समर्थन करते हैं. लेकिन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के मुद्दे पर कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियां भी मैदान में हैं. वामपंथी छात्र संगठन भी इस मुद्दे को उठा रहे हैं. तो ध्रुव राठी किसका समर्थन करते हैं?

इस सवाल पर ध्रुव राठी ने कहा कि जो भी संगठन या व्यक्ति इस मुद्दे को उठा रहे हैं, वह उन सभी का समर्थन करते हैं.

उन्होंने कहा, “आज अगर नितिन गडकरी भी कह दें कि वो इस मुद्दे के समर्थन में हैं, तो मैं उनका भी सपोर्ट करूंगा. अगर नरेंद्र मोदी भी कह दें कि वो चुनाव आयोग में सुधार चाहते हैं, तो मैं इस मुद्दे पर उनका भी सपोर्ट करूंगा.”

मौजूदा हालात की इमरजेंसी से तुलना कितना सही?

सीजेपी के प्रोटेस्ट से पहले और बीते दो दिनों के दौरान बड़े पैमाने पर लोगों को प्रिवेंटिव डिटेंशन में लिया गया. इसके बाद सीजेपी ने इसे अघोषित इमरजेंसी करार दिया. लेकिन इमरजेंसी से मौजूदा हालात की तुलना करना कितना सही है?

इस पर ध्रुव राठी का कहना था, “मैं एक बुज़ुर्ग आदमी का सोशल मीडिया पर दिया गया एक इंटरव्यू देख रहा था, जो बहुत वायरल हो गया था. उन्होंने कहा था, ‘मैंने इमरजेंसी भी देखी है और मैंने यह अघोषित इमरजेंसी भी देखी है.’ वो बोलने वाले थे कि जो उस वक्त हुआ था, वो इतना बुरा नहीं था जितना अभी हो रहा है. जैसे ही वो बोल रहे थे, एक पुलिसकर्मी आता है, उनका हाथ पकड़ता है और कहता है, ‘चलिए, आप बस, हो गया.’ मीडिया वाले वहीं खड़े हैं.”

SOURCE : BBC NEWS