Source :- LIVE HINDUSTAN
मुख्य बातें
- अनुमान है कि अगर कीमतें बढ़ाई जाती हैं, तो इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है
- पेट्रोल-डीजल महंगा होने से गाड़ियों से सफर करना ही नहीं, बल्कि माल ढुलाई और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें भी प्रभावित हो सकती हैं
Petrol Diesel Price Hike: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर आम लोगों की चिंता बढ़ सकती है। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के अनुमान के मुताबिक, केंद्र सरकार नवंबर में पेट्रोल-डीजल के दाम में मामूली बढ़ोतरी कर सकती है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की अर्थशास्त्री एलेक्जेंड्रा हरमन प्रसाद के हवाले से बताया गया है कि इस बार कीमतों में होने वाली संभावित बढ़ोतरी मई में हुई कुल 7.5 फीसदी की बढ़ोतरी के मुकाबले करीब आधी हो सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है।
विधानसभा चुनावों से पहले लिया जा सकता है फैसला
रिपोर्ट के मुताबिक, अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले नवंबर को पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का सही मौका माना जा रहा है। अनुमान है कि अगर कीमतें बढ़ाई जाती हैं, तो इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से गाड़ियों से सफर करना ही नहीं, बल्कि माल ढुलाई और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें भी प्रभावित हो सकती हैं।
कितनी बढ़ सकती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की अर्थशास्त्री एलेक्जेंड्रा हरमन प्रसाद के मुताबिक, नवंबर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में होने वाली संभावित बढ़ोतरी इस साल मई में हुई कुल बढ़ोतरी के मुकाबले करीब आधी हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, मई में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कुल 7.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। उस समय अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के चलते तेल बाजार पर दबाव पड़ा था। अब एक बार फिर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल यह सिर्फ एक अनुमान है।
पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ तो कितनी बढ़ेगी महंगाई
अगर नवंबर में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ते हैं, तो इसका असर देश में खुदरा महंगाई पर भी पड़ सकता है। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के अनुमान के मुताबिक, अक्टूबर-दिसंबर 2026 की तिमाही में खुदरा महंगाई बढ़कर 6.2 फीसदी तक पहुंच सकती है। वहीं, जनवरी से मार्च 2027 की तिमाही में महंगाई के 6.5 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है। यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की 2 से 6 फीसदी की तय महंगाई सीमा से ज्यादा होगा।
RBI ने महंगाई को लेकर क्या अनुमान जताया है
भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा में अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए महंगाई दर 6 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। वहीं, जनवरी-मार्च तिमाही में इसके घटकर 5.7 फीसदी पर आने की उम्मीद जताई गई थी।इसके मुकाबले ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स का अनुमान ज्यादा है। संस्था का मानना है कि आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भी ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ने महंगाई दर 5.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया है, जबकि RBI का अनुमान 5.2 फीसदी है।
अगर नवंबर में दाम नहीं बढ़े तो क्या होगा
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की अर्थशास्त्री के मुताबिक, अगर सरकार नवंबर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाती है, तो आने वाली तिमाहियों में महंगाई का अनुमान 0.10 से 0.30 फीसदी तक नीचे आ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि महंगाई का दबाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, कीमतें नहीं बढ़ने की स्थिति में भी महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है।
क्या RBI फिर बढ़ा सकता है रेपो रेट
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स का अनुमान है कि अगर महंगाई लगातार बढ़ती रहती है, तो RBI दिसंबर और फरवरी की मौद्रिक नीति बैठकों में रेपो रेट 0.25-0.25 फीसदी बढ़ा सकता है। अक्टूबर में भी 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद यह संभावना जताई गई है। रेपो रेट वह दर है, जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। इसमें बढ़ोतरी होने पर होम लोन, कार लोन और दूसरे कर्ज की ब्याज दरों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, RBI रेपो रेट बढ़ाएगा या नहीं, इसका फैसला उस समय महंगाई और आर्थिक हालात को देखकर लिया जाएगा।
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