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मुख्य बातें
- बिहार की एक महिला ने पति पर घर में काम करने वाली नौकरानी से अफेयर का आरोप लगाया, लेकिन वह कोर्ट में इसे साबित नहीं कर पाई
- इसके बावजूद पटना हाईकोर्ट ने महिला को तलाक देने के साथ 50 लाख रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया
बिहार की एक महिला ने पति पर घर में काम करने वाली नौकरानी से अफेयर का आरोप लगाया, लेकिन वह कोर्ट में इसे साबित नहीं कर पाई। इसके बावजूद पटना हाईकोर्ट ने महिला को तलाक देने के साथ 50 लाख रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया। आखिर जब पति का अफेयर साबित नहीं हुआ, तो महिला को तलाक और इतनी बड़ी रकम कैसे मिली? जानिए कोर्ट के फैसले की पूरी कहानी।
शादी के कुछ दिन बाद ही पति पर हुआ शक
मामला बिहार की राजधानी पटना का है। ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक मिसेज डीक्रूज की शादी 24 जनवरी 2010 को सेबेस्टियन से पटना के पाटलिपुत्र कॉलोनी स्थित एक चर्च में ईसाई रीति-रिवाजों से हुई थी। शादी के बाद वह छत्तीसगढ़ से बिहार आकर पति के साथ रहने लगीं।
महिला का आरोप था कि शादी के कुछ दिन बाद ही उन्होंने देखा कि उनके पति घर में काम करने वाली शीला नाम की नौकरानी के साथ काफी समय बिताते थे। शुरुआत में उन्होंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन बाद में उन्हें पति के व्यवहार पर शक होने लगा।
महिला ने जब इस पर आपत्ति जताई, तो उनके मुताबिक पति ने उनके साथ गाली-गलौज की और मारपीट भी की। परेशान होकर वह 10 मार्च 2010 को अपने मायके बिलासपुर चली गईं। इसके बाद उन्होंने पति से तलाक और गुजारा भत्ता पाने के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की।
पति का अफेयर साबित नहीं हुआ, फिर भी कैसे मिला तलाक?
महिला ने पति पर दूसरी महिला के साथ अवैध संबंध होने और क्रूरता का आरोप लगाया था। हालांकि, ट्रायल कोर्ट में वह पति के अफेयर के आरोप को साबित नहीं कर सकीं। इसके बाद निचली अदालत ने तलाक देने से इनकार कर दिया।
महिला ने इस फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि महिला साल 2010 से पति से अलग रह रही थीं और उन्होंने साल 2014 में वैवाहिक मुकदमा दायर किया था।
हाईकोर्ट ने साफ किया कि पति का अफेयर साबित नहीं होने के बावजूद तलाक दिया जा सकता है, अगर कानून में बताए गए किसी दूसरे आधार को साबित किया जाए। इस मामले में अदालत ने लंबे समय तक अलग रहने यानी परित्याग (डेजर्शन) के आधार पर तलाक मंजूर किया।
अदालत ने यह भी साफ किया कि ईसाई दंपतियों के तलाक से जुड़े मामलों में भारतीय तलाक अधिनियम 1869 लागू होता है। निचली अदालत ने कानून के प्रावधानों पर विचार करने में गलती की थी।
पति की संपत्ति का पता चला, तो 50 लाख रुपये मिले
इस मामले में महिला को 50 लाख रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता दिलाने में पति की आर्थिक स्थिति की जांच अहम रही। पति ने अपनी आयकर रिटर्न में सालाना इनकम करीब 4.21 लाख रुपये बताई थी। हालांकि, हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त विशेष अधिकारी की रिपोर्ट में उनकी संपत्ति और आय के दूसरे सोर्स की जानकारी सामने आई।
रिपोर्ट के मुताबिक, पति को हर महीने 15,000 रुपये किराये से भी मिलते थे। उनके पास आवासीय संपत्ति थी और उन्होंने अपनी संपत्ति तथा 1.5 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट को गिरवी रखकर अपनी रियल एस्टेट कंपनी के लिए 9.80 करोड़ रुपये का बिजनेस लोन लिया था। गिरवी रखी गई संपत्ति का मूल्य यस बैंक ने 4 करोड़ रुपये बताया था।
इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने माना कि पति आर्थिक रूप से सक्षम हैं। वहीं, महिला ने अपना मंथली खर्च करीब 40,450 रुपये बताया था। अदालत ने पति को महिला को 50 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया।
एफडी में पैसा रखने पर हर महीने 40 हजार रुपये की आय
हाईकोर्ट के मुताबिक, अगर महिला को मिलने वाली 50 लाख रुपये की रकम फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में निवेश की जाती है, तो उससे करीब 40,000 रुपये महीने की आय हो सकती है। इससे महिला अपनी रोजमर्रा की जरूरतों और जीवनयापन का खर्च उठा सकती हैं।
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