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सरकार ने बदली पेंशन योजनाओं के नाम, जानें लाभार्थियों पर क्या होगा असर

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • सरकार के मुताबिक, इन बदलावों का फायदा देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 3.20 करोड़ लाभार्थियों को मिलेगा
  • इस फैसले में सबसे अहम बदलाव दिव्यांग पेंशन योजना के नियमों में किया गया है
  • अब पेंशन के लिए दिव्यांगता की न्यूनतम सीमा 80 फीसदी से घटाकर 40 फीसदी करने का फैसला लिया गया है

केंद्र सरकार ने बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों को मिलने वाली पेंशन योजनाओं में बड़े बदलावों को मंजूरी दी है। सरकार ने कई योजनाओं के नाम बदलने के साथ दिव्यांग पेंशन के लिए पात्रता के नियमों में भी छूट दी है। अब दिव्यांगता की न्यूनतम सीमा 80 फीसदी से घटाकर 40 फीसदी करने का फैसला किया गया है। इसके अलावा, सरकार ने इन योजनाओं को अगले पांच साल तक जारी रखने के लिए ₹53,428 करोड़ के बजट को मंजूरी दी है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इन बदलावों से किन लोगों को फायदा मिल सकता है और पेंशन पाने वालों के लिए नए नियम क्या होंगे—

क्या है डिटेल- समझें

बता दें कि हाल ही में हुए कैबिनेट बैठक में केंद्र सरकार ने बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांग लोगों को आर्थिक मदद देने वाली सोशल सिक्योरिटी स्कीम्स में बड़े बदलावों को मंजूरी दी है। अब नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम (NSAP) का नाम बदलकर प्रधानमंत्री सोशल असिस्टेंस स्कीम किया जाएगा। इसके साथ ही, योजना के तहत आने वाली तीन पेंशन योजनाओं के नाम भी बदल दिए गए हैं। सरकार ने इस योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए ₹53,428 करोड़ के बजट को मंजूरी दी है। सरकार के मुताबिक, इन बदलावों का फायदा देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 3.20 करोड़ लाभार्थियों को मिलेगा। इस फैसले में सबसे अहम बदलाव दिव्यांग पेंशन योजना के नियमों में किया गया है। अब पेंशन के लिए दिव्यांगता की न्यूनतम सीमा 80 फीसदी से घटाकर 40 फीसदी करने का फैसला लिया गया है। साथ ही, उम्र से जुड़ी पात्रता में भी बदलाव किया गया है।

अब इन नामों से जानी जाएंगी पेंशन योजनाएं

केंद्र सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नाम पर चल रही तीन पेंशन योजनाओं के नाम बदलने को मंजूरी दी है। इनके नए नाम इस प्रकार हैं:

पुराना नाम —- नया नाम

नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम (NSAP)— प्रधानमंत्री सोशल असिस्टेंस स्कीम

इंदिरा गांधी नेशनल ओल्ड एज पेंशन स्कीम — – प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना — – प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना — प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना

राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना —- प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना

इन योजनाओं का मकसद आर्थिक रूप से कमजोर बुजुर्गों, विधवाओं, दिव्यांगजनों और जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता देना है।

दिव्यांग पेंशन के नियमों में क्या बदलाव हुआ?

दिव्यांग लोगों को मिलने वाली पेंशन योजना में सरकार ने पात्रता से जुड़े अहम बदलावों को मंजूरी दी है। अब दिव्यांगता की न्यूनतम सीमा 80 फीसदी के बजाय 40 फीसदी होगी। इससे पहले के मुकाबले अधिक लोगों के योजना के दायरे में आने की संभावना है। इसके अलावा, दिव्यांग पेंशन के लिए न्यूनतम उम्र की शर्त को भी जन्म से लागू मानने का फैसला किया गया है। सरकार की घोषणा के मुताबिक, दिव्यांग पेंशन के तहत सहायता राशि इस तरह तय की गई है-

0 से 79 साल की उम्र के लिए: ₹375

80 साल और उससे अधिक उम्र के लिए: ₹625

हालांकि, इन राशियों के भुगतान की अवधि और लागू होने से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए सरकार के दिशानिर्देश देखना जरूरी होगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, पात्रता, लाभार्थियों की संख्या और सहायता राशि से जुड़े नए दिशानिर्देश तीन महीने के भीतर जारी करके लागू किए जाएंगे।

बुजुर्गों को कितनी मिलती है पेंशन?

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत गरीब परिवारों के बुजुर्गों को आर्थिक सहायता दी जाती है। पहले इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत 60 से 79 साल की उम्र के पात्र लोगों को केंद्र सरकार की ओर से ₹200 प्रति माह और 80 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को ₹500 प्रति माह दिए जाते थे। इसके अलावा, राज्य सरकारें भी अपनी तरफ से अतिरिक्त राशि देती हैं। इस वजह से अलग-अलग राज्यों में बुजुर्गों को मिलने वाली कुल पेंशन की रकम अलग हो सकती है। यानी पेंशन की कुल राशि सिर्फ केंद्र सरकार के हिस्से पर निर्भर नहीं करती, बल्कि संबंधित राज्य की ओर से दी जाने वाली अतिरिक्त सहायता भी इसमें अहम भूमिका निभाती है।

विधवा पेंशन योजना में क्या है व्यवस्था?

विधवा पेंशन योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की विधवा महिलाओं को आर्थिक सहारा देना है। पुरानी व्यवस्था के तहत गरीबी रेखा से नीचे आने वाले परिवारों की 40 से 79 साल की पात्र विधवाओं को केंद्र सरकार की ओर से ₹300 प्रति माह दिए जाते थे। 80 साल या उससे अधिक उम्र की पात्र महिलाओं के लिए यह राशि ₹500 प्रति माह थी। राज्य सरकारें इसके अलावा अतिरिक्त पेंशन भी दे सकती हैं। नई योजना के तहत पात्रता और भुगतान से जुड़े नियमों की जानकारी आधिकारिक दिशानिर्देशों के अनुसार देखनी होगी।

परिवार के कमाने वाले सदस्य की मौत पर मिलते हैं ₹20,000

राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले पात्र परिवारों को परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की मृत्यु होने पर एकमुश्त आर्थिक सहायता दी जाती है। पुरानी व्यवस्था के अनुसार, परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की 18 से 59 साल की उम्र के बीच मृत्यु होने पर पात्र परिवार को ₹20,000 की एकमुश्त सहायता दी जाती है। यह सहायता परिवार को आर्थिक संकट से उबरने में मदद करने के लिए दी जाती है। इस योजना का नाम अब प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना कर दिया गया है।

कब से लागू होंगे नए नियम?

केंद्र सरकार ने सामाजिक सहायता कार्यक्रम को अगले पांच वित्त वर्षों यानी 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इसके लिए कुल ₹53,428 करोड़ का प्रावधान किया गया है। दिव्यांग पेंशन की पात्रता, लाभार्थियों की संख्या और सहायता राशि से जुड़े नए दिशानिर्देश तीन महीने के भीतर जारी किए जाने हैं। इसलिए लाभार्थियों को नए नियमों के लागू होने और अपनी पात्रता की पुष्टि के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय की आधिकारिक सूचना पर नजर रखनी चाहिए।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN