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मार्केट में मिल रहे पीले सुनहरे पपीते देखकर खाने को जी ललचाता है लेकिन डर भी लगता है कि कहीं ये पपीते केमिकल के पके तो नहीं? ऐसे में ये बातें जानना जरूरी है जिससे जान सकें कि पपीता नेचुरल पका है या केमिकल से।
ठेले पर सुर्ख पीले रंग के पपीते देखकर ही खरीदने का मन कर जाता है। लेकिन इसे देखकर शंका होती है कि क्या इतने पीले दिख रहे पपीते सच में नेचुरली पके हैं या फिर इन्हें भी केमिकल से पकाकर तैयार किया गया है। दरअसल, पपीता डाइजेशन के लिए फायदेमंद होता है और इसे रोजाना खाना कई सारी बीमारियों को दूर भगाने में मदद करता है। लेकिन बाजार के पपीतों को देखकर में मन में कई तरह से सवाल उठते हैं। ऐसे में जानना जरूरी है कि नेचुरल तरीके से पका पपीता कैसा होता है और कौन सा पपीता केमिकल से पकाया गया है।
एक जैसा पीला मतलब केमिकल ये जरूरी नहीं
इंडियन एक्सप्रेस को न्यूट्रिशनिस्ट हिमांशी शर्मा ने बताया कि नहीं, एक जैसा पीला पपीता होने का मतलब यह नहीं है कि उसे केमिकल से पकाया गया है। क्योंकि पेड़ पर ही नेचुरल तरीके से पके पपीते कई बार बिल्कुल सुर्ख पीले रंग के हो जाते हैं। पपीते की किस्म, उगाने का तरीका और कब इन पपीतों को तोड़ा जा रहा ये सारी बातें पपीते के कलर और पकने पर फर्क डालती हैं।
तो आखिर कैसे पहचानें केमिकल वाला पपीता?
तो अगर आपको पता करना है कि पपीता केमिकल से पका है या नहीं तो केवल इसके कलर को देखकर अंदाजा नहीं लगाना चाहिए क्योंकि कलर के साथ और भी चीजें हैं जो देखनी पड़ती है। जैसे पपीते की सुगंध, टेक्सचर और पूरी तरह से पपीते को हाथ में लेकर समझा जाए कि ये केमिकल से पका है या नहीं।
क्योंकि जो पपीता प्राकृतिक तौर पर पका होता है उसकी महक कुछ मीठी सी आती है जो काफी अच्छी लगती है। वहीं
छूने मे हल्का सा सॉफ्ट होता है। साथ ही जो पपीता नेचुरल पेड़ पर पका होगा वो स्किन से लेकर अंदर तक बिल्कुल एक जैसा पका होगा।
वहीं जो पपीता सुर्ख पीले रंग का बाहर से दिख रहा लेकिन छूने पर कड़ा है और कहीं पर बिल्कुल मुलायम हो चुका है। वहीं इसके अंदर काटने पर पकने और मीठे होने की भी कोई गारंटी नहीं होती। हालांकि कुछ नेचुरल पके पपीते में भी सुगंध नहीं होती इसलिए केवल बाहर से देखकर अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है कि पपीता केमिकल से पका हुआ है या नहीं।
सावधान रहने की है जरूरत
चूंकि फलों को पकाने के लिए खास तरह की एथिलिन गैस का इस्तेमाल किया जाता है और ये फल के नेचुरल पकने के हार्मोंस का काम करते हैं इसलिए इन्हें सेफ माना जाता है।
लेकिन कुछ फल वाले जो एथिलीन की बजाय कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल करते हैं और जो कि बहुत ही हानिकारक तत्व छोड़ता है और फलों को पकाने के लिए बैन है। अगर इससे फल पकाए गए हैं तो वो शरीर के लिए बहुत हार्मफुल होता है। इसलिए हमेशा ऐसे फल वाले से फल खरीदें जिस पर आप भरोसा कर सकें। जो फलों को पकाने के लिए सुरक्षित तरीके का इस्तेमाल करता हो।
क्या घर पर पता कर सकते हैं कि पपीता केमिकल से पका है या नहीं?
नहीं, ऐसा कोई टेस्ट नहीं जिससे पता किया जा सकते कि पपीते को केमिकल से पकाया गया है या नहीं। केवल लैब टेस्ट से ही पता लगा सकते हैं कि पपीते को केमिकल से पकाया गया है या नहीं। जबकि आधा पका या कच्चा, बिना महक वाला पपीता या फिर सुर्ख पीला रंग देखकर शंका होने पर भी ये पता लगाना मुश्किल है कि इसे केमिकल से पकाया गया है या नहीं।
पपीता खरीदते समय ध्यान रखें
जब भी पपीता खरीदना हो तो उसकी स्वीट सी महक, हल्की सी सॉफ्टनेस देखकर किसी ऐसे दुकान से खरीदें जिस पर आप भरोसा करते हों।
पपीता की ऊपरी स्किन काफी कड़ी लग रही लेकिन वो पूरी तरह से पीला दिख रहा तो उम्मीद है कि वो अंदर से कच्चा ही होगा और उसे खरीदने का कोई फायदा नहीं। कई बार ऐसे दिख रहे पपीते ही केमिकल से पके होते हैं।
ऊपर से हल्का दबाने पर मुलायम महसूस हो रहा पपीता ही खरीदें, तो ये अंदर से पका निकल सकता है।
आर्टीफिशियल पके पपीते के स्वाद और न्यूट्रिशन पर क्या प्रभाव पड़ता है
जब पपीते को केमिकल डालकर पकाया जाता है तो इसके स्वाद और टेक्सचर पर फर्क पड़ता है क्योंकि जो पपीता नेचुरली पका होता है उसके स्वाद में मिठास होती है और साथ ही सॉफ्ट टेक्सचर और स्वीट अरोमा होता है। वहीं जो पपीता केमिकल से पका होता है उसका टेस्ट कई बार फीका सा होता है और ऊपर की स्किन कड़ी सी होती है और कहीं पर बिल्कुल गली हुई।
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