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अमेरिका ने ईरान के इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया है। एक अधिकारी ने Axios को बताया कि ईरान द्वारा अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा किए बिना कोई भी फ्रीज़ किया गया फंड जारी नहीं किया जाएगा।
पश्चिम एशिया में जंग और तनाव खत्म करने वाले अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबरों के बीच अब 12 अरब डॉलर की राशि पर नया पेच फंसता हुआ दिख रहा है। जहाँ एक ओर इस समझौते को युद्ध की समाप्ति की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान की 12 अरब डॉलर की फ्रीज (जमी हुई) संपत्ति को लेकर दोनों देशों के बीच खींचतान तेज हो गई है।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी मेहर ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच एक 14-सूत्रीय समझौता मसौदा तैयार हुआ है, जिसके तहत अमेरिका बातचीत शुरू होने से पहले ही ईरान की फ्रीज की गई हुई संपत्तियों का एक हिस्सा जारी करेगा। रिपोर्ट के अनुसार, 60 दिनों की वार्ता अवधि के दौरान 24 अरब डॉलर की फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियां जारी की जानी हैं, जिनमें से आधी राशि बातचीत शुरू होने से पहले उपलब्ध कराई जाएगी लेकिन अमेरिका ने इससे इनकार किया है। एक अधिकारी ने बताया कि ईरान द्वारा अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा किए बिना कोई भी फ्रीज फंड जारी नहीं किया जाएगा।
पैसे को लेकर विरोधाभास
‘मेहर’ की रिपोर्ट के अनुसार, 60 दिनों की बातचीत की अवधि के दौरान कुल 24 अरब डॉलर जारी किए जाने हैं, जिसमें से आधी राशि ईरान को बातचीत शुरू होने से पहले ही उपलब्ध करानी होगी। हालांकि, अमेरिका ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। एक वरिष्ठ अमरीकी अधिकारी ने इसे ‘पे-फॉर-परफॉरमेंस’ (काम के बदले भुगतान) समझौता करार देते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक ईरान अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह लागू नहीं करता, तब तक कोई भी फंड जारी नहीं किया जाएगा।
समझौते की मुख्य बातें और उसका दुनिया पर प्रभाव
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को पुष्टि की थी कि इस समझौते के तहत रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘हॉर्मुज समुद्री मार्ग’ को फिर से खोल दिया जाएगा, जो महीनों से जारी युद्ध के कारण लगभग बंद पड़ा था। इसके अलावा, मीडिया रिपोर्ट्स में इस सौदे के तहत लेबनान में संघर्ष विराम की बात भी कही गई है। ईरानी पक्ष का कहना है कि अंतिम समझौते के लिए बातचीत अगले 60 दिनों तक चलेगी, जो इस बात पर निर्भर करेगी कि वॉशिंगटन अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करता है या नहीं, जिसमें नाकाबंदी हटाना और संपत्तियों को जारी करना शामिल है।
ईरानी उप विदेश मंत्री ने क्या कहा?
तेहरान का पक्ष रखते हुए, ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने तस्नीम न्यूज़ एजेंसी से कहा कि अंतिम समझौते के लिए बातचीत 60 दिनों के दौरान होगी। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वॉशिंगटन अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करता है या नहीं, जिसमें दुश्मनी खत्म करना, नाकाबंदी हटाना और फ्रीज़ की गई संपत्ति जारी करना शामिल है। ईरानी मीडिया की रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि समझौते में लेबनान में युद्धविराम भी शामिल है।
फंड्स को लेकर विवाद नया नहीं
ईरान की फ्रीज़ की गई संपत्ति का मुद्दा पहले भी अमेरिका द्वारा उठाया गया था, जब ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि भविष्य में तेहरान द्वारा की जाने वाली किसी भी दुश्मनी से वॉशिंगटन के खाड़ी सहयोगियों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। इस पर पिछले हफ़्ते ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर ईरानी संपत्ति का इस्तेमाल दूसरे देशों को भुगतान करने के लिए किया जाता है, तो यह समझौते का उल्लंघन होगा। आर्थिक मामलों पर चल रहे मतभेदों के बावजूद, इस बड़े समझौते की व्यापक रूप से सराहना की गई है। UK, जर्मनी, इटली और फ्रांस जैसे देशों ने सबसे पहले यह संकेत दिया है कि अगर ईरान स्पष्ट और सत्यापित कदम उठाता है, तो वे उस पर लगे प्रतिबंध हटाने को तैयार हैं।
इजरायल ने तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की
इसके विपरीत, इजरायल ने तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की। इज़रायल का कहना है कि उसे हिज़्बुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई करने की पूरी छूट मिलनी चाहिए, क्योंकि हिज़्बुल्लाह दक्षिणी लेबनान पर काबिज़ है और इज़रायल ने अपने सैन्य अभियान उन इलाकों तक बढ़ा दिए हैं जहाँ उसकी सेना पिछले 25 सालों से नहीं गई थी। आखिरकार, इस समझौते से क्षेत्र में शांति आने की उम्मीद है, जहाँ एक कमजोर संघर्ष-विराम (सीज़फायर) समय-समय पर जवाबी हमलों के कारण बाधित होता रहा है। इसका सीधा और गंभीर असर वैश्विक ऊर्जा और शेयर बाजारों पर पड़ा है, जिससे कमोडिटी की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।
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