Source :- LIVE HINDUSTAN
काकुल स्थित पाकिस्तान मिलिट्री एकेडमी (PMA) में पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए जनरल रजा ने कहा कि पाकिस्तान संघर्ष नहीं चाहता, लेकिन उसकी सेना देश की रक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार है।
पाकिस्तान इन दिनों आंतरिक विरोधों से घिरा हुआ है। जनता का ध्यान भटकाने के लिए वह पुराने तरकीबों को फिर अपना रहा है। पाकिस्तान के नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड के कमांडर जनरल सैयद आमिर रजा ने रविवार को देश को फिर एकबार परमाणु वाली गीदड़भभकी दी है। उन्होंने पाकिस्तान की परमाणु प्रतिरोध क्षमता की बात करते हुए कहा कि अगर विरोधी कोई सैन्य गलती करते हैं तो उन्हें ऐसी जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा जो उनकी उम्मीदों से कहीं अधिक होगी।
काकुल स्थित पाकिस्तान मिलिट्री एकेडमी (PMA) में पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए जनरल रजा ने कहा कि पाकिस्तान संघर्ष नहीं चाहता, लेकिन उसकी सेना देश की रक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार है।
जनरल रजा ने पास होने वाले कैडेटों से कहा, “जो लोग हमारी सीमाओं के पार से पाकिस्तान के खिलाफ आक्रामक इरादे रखते हैं, उनके प्रति हमारा रुख एकदम स्पष्ट और अडिग है। परमाणु हथियारों वाले माहौल में संघर्ष या युद्ध की कोई गुंजाइश नहीं है। अगर कोई गलती से भी ऐसा कदम उठाता है तो उसे ऐसी जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा जो उसकी कल्पना और उम्मीदों से कहीं परे होगी।” उन्होंने कहा कि सेना देश के एक-एक इंच की रक्षा के लिए हमेशा तैयार है।
कश्मीर को लेकर तनाव
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बात करते हुए जनरल रजा ने सीमा सुरक्षा को लेकर कहा कि किसी भी हालत में सीमा पार से होने वाली घुसपैठ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कश्मीर पर पाकिस्तान के पारंपरिक राजनयिक रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि कश्मीर एक अनसुलझा अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों के दायरे में ही सुलझाया जाना चाहिए।
जनरल रजा ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की भागीदारी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता के प्रयासों को देखा है और हाल के वैश्विक तनावों के बीच पाकिस्तान ने एक सकारात्मक भूमिका निभाई है। उन्होंने फिलिस्तीन में मानवाधिकारों के उल्लंघन को तुरंत रोकने की भी मांग की।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने नए नियुक्त अधिकारियों को याद दिलाया कि अब उन पर देश की सुरक्षा, सम्मान और बचाव की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईमानदारी, साहस और वीरता सैन्य नेतृत्व के मूल स्तंभ बने हुए हैं, क्योंकि सशस्त्र बल सभी प्रकार के अभियानों में अपनी क्षमताओं को लगातार साबित कर रहे हैं।
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