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फ़्लाईदुबई विमान हमला: ट्रंप की चेतावनी, ईरान शामिल पाया गया तो ‘बहुत घातक हमला’ करेंगे

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Source :- BBC INDIA

डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर इस बात की पुष्टि हो जाती है कि ईरान तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई विमान के पायलट पर हुए हमले में शामिल था, तो उस पर “बहुत घातक हमले” किया जाएगा.

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि फ्लाईदुबई के जिस को-पायलट पर आरोप है कि उसने इसराइल जा रहे एक यात्री विमान को कथित तौर पर दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश की, उसका ईरान से संबंध हो सकता है. ट्रंप ने कहा कि यह बात वह “जैसा सुन रहे हैं, उसके आधार पर” कह रहे हैं.

ट्रंप ने गुरुवार को कहा, “हम अभी इस पर काम कर रहे हैं. वे हमारे साथ काफी खुलकर जानकारी साझा कर रहे हैं. मैं जो सुन रहा हूं, उसके आधार पर कहूंगा कि इसका जवाब ‘हां’ है.”

एक पत्रकार के सवाल पर कि क्या ईरान के दोषी पाए जाने पर अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा, ट्रंप ने कहा कि ईरानियों को “बहुत करारा झटका लगेगा.”

दुबई से तेल अवीव जाने वाली फ्लाइट एफ़ज़ेड103 उड़ान भरने के करीब दो घंटे बाद सऊदी अरब मुड़ गई

बुधवार को दुबई से इसराइल के तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के एक विमान में सवार 174 यात्रियों (जिनमें 166 इसराइली नागरिक शामिल थे) को सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी, इस घटना के दो दिन बाद भी हमलावर का मक़सद स्पष्ट नहीं है.

बीबीसी अरबी सेवा के मुताबिक़ यात्रियों के बयान के अनुसार, को-पायलट ने विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने के इरादे से कप्तान पर चाकू से हमला किया, जिसके नतीजे में विमान एक मिनट में पांच हज़ार मीटर नीचे आ गया. हालांकि, घायल होने के बावजूद, कैप्टन कॉकपिट का दरवाज़ा खोलने में कामयाब रहे, जिससे यात्रियों को कॉकपिट में घुसकर हमलावर को काबू करने का मौका मिला।

इस मामले की जांच अभी जारी है, लेकिन इसराइल ने इसे “जिहादी आतंकवादी हमले का प्रयास” बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है.

फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में घायल भारतीय नागरिक कैप्टन स्मित मच्छर ने कथित तौर पर बेहोश होने से पहले कॉकपिट का दरवाज़ा खोल दिया था

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गरगाश ने शुक्रवार को फ्लाईदुबई के पायलट स्मित मच्छर के साहस की प्रशंसा की, जिन पर उड़ान के दौरान उनके सह-पायलट ने हमला किया था.

गरगाश ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “भारतीय पायलट प्रशंसा के काबिल हैं, क्योंकि उन्होंने एक गंभीर आतंकवादी हमले और संभावित आपदा के सामने साहस और जिम्मेदारी का आदर्श उदाहरण पेश किया. सबसे कठिन हालात में भी उनका पेशेवर रवैया और नैतिक भावना उन्हें सच्चा हीरो बनाती है.”

उन्होंने आगे कहा, “जो कुछ हुआ उसे आसानी से कम आंकने या षड्यंत्र के सिद्धांत बताने और बढ़ावा देने के अलावा, उग्रवाद और आतंकवाद के ख़तरों के सामने सतर्कता और सावधानी बरतना ज़रूरी है.”

मध्यावधि चुनावों के बाद ‘अमेरिकी हमलों में बढ़ोतरी’ की संभावना

टेक्सास में एक कार्यक्रम में मौजूद राष्ट्रपति ट्रंप, कई लोगों को मानना है कि ट्रंप के लिए मध्यावधि चुनाव आसान नहीं रहने वाला

हाल के हफ़्तों में यह क्षेत्र अपेक्षाकृत शांत रहा है, क्योंकि अमेरिका ने 1 सितंबर के बाद से ईरान पर कोई हमला नहीं किया है. हालांकि होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाज़ों को बार-बार निशाना बनाया गया है.

ईरान पर पहले अमेरिकी और इसराइली हमलों के साथ शुरू हुए इस युद्ध को समाप्त करने के राजनयिक प्रयास सात महीने से अधिक समय बाद भी नाकाम रहे हैं.

गुरुवार को प्रकाशित टाइम मैगज़ीन के साथ एक इंटरव्यू में, ट्रंप ने नवंबर की शुरुआत में होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के ख़िलाफ़ हमलों में “संभावित” बढ़ोतरी की बात कही.

कई मीडिया आउटलेट्स ने बताया कि अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने क्षेत्र में एक विमानवाहक पोत और अन्य जहाज़ों को भेजने का फैसला किया है, जिनके नवंबर के अंत तक पहुंचने की उम्मीद है.

इन जहाज़ों में दो हज़ार मरीन सहित नौ से दस हजार सैन्य कर्मियों की अतिरिक्त सहायता मौजूद है.

मौजूदा समय में मध्य पूर्व में अमेरिका के दो विमानवाहक पोत तैनात हैं, और यह स्पष्ट नहीं है कि इनकी संख्या बढ़कर तीन हो जाएगी या इलाक़े में मौजूद दो जहाज़ों में से एक को हटा लिया जाएगा.

एक्सियोस वेबसाइट के अनुसार, आधिकारिक अमेरिकी सूत्रों का हवाला देते हुए अमेरिका ने हाल ही में सऊदी अरब और क़तर में तेल और गैस ठिकानों की रक्षा के लिए दो अतिरिक्त पैट्रियट मिसाइल रक्षा बैटरी भेजी हैं.

पाकिस्तानी विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने शुक्रवार को कहा कि पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच हुए समझौते के तहत गठित सामरिक रक्षा राजनीतिक समिति की एक इमरजेंसी बैठक अगले सप्ताह आयोजित की जाएगी, जिसमें सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों पर चर्चा की जाएगी.

इन तीनों देशों ने अगस्त में “संयुक्त रक्षा के लिए मक्का समझौते” पर हस्ताक्षर किए थे. यह समझौता ईरान समर्थित यमन के हूती समूह की ओर से सऊदी अरब पर हमले शुरू करने से कुछ सप्ताह पहले हुआ था.

अमेरिका ने डीज़ल को लेकर यूरोप पर दबाव बढ़ाया

ट्रंप के दबाव के बाद डीज़ल की कीमतों में गिरावट देखी गई है

इस मामले से जुड़े तीन सूत्रों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, यूरोपीय संघ के देशों ने शुक्रवार को फ्रांस के एक प्रस्ताव पर चर्चा की.

इसमें अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की ओर से 5 करोड़ बैरल कच्चे तेल को जारी करने के समानांतर ही, यूरोपीय डीज़ल भंडार के 50 करोड़ बैरल कच्चा तेल जारी करने की बात कही गई थी.

यह प्रस्ताव ईरान के साथ युद्ध की वजह से ईंधन की कीमतों को कम करने के प्रयास में और बाज़ारों में अधिक सप्लाई जारी करने के लिए अमेरिका के दबाव के बाद आया है.

दो सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने फ्रांस और जर्मनी सहित प्रमुख यूरोपीय देशों से 20 दिनों के भीतर 10 करोड़ बैरल डीज़ल जारी करने का अनुरोध किया है.

फ्रांस के प्रस्ताव के तहत, यूरोपीय देश इस समय सीमा के भीतर प्रस्तावित मात्रा का एक हिस्सा जारी करेंगे.

एक सूत्र के अनुसार, यूरोपीय सरकारों ने डीज़ल के अपने भंडार को और कम करने के किसी भी समझौते के बदले में अमेरिका से डीज़ल निर्यात पर एकतरफा प्रतिबंध न लगाने के ठोस वादे की मांग पर चर्चा की है.

एलिसी पैलेस (फ़्रांस के राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास) ने घोषणा की है कि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों शुक्रवार दोपहर जी7 नेताओं के वीडियो सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें वैश्विक ऊर्जा स्थिति पर चर्चा की जाएगी.

एलिसी पैलेस ने कहा कि मैक्रां ने रात में ट्रंप से बात की और ईंधन की बढ़ती कीमतों से निपटने और विश्व स्तर पर रिफ़ाइन्ड पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया.

बातचीत की ख़बरों के बाद शुक्रवार को तेल की कीमतों में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई और यूरोपीय डीज़ल के वायदा कारोबार की कीमतों में लगभग पांच प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.

ट्रंप प्रशासन 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले घरेलू ईंधन की कीमतों को कम करने के लिए अमेरिकी डीज़ल निर्यात पर संभावित प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है.

दूसरी ओर, यूरोपीय देशों को ईंधन की बढ़ती लागत को कम करने और आपातकालीन भंडार बनाए रखने के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है.

इस बड़ी वजह युद्ध के कारण खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता है.

यूरोपीय सांख्यिकी कार्यालय के मई 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, प्रस्तावित डीज़ल की मात्रा यूरोपीय संघ के डीज़ल और गैस तेल के कुल आपातकालीन भंडार के लगभग 17 प्रतिशत के बराबर है.

मार्च में, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के सदस्य देशों ने रणनीतिक तेल भंडारों से 40 करोड़ बैरल तेल को तालमेल के तहत छोड़ने पर सहमति व्यक्त की, जो अब तक की सबसे बड़ी ऐसी निकासी है.

एजेंसी के कार्यकारी निदेशक, फातिह बिरोल ने इस सप्ताह कहा कि सदस्य देशों ने उस मात्रा का लगभग दो-तिहाई हिस्सा जारी कर दिया है.

ईरान के ऑटोमोटिव और रेलवे क्षेत्रों पर प्रतिबंध

कई जानकारों का मानना है कि नए अमेरिकी प्रतिबंधों से ईरान के आम लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं

अमेरिकी वित्त विभाग ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका ने ईरान के रेलवे और ऑटोमोटिव क्षेत्रों के साथ-साथ इन क्षेत्रों के विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर प्रतिबंध लगा दिए हैं, जो ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के अमेरिकी प्रयासों का ताज़ा कदम है.

ये प्रतिबंध 24 अगस्त को मंत्रालय की ओर से घोषित “आर्थिक बहिष्कार” प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिसका मक़सद ईरान को युद्ध, मिसाइल उद्योग, साइबर हमलों और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड को आर्थिक मदद से दूर रखना है.

इस कदम से ईरान पर अमेरिकी आर्थिक दबाव का दायरा समुद्र से लेकर ज़मीन तक बढ़ गया है, और उन क्षेत्रों को निशाना बनाया गया है जिन पर ईरान नौसैनिक नाकेबंदी के कारण होर्मुज़ से तेल आपूर्ति रुकने के बाद से निर्भर रहा है.

हालांकि, एक विश्लेषक का कहना है कि प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाने से आम ईरानियों पर भारी बोझ पड़ने का ख़तरा है.

अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी लगा दी, जिससे उसे तेल, उर्वरक, रसायन और अन्य सामान के परिवहन के लिए रेल और ऑटोमोटिव क्षेत्रों पर अपनी निर्भरता बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS