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फिर तो मैं इतिहास बना दूंगा, क्या था निर्मल पुर्जा का प्लान; क्यों चुना था PoK पीक

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Source :- LIVE HINDUSTAN

जाने-माने पर्वतारोही निर्मल पुर्जा का निधन हो गया। वह छह पर्वतारोहियों की टीम के साथ एक मिशन पर थे, जब एक हिमस्खलन की चपेट में आ गए। निम्स-दाई के नाम से मशहूर निर्मल की मौत के बाद उनका एक्स पर किया अंतिम पोस्ट वायरल हो रहा है।

जाने-माने पर्वतारोही निर्मल पुर्जा का निधन हो गया। वह छह पर्वतारोहियों की टीम के साथ एक मिशन पर थे, जब एक हिमस्खलन की चपेट में आ गए। निम्स-दाई के नाम से मशहूर निर्मल की मौत के बाद उनका एक्स पर किया अंतिम पोस्ट वायरल हो रहा है। 27 जुलाई को किए गए इस पोस्ट में निर्मल ने बताया कि पीओके स्थित इस ‘ब्रॉड पीक’ पर चढ़ना कभी योजना का हिस्सा था ही नहीं। उन्होंने लिखा था कि मिशन बदलते रहते हैं। हैट्रिक प्रोजेक्ट इसलिए फोकस में था, क्योंकि यह एक बड़ा मिशन था। इसके बाद निर्मल ने लिखा था कि जो लोग चुपचाप काम कर रहे होते हैं, मौके उनके लिए चीखते नहीं हैं, बल्कि कान में फुसफुसाते हैं। इसके बाद निर्मल ने अपनी एक महत्वाकांक्षा के बारे में भी बताया था।

इसलिए चुना था खास मिशन

निर्मल ने आगे लिखा था कि शुरुआत में केवल जी2 पर ही चढ़ाई करने की योजना था। लेकिन पाकिस्तान के लिए जाते हुए योजना बदल गई। मेरे दिमाग में आया कि अगर मैं ब्रॉड पीक पर पहुंच जाता हूं तो केवल चो ओयू बचेगा। इसके बाद मैं इतिहास में पहला व्यक्ति बन जाऊंगा, जिसने आठ हजार फीट की ऊंचाई वाली सभी 14 चोटियों पर बिना ऑक्सीजन दो बार चढ़ाई की है। अपने इस सपने का पीछा करते हुए पुर्जा ने इस मिशन की शुरुआत की थी, जो उनका आखिरी मिशन बनकर रह गया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा था, ‘ब्रॉड पीक, मैं केवल सुरक्षित चढ़ाई और नीचे वापसी की कामना करता हूं। मैं किसी भी पर्वत को हल्के में नहीं लेता। एक भी नहीं। जैसे ही मेरा पैर बेसकैंप छोड़ता है, यह 100 परसेंट होता है। हमेशा ऐसा रहा है। हमेशा ऐसा रहेगा।’ गुरुवार को हिमस्खलन के बाद भी, उनकी ट्रैकिंग डिवाइस में हलचल नजर आई। इसलिए उम्मीद थी कि पुर्जा जिंदा वापस लौट आएंगे।

शुरू में जिंदा होने की थी उम्मीद

शुरुआत में बचाव दल को यकीन था कि निर्मल पुर्जा जिंदा हैं और बचाव टीम का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, उनके जिंदा रहने की उम्मीद खत्म होती चली गई। खोज और बचाव अभियान में शामिल कर्मियों ने कहाकि उनका सबसे बुरा डर उस वक्त यकीन में बदल गया, जब बेस कैंप से उड़ाए गए ड्रोन ने चार पर्वतारोहियों, निर्मल पुर्जा ‘निम्सदाई’, किली पेंबा शेरपा, नीमा शेरपा और वांग झोंग के शव जैसी चीजें देखीं। यह कॉन्कॉर्डिया साइड की कैम्प 1 के ठीक नीचे था। उसी खोज टीम ने यह भी बताया कि हिमस्खलन में फंसे सभी 10 पर्वतारोही कॉन्कॉर्डिया साइड पर मर गए हो सकते हैं।

कौन थे निर्मल पुर्जा

पूर्व गोरखा सैनिक और ब्रिटेन की स्पेशल फोर्सेज में रह चुके निर्मल पुर्जा हिमालय की ऊंची चोटियों को फतह करने वाले दुनिया के अग्रणी पर्वतारोहियों में गिने जाते हैं। 2019 में उन्होंने ‘प्रोजेक्ट पॉसिबल’ अभियान के तहत छह महीने से कुछ अधिक समय में 8,000 मीटर से ऊंची सभी 14 चोटियों पर चढ़कर इतिहास रच दिया था। पुर्जा का जन्म 25 जुलाई 1983 को गंडकी प्रांत के म्यागदी जिले में हुआ था, पर वे चितवन में पले-बढ़े। पुर्जा ने 2003 से 16 साल तक सेना में रहे, जिसमें से उन्होंने छह साल गोरखा के तौर पर और 10 साल ब्रिटिश स्पेशल फोर्सेज (एसबीएस) के सदस्य के रूप में बिताए।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN